चीन के भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने के दावे पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टता की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी बेहद चिंताजनक है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने X पर लिखा- 4 जुलाई को सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत वास्तव में चीन का सामना कर रहा था। अगर चीन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ खड़ा था, तब उसका भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा बेहद चिंताजनक है। ऐसे बयान हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक उड़ाने जैसे लगते हैं।
रमेश ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प लगातार यह दावा करते रहे हैं कि 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप किया था। ट्रम्प ने अलग-अलग मंचों और कम से कम सात देशों में 65 बार यह बात कही, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने मित्र के इन दावों पर आज तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
रमेश की 2 बड़ी बातें…
- इस दावे को भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में भी देखना जरूरी है। भारत ने चीन से दोबारा बातचीत तो शुरू की है, लेकिन यह बातचीत चीनी शर्तों पर होती दिख रही है। 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई ‘क्लीन चिट’ से भारत की बातचीत की स्थिति कमजोर हुई।
- देश का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और हमारे निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन से आयात पर निर्भर है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की उकसाने वाली गतिविधियां भी लगातार जारी हैं। ऐसे असंतुलित और शत्रुतापूर्ण हालात में, देश की जनता को यह साफ-साफ बताया जाना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोकने में चीन की क्या भूमिका थी।
भारत सरकार बोली- तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में आयोजित एक कार्यक्रम में दावा किया कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य तनाव को कम कराने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि चीन दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने में मदद करता रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर शेयर किया। भारत सरकार ने बुधवार को चीन के इस दावे को खारिज किया है। भारत ने कहा है कि संघर्ष को रुकवाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं है।
भारत पहले भी तीसरे पक्ष की भूमिका नकार चुका है
चीन और ट्रम्प के दावों के उलट भारत सरकार पहले भी साफ तौर पर कह चुकी है कि इस पूरे मामले में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी। भारत का कहना है कि यह तनाव सीधे भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बातचीत से ही खत्म हुआ।
भारत के मुताबिक, भारी नुकसान होने के बाद पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी ने भारतीय सैन्य अधिकारी से संपर्क किया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ने भारतीय DGMO से बात की और इसके बाद दोनों देशों ने 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
अब ऑपरेशन सिंदूर के बारे में पढ़ें..
भारत ने पाकिस्तान पर हमले की शुरुआत 6 और 7 मई की रात से की। भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया था। इन ठिकानों में पाकिस्तान के पंजाब राज्य के बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाके भी शामिल थे।
इसके जवाब में 8 मई की शाम को पाकिस्तान ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला करने की कोशिश की। उसने तुर्किये और चीन के ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन इसमें उसे कामयाबी नहीं मिली।
भारत की वायु रक्षा पूरी तरह से एक्टिव थी और छोटे हथियारों से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम तक हर हथियार तैयार था। इन हथियारों ने पाकिस्तान के ड्रोन को काफी नुकसान पहुंचाया।
भारतीय सेना ने भी सीमा के दूसरी तरफ भारी तोपों और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह से उलझा कर रखा और उसे बड़ा नुकसान पहुंचाया।
