नितिन नवीन नहीं जाएंगे राज्यसभा, क्या नीतीश हैं कारण:नवीन को विधायक बनाए रखने के पीछे मोदी-शाह की क्या है रणनीति, तेजस्वी के लिए ओवैसी जरूरी
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सबकी नजरें नितिन नवीन पर टिकी हैं। क्या वो अब राज्यसभा की राह पकड़ेंगे या विधायक बने रहकर बिहार की जमीनी राजनीति को मजबूत करेंगे?
सूत्रों की मानें तो नितिन नवीन राज्यसभा नहीं जाएंगे, बल्कि विधायक ही बने रहेंगे। यह कोई साधारण निर्णय नहीं है, मोदी-शाह की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
क्यों CM नीतीश कुमार इस फैसले के केंद्र में हैं। क्यों तेजस्वी यादव के लिए असदुद्दीन ओवैसी जरूरी हो गए हैं। और सबसे बड़ा सवाल-45 साल के इस युवा चेहरे को पटना में रोके रखकर भाजपा क्या बड़ा दांव खेल रही है। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…।
सवाल-1ः नितिन नवीन राज्यसभा नहीं जाएंगे। इसकी चर्चा कैसे शुरू हुई?
जवाबः नितिन नवीन राज्यसभा नहीं जाएंगे, इस चर्चा को बल उनको दिल्ली में मिले बंगले से मिल रही है। दरअसल, दिल्ली के VVIP इलाके में 1 मोतीलाल नेहरू मार्ग पर टाइप-8 सरकारी आवास दिया गया है। केंद्र सरकार के आवास का अलॉटमेंट डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट के नियमों के तहत होता है।
- डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट के नियमों के मुताबिक, किसी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को, यदि वह केंद्रीय मंत्री, लोकसभा सांसद या राज्यसभा सांसद नहीं है, तो टाइप-8 बंगला दिया जाता है।
- नितिन नवीन अभी बिहार में विधायक हैं और वह इस मानक पर पूरी तरह फिट बैठते हैं।
- वह अप्रैल में इस बंगले में शिफ्ट होंगे। इसी समय बिहार की 5 सहित राज्यसभा की 71 सीटों पर चुनाव होगा। इसका मतलब हुआ कि वह राज्यसभा नहीं जा रहे हैं।
शिबू सोरेन के आवास में शिफ्ट होंगे नवीन
- नितिन नवीन को अलॉट बंगले में पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन रहते थे। शिबू सोरेन के निधन के बाद आवास खाली हुआ है। इसके बाद अब यह बंगला बीजेपी अध्यक्ष को दिया गया है।
- पहले नितिन नवीन को 9, सुनहरी बाग लेन का बंगला दिया गया था। जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास के नजदीक था। बताया जा रहा है कि नितिन नवीन को वह बंगला ठीक नहीं लगा।
- उन्होंने बदलने का आवेदन दिया, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। नितिन नवीन के गृह प्रवेश में PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल हो सकते हैं।
सवाल-2ः क्या नितिन नवीन भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जो विधायक ही बने रहेंगे?
जवाबः बिल्कुल नहीं। नितिन गडकरी और अमित शाह ऐसा कर चुके हैं।
- नितिन गडकरी 23 दिसंबर 2009 से 23 जनवरी 2013 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इस दौरान वह महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य थे। उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल MLC बनकर ही पूरा किया।
- अमित शाह 9 जुलाई 2014 से 20 जनवरी 2020 तक दो टर्म भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। उनका पहला कार्यकाल 2016 तक चला। इस दौरान वह गुजरात विधानसभा के सदस्य मतलब विधायक रहे।
- 2016 में ही शाह को दूसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। तब भी वह गुजरात से विधायक ही थे। 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद उनको राज्यसभा भेजा गया। 2019 लोकसभा चुनाव में वह सांसद का चुनाव जीते और केंद्र में गृह मंत्री बन गए।
सवाल-3ः नितिन नवीन बिहार में ही विधायक क्यों बने रहेंगे? राज्यसभा क्यों नहीं जाएंगे?
जवाबः इसके पीछे 2 बड़े कारण हो सकते हैं…
1. नीतीश खेल ना करें, इस पर मोदी-शाह की पैनी नजर
बिहार भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण स्टेट है। 2025 विधानसभा चुनाव में शानदार जीत मिली है। बिहार NDA में चाहे BJP संख्या बल के हिसाब से JDU से आगे है, लेकिन बीच-बीच में कांग्रेस के 6 विधायकों के JDU में शामिल होने की खबरें आ रही है।
- अगर ऐसा हुआ तो NDA में JDU सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। यह सारी उठापटक की खबरें इस बात की ओर इशारा कर रही है कि JDU-BJP में अंदरखाने कुछ है।
- सूत्रों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में नितिन नवीन के जरिए मोदी-शाह बिहार पर पैनी नजर रखना चाहते हैं।
- पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘नितिन नवीन विधायक बने रहेंगे तो वह विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने आते रहेंगे। उनके बार-बार आने से केंद्रीय नेतृत्व बिहार में पार्टी संगठन और सरकार पर नजदीक से नजर रख सकेगा।’
2. जातीय समीकरण साधेगी भाजपा
- 5 राज्यसभा सीटों में से 2 सीटें भाजपा को मिलनी तय है। नितिन नवीन कायस्थ समाज से आते हैं। जो फॉरवर्ड में आता है।
- सूत्रों के मुताबिक, पार्टी बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार तय करते समय जातीय समीकरणों को साधेगी। एक फॉरवर्ड और एक OBC-EBC में से कोई एक हो सकता है।
- फॉरवर्ड कोटे से भोजपुरी स्टार पवन सिंह का नाम आगे चल रहा है। हालांकि, पार्टी ने अब तक अपना पत्ता नहीं खोला है।
सवाल-4ः बिहार में राज्यसभा की कितनी सीटों पर चुनाव होंगे और कौन सी पार्टी कितनी जीत सकती है?
जवाबः बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं। जिसमें JDU कोटे की 2, RJD कोटे की 2 और RLM की एक सीट शामिल है।
JDU से राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और केन्द्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर सांसद हैं, तो RJD से प्रेम गुप्ता और ऐडी सिंह। वहीं, RLM से उपेन्द्र कुशवाहा।
फरवरी के आखिर तक राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। अप्रैल में चुनाव होगा।
BJP-JDU का 2-2 सीट कंफर्म, 5वीं पर इम्तिहान
- 2025 विधानसभा चुनाव में NDA को 243 में से 202 सीटें मिली हैं। राज्यसभा चुनाव में खाली सीट+1 का फॉर्मूला चलता है। जैसे- बिहार में 5 सीट खाली है तो 5+1 फॉर्मूला चलेगा। इसके तहत एक राज्यसभा सांसद को जिताने के लिए 41 वोट चाहिए।
- 41 वोटों के लिहाज से BJP और JDU के 2-2 कैंडिडेट आराम से चुनाव जीत जाएंगे। 5वीं सीट पर RJD को जीतने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
- चर्चा थी कि चिराग पासवान अपनी मां के लिए 5वीं सीट चाहते हैं, लेकिन उन्होंने इसका खंडन कर दिया। LJP(R) अध्यक्ष पासवान ने कहा था, ‘हमें राज्यसभा की सीट नहीं चाहिए। एक सीट के लिए अपनी पार्टी के कई नेताओं को नाराज नहीं करना चाहते हैं।’
- लेकिन अगर 5 सीटों पर 6 प्रत्याशी हुए तब गणित बदल जाएगा। तब 4 सीटों के लिए 48-48 वोटों की जरूरत होगी और 5वें उम्मीदवार को जीत के लिए साढ़े 33 वोट।
सवाल-5ः क्या महागठबंधन राज्यसभा की सीट जीत सकता है?
जवाबः एक सीट जीत सकता है, लेकिन उसके लिए पूरे महागठबंधन को एकजुट होना होगा। साथ में असदुद्दीन ओवैसी की मदद लेनी होगी। इसे ऐसे समझिए…
- NDA के पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए।
- महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। अगर सब एकजुट हुए तो एक सीट मिल सकती है।
- ओवैसी की पार्टी किंगमेकर है, वह जिसे भी समर्थन करेगी, उसकी जीत पक्की है। NDA अगर ओवैसी की पार्टी का समर्थन या विपक्ष के दूसरे दल को तोड़ लेती है तो 5वीं सीट भी जीत लेगा।
RJD नहीं जीती तो 2030 में राज्यसभा में 0 हो जाएगी
- RJD यदि 5वीं सीट नहीं जीत पाएगी तो अगले विधानसभा चुनाव यानी 2030 में उसका राज्यसभा में कोई सांसद नहीं होगा।
- अभी RJD के राज्यसभा में 4 सांसद हैं। प्रेम गुप्ता और ऐडी सिंह का कार्यकाल इस साल खत्म हो जाएगा। संजय यादव और मनोज झा का कार्यकाल 2030 विधानसभा चुनाव से पहले खत्म हो जाएगा।
