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मणिपुर में खेमचंद ने सरकार बनाने का दावा पेश किया:शपथ ग्रहण शाम 6 बजे; 2 डिप्टी CM भी होंगे, कुकी नेता पहिला उपमुख्यमंत्री होंगी

मणिपुर में खेमचंद ने सरकार बनाने का दावा पेश किया:शपथ ग्रहण शाम 6 बजे; 2 डिप्टी CM भी होंगे, कुकी नेता पहिला उपमुख्यमंत्री होंगी

नई दिल्ली3 घंटे पहले
खेमचंद इंफाल पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया।

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के एक साल के भीतर NDA सरकार फिर से बहाल होने जा रही है। विधायक दल का नेता युमनाम खेमचंद सिंह बुधवार सुबह वरिष्ठ भाजपा नेताओं और विधायकों के साथ चार्टर्ड विमान से इंफाल पहुंचे और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक मुख्यमंत्री के रूप में खेमचंद का शपथग्रहण शाम 6 बजे लोकभवन में होगा। खेमचंद के साथ दो सरकार में दो उपमुख्यमंत्री होंगे, ताकि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

डिप्टी सीएम में कुकी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली नेमचा किपगेन और नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले लोधी दिखो होंगे। नेम्चा राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम होंगी। कोंथौजम गोविंदास सिंह को प्रस्तावित मंत्रिमंडल में गृह मंत्री बनाया जा सकता है।

दिल्ली भाजपा कार्यालय में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया।

राज्य में राष्ट्रपति शासन की समयसीमा खत्म हो रही

नई दिल्ली में मंगलवार को मणिपुर भाजपा के विधायक दल की बैठक हुई थी। इसमें भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया था। आज NDA के घटक दलों के विधायकों की बैठक में तीनों नामों पर मुहर लग सकती है।

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा के कारण 9 फरवरी 2025 को तत्कालीन CM एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था।

इसके 4 दिन बाद, 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। अब 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन की समयसीमा खत्म हो रही है।

युमनाम खेमचंद बीरेन सिंह के नजदीकी, लेकिन कट्‌टर मैतेई नहीं

युमनाम खेमचंद सिंग्जामेई क्षेत्र (इंफाल वेस्ट) से भाजपा विधायक हैं। 2017-2022 तक मणिपुर विधानसभा स्पीकर रहे। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की दूसरी सरकार में मंत्री रहे। वे मैतेई समुदाय से आते हैं, जो मणिपुर के घाटी क्षेत्र में बहुसंख्यक हैं। बीरेन सिंह के साथ नजदीकी भी हैं।

हाल के महीनों में वे शांति प्रयासों में सक्रिय रहे। मई 2023 हिंसा के बाद दिसंबर 2025 में कुकी बहुल इलाकों और रिलीफ कैंप का दौरा करने वाले वे पहले मैतेई नेता हैं। बीरेन सिंह की तुलना में मध्यमार्गी माने जाते हैं। यही बात इन्हें कट्टर मैतेई लाइन से अलग करती है।

नेम्चा किप्गेन पूर्व CM बीरेन सिंह के दो कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं।

डिप्टी CM बनने वाली नेम्चा बीरेन सरकार में मंत्री रह चुकीं

नई सरकार में कुकी-जो समुदाय को संतुष्ट करने के लिए नेम्चा किप्गेन काे​ उपमुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। नेम्चा 2017 और 2022 में कुकी बहुल कांगपोकपी से भाजपा की विधायक हैं। बीरेन सिंह के पहले कार्यकाल (2017-2020) में उन्होंने सामाजिक कल्याण एवं सहकारिता मंत्री का पद संभाला।

बीरेन सिंह के दूसरे कार्यकाल में वे वाणिज्य एवं उद्योग, वस्त्र एवं सहकारिता विभाग की कैबिनेट मंत्री हैं। मैतेई-कुकी जाति हिंसा के दौरान इम्फाल में उनका सरकारी आवास जला दिया गया था। वे उन 10 कुकी-जो विधायकों में हैं, जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग प्रशासन की मांग की थी।

मणिपुर विधानसभा में BJP के अभी 37 विधायक

मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के 37 विधायक हैं। सरकार का कार्यकाल 2027 तक है। हालांकि, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद विधानसभा निलंबित कर दी गई थी। 2022 के चुनाव में 32 भाजपा विधायक जीते थे।

JDU ने छह सीटें जीती थीं, जिनमें से पांच विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए। अन्य विधायकों में से छह NPP से, पांच NPF से, पांच कांग्रेस से, दो कुकी पीपुल्स अलायंस से, एक जनता दल (यूनाइटेड) से और तीन निर्दलीय हैं। एक मौजूदा विधायक के निधन के बाद एक सीट खाली है।

कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा की 3 मुख्य कारण

1. ST (अनुसूचित जनजाति) दर्जे की मांग: 14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए ST का दर्जा देने पर सिफारिश भेजने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद कुकी समुदाय में आक्रोश फैला और हिंसा भड़की।

कुकी पहले से ST श्रेणी में है। उन्हें डर है कि अगर मैतेई को भी ST का दर्जा मिला, तो वे पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीद सकेंगे और इससे उनका सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

मणिपुर के इंफाल घाटी में लगभग 10% भूमि क्षेत्र है, जहां मैतेई बहुसंख्यक रहते हैं। बाकी 90% पहाड़ी इलाका कुकी और नगा समुदायों का है। यह क्षेत्र आदिवासी जमीन (Tribal Lands) के अंतर्गत आता है और मैतेई यहां जमीन नहीं खरीद सकते।

2. अलग कुकी प्रशासन की मांग: कुकी समुदाय ‘कुकीलैंड’ या ‘जूमलैंड’ नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं । मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इस मांग को राज्य की अखंडता के लिए खतरा मानती है।

3. कुकी पर ड्रग्स तस्करी का आरोप: कुकी समुदाय पर म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगता रहा है। सरकार ने भी कुकी पर अवैध अफीम की खेती की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया, जिससे सरकार के प्रति उनका अविश्वास और बढ़ गया।

कुकी का मानना है कि उनके समुदाय को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। कुकी समुदाय का आरोप है कि मणिपुर सरकार (पूर्व भाजपा सरकार) मैतेई का पक्ष लेती है। वे सुरक्षाबलों और पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हैं।

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