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मैसूर लोकसभा सीट पर CM सिद्दारमैया की खास नजर:BJP ने पूर्व राजघराने के वंशज को टिकट दिया, कांग्रेस से एम लक्ष्मण मैदान में

मैसूर लोकसभा सीट पर 26 अप्रैल को वोटिंग होगी।

कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं। इसमें से एक सीट मैसूर की भी है। इस बार मैसूर सीट की लड़ाई दिलचस्प होने वाली है। क्योंकि, कांग्रेस पार्टी चुनाव को आम आदमी बनाम राजा बता रही है।

बीजेपी ने मैसूर के पूर्व राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार को अपना कैंडिडेट बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने पार्टी के स्टेट स्पोक्सपर्सन एम लक्ष्मणा वोक्कालिगा को टिकट दिया है।

मैसूर लोकसभा सीट राज्य के कांग्रेसी सीएम सिद्दारमैया के लिए भी बड़ी अहम बताई जा रही है। क्योंकि वे जिले की वरुणा विधानसभा सीट से विधायक हैं। जिसके कारण सिद्दारमैया के लिए मैसूर सीट पर जीत हासिल करना और भी जरूरी कहा जा रहा है।

हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। बीजेपी के प्रताप सिम्हा ने यहां से जीत हासिल की थी।

यदुवीर वाडियार मैसूर राजवंश के 27 वंशज हैं।

बीजेपी ने बदला प्रत्याशी, कांग्रेस ने कैंडिडेट वोक्कालिगा समुदाय से
बीजेपी ने 2019 में पार्टी के लिए जीत हासिल करने वाले प्रताप सिम्हा का टिकट काटकर पूर्व राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार को कैंडिडेट बनाया। वहीं, कांग्रेस ने एम लक्ष्मण को टिकट दिया।

लक्ष्मण वोक्कालिगा (कृषि) समुदाय से हैं। वहीं, भाजपा के प्रताप सिम्हा भी कृषि समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। लक्ष्मण की मैसूर लोकसभा में अच्छी पकड़ बताई जाती है। अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद उन्होंने कहा, ”कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर भाजपा को करारा जवाब दिया है, क्योंकि राज्य में विपक्षी दल अक्सर आरोप लगाते थे कि सिद्धारमैया वोक्कालिगा विरोधी हैं।”

सिद्दारमैया के लिए करो या मरो जैसी स्थिति
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, सूत्रों के मुताबिक मैसूर लोकसभा सीट पर जीत हासिल करना सिद्दारमैया के लिए करो और मरो जैसा है। 24 मार्च से 4 दिन तक वे मैसूर में रहे। चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की और चुनावी प्रचार के लिए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए।

राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि सिद्धारमैया पर दबाव काफी स्पष्ट है, क्योंकि उन्हें कर्नाटक में लोकसभा चुनाव में जनता के बीच अपनी पकड़ दिखानी है और इससे भी अधिक मैसूर में अपनी पकड़ दिखानी है। मैसूर की लड़ाई आसान नहीं है क्योंकि यह एक रॉयल बैटल है। जो सीएम के साथ-साथ मैसूर के पूर्व शाही परिवार का बहुत अहम है।

जब हाल ही में सिद्दारमैया से पूछा गया कि क्या मैसूर सीट उनके लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा है। तो उन्होंने कहा था कि सभी 28 लोकसभा सीटें उनके लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा हैं। सीएम सिद्दा के करीबियों का कहना है कि सिद्धारमैया कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और अपने घरेलू क्षेत्र में हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

साथ ही सिद्दारमैया ने पार्टी कार्यकर्ताओं को कहा है कि वे पूर्व शाही परिवार के खिलाफ कुछ भी गलत नहीं बोलें, नहीं तो इसका असर चुनाव में दिखेगा।

लोकतंत्र में सब एक समान- यदुवीर कृष्णदत्त
वहीं, मैसूर के चुनाव को राजा बनाम आम आदमी कहे जाने पर बीजेपी प्रत्याशीपूर्व राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने कहा, ”लोकतांत्रिक भारत में कोई राजा नहीं है और कानून की नजर में हर कोई बराबर है।”

कर्नाटक में बीजेपी ने 2019 में 25 सीट जीती थीं
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 28 में से 25 लोकसभा सीट जीती थीं। मैसूर की सीट पर भी पार्टी ने जीत हासिल की थी। भाजपा ने एक सीट पर निर्दलीय को समर्थन दिया था, जिसने जीत हासिल की थी। वहीं, गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस और JDS को एक-एक सीट मिली थी।

मैसूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र दो जिलों मैसूर और कोडागु में फैला हुआ है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटें, JDS ने दो और भाजपा ने एक सीट जीती थी।

लेकिन इस बार JDS ने भाजपा के साथ गठबंधन किया है और उसका मैसूर लोकसभा क्षेत्र में काफी वोट बैंक है। माना जा रहा है कि यदुवीर वाडियार को उनके पॉलिटिकल डेब्यू में इस गठबंधन का बड़ा फायदा मिल सकता है।

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एंटनी ने कहा- I.N.D.I.A. के लिए चुनाव करो-मरो जैसा: डीके शिवकुमार बोले- कर्नाटक में BJP की बुरी स्थिति, कांग्रेस 28 में से 20 सीटें जीतेंगे

​​​​​​​​​​​​​​लोकसभा चुनाव 2024 के पार्टियों के प्रत्याशियों की लिस्ट का आना जारी है। साथ ही पॉलिटिकल लीडर्स की बयानबाजी भी जारी है। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुताबिक कर्नाटक में बीजेपी बुरी स्थिति में है।

वहीं, कांग्रेस के सीनियर लीडर एके एंटनी (83) ने कहा कि I.N.D.I.A. के लिए ये लोकसभा चुनाव करो या मरो का चुनाव है। ये चुनाव तय करेगा कि I.N.D.I.A. का विचार अस्तित्व में रहना चाहिए या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनका स्वास्थ्य ठीक रहा तो वे UDF उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे। पूरी खबर पढ़ें

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