Headlines

यूपी पुलिस मारे नहीं तो क्या गोली खाए’:पिस्तौल दी है, ट्रेनिंग मिली है; एनकाउंटर पर योगी का जवाब

‘यूपी पुलिस मारे नहीं तो क्या गोली खाए’:पिस्तौल दी है, ट्रेनिंग मिली है; एनकाउंटर पर योगी का जवाब

लखनऊ13 मिनट पहले
सीएम योगी ने मंगलवार को लखनऊ के ताज होटल में यूपी फार्मा कॉन्क्लेव का इनॉगरेशन किया।

‘2012 से 2017 के बीच यूपी में 900 से ज्यादा दंगे हुए। ऐसा कोई शहर नहीं था, जिसने कर्फ्यू का दौर न देखा हो। काई व्यापारी ऐसा नहीं था, जिसने गुंडा टैक्स न दिया हो। अपराध हावी था। ऐसे वक्त पर मुझे दायित्व सौंपा। हमने तय किया- जीरो टॉलरेंस।’

‘अगर अपना व्यक्ति भी गलत करेगा तो उसके लिए भी वही कानून लागू होगा, जो माफिया और अपराधी के लिए है। बहुत बार लोग टिप्पणी करते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों मार दी। अगर पुलिस गोली न मारे तो क्या खाए। दोनों काम एक साथ नहीं चल सकते।’

‘अगर उस अपराधी के पास गोली चलाने की आजादी है तो हमने भी पुलिस को पिस्तौल दी है। उन्हें ट्रेनिंग ही इस बात की दी गई है कि अपराधी जिस भाषा में समझे, उस भाषा में समझाने का काम करे।’

ये बातें CM योगी ने मंगलवार को कहीं। वे लखनऊ में यूपी फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। उनके साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी थे। इस दौरान सरकार ने 11 कंपनियों के साथ MoU किया। इसके तहत मेडिकल डिवाइस और नई दवाओं पर मिलकर शोध किया जाएगा।

योगी की स्पीच की बड़ी बातें

1. 2017 से पहले दंगे होते थे, कंपनियां पलायन कर रही थी योगी ने कहा- 2017 से पहले दंगे होते थे। अपहरण होते थे। कोई डॉक्टर, व्यापारी, बिजनेसमैन ऐसा नहीं था, जिसने गुंडा टैक्स न दिया हो। युवा पलायन कर रहा था। कंपनियां पलायन कर रही थी। जब सुरक्षा नहीं होगी तो कारोबारी कैसे रुक पाएंगे। पहले जो कंपनियां थीं, वो भी जाने लगी थी। यह सभी की पीड़ा थी। जहां बचपन बीता, उस जमीन को छोड़ना बहुत कष्टदायी होता है। यह हर उस व्यक्ति की पीड़ा है, जिसने उस दौर को देखा है।

2. चूज एंड पिक से काम नहीं चलेगा, अपनों पर भी एक्शन योगी ने कहा- 2017 में पीएम मोदी ने मुझे जिम्मेदारी सौंपी। जब हमने देखा तो तय किया कि जीरो टॉलरेंस। चूज एंड पिक से काम नहीं चलेगा यानी अगर अपना व्यक्ति भी गलत करेगा तो उस पर एक्शन होगा। अपना पराया कुछ नहीं होगा। जब हमने एक्शन शुरू किया, प्रयास किया कि कानून के दायरे में रहकर करें, लेकिन कई बार अगर कोई कानून से डर नहीं रहा था, तो ऐसे व्यक्ति को कानून के दायरे में लाकर कानून की भाषा समझाना तात्कालिक परिस्थिति हो जाती है।

3. समझाया गया तो बड़े-बड़े काम आराम से होने लगे योगी ने कहा- जब अपराधियों, माफियाओं और अराजक तत्वों को समझाया गया तो बड़े-बड़े काम आराम से होने लगे। कही शांति भंग की बात नहीं हुई, अराजकता की बात नहीं हुई, गुंडागर्दी की बात नहीं हुई। दंगा फसाद नहीं है। आज कहीं भी ऐसी स्थिति नहीं है। यूपी निवेश के बेहतरीन मानक स्थापित कर रहा है।

4. कानून के साथ खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं योगी ने कहा- कानून के साथ किसी को खिलवाड़ करने की छूट नहीं है। अगर कानून को कोई आंख दिखाता है तो उसको कानून अपने तरीके से अपने दायरे में लाकर अपने हिसाब से समझाता है। एक वक्त यूपी के अंदर लोगों के मन में अविश्वास था, असुरक्षा थी, क्योंकि अराजकता थी। आज वो दूर की कौड़ी हो चुकी है।

5. 2017 से पहले के हालात से निपटने के लिए रिहर्सल करानी पड़ती है योगी ने कहा- 2017 से पहले के हालात से निपटने के लिए मुझे अपने लोगों को सिखाना पड़ता है। कभी-कभी रिहर्सल करानी पड़ती है कि कैसे अगर कभी दंगा हो जाए, तो क्या करेंगे, क्योंकि 9 साल में लोग भूल गए हैं कि दंगा कैसे होता है। मेरे रहते तो दंगा कर नहीं सकते तो मुझे खुद खड़ा होना पड़ता है कि अब मेरे सामने प्रदर्शन करो यानी रिहर्सल करो।

हाईकोर्ट ने कहा था- यूपी पुलिस तारीफ- प्रमोशन के लिए एनकाउंटर कर रही

यूपी में 9 साल में करीब 15 हजार से ज्यादा एनकाउंटर हुए हैं। इसमें करीब 280 बदमाश मारे गए हैं। 3 दिन पहले यूपी पुलिस के ‘हाफ एनकाउंटर’ तरीके पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा- पुलिस अधिकारी सिर्फ तारीफ, समय से पहले प्रमोशन और सोशल मीडिया पर वाहवाही के लिए अनावश्यक रूप से गोली चला रहे हैं।

हाईकोर्ट ने 6 पॉइंट पर गाइडलाइंस जारी की। जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की बेंच ने साफ चेतावनी दी- अगर पुलिस एनकाउंटर मामलों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन नहीं हुआ तो जिले के SP, SSP और पुलिस कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट की अवमानना के दोषी माने जाएंगे।

हाईकोर्ट ने कहा था-

QuoteImage

आरोपी को सज़ा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां कानून संविधान के अनुसार चलता है, न कि व्यक्तिगत सोच के आधार पर।

QuoteImage

कोर्ट ने यह भी कहा था कि कई मामलों में पुलिस अधिकारी जानबूझकर आरोपी के घुटने के नीचे पैर में गोली मारते हैं, ताकि मामला ‘हाफ एनकाउंटर’ कहलाए और वे बहादुरी का श्रेय ले सकें। कानून की नजर में यह तरीका पूरी तरह अस्वीकार्य है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को सख्ती से पालन करने के लिए गाइडलाइंस जारी की।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आया आदेश यह सख्त आदेश शुक्रवार को कोर्ट ने एक आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए दिया। आरोपी को पुलिस एनकाउंटर में गंभीर चोटें आई थीं। कोर्ट ने पाया कि एनकाउंटर में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, जिससे हथियार इस्तेमाल करने की जरूरत पर सवाल खड़े होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की PUCL गाइडलाइंस की अनदेखी पर नाराज़गी

हाईकोर्ट ने कहा- PUCL (पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज) बनाम महाराष्ट्र राज्य (2014) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइंस बना रखी है। इसके बावजूद यूपी में पुलिस बार-बार इन नियमों को नजरअंदाज कर रही है।

कोर्ट ने दो टूक कहा कि तारीफ़ या पुरस्कार पाने के लिए पुलिस को कानून हाथ में लेने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट की 6 सख्त गाइडलाइंस

1- FIR और जांच

  • एनकाउंटर में अगर आरोपी को गंभीर चोट लगती है तो FIR दर्ज होगी।
  • जांच CBCID या किसी अन्य थाने की टीम करेगी, जो एनकाउंटर में शामिल अधिकारी से वरिष्ठ स्तर की होगी।

2- FIR में नाम

  • FIR में पुलिसकर्मियों के व्यक्तिगत नाम आरोपी के रूप में लिखना जरूरी नहीं।
  • केवल टीम (STF या लोकल पुलिस) का उल्लेख किया जा सकता है।

3- मेडिकल और बयान

  • घायल आरोपी को तुरंत इलाज मिलेगा।
  • फिटनेस सर्टिफिकेट के बाद उसका बयान मजिस्ट्रेट या मेडिकल अफसर दर्ज करेगा।

4- कोर्ट को रिपोर्ट

  • पूरी जांच के बाद रिपोर्ट सक्षम अदालत को भेजी जाएगी, जो सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार काम करेगी।

5- प्रमोशन और अवॉर्ड पर रोक

  • एनकाउंटर के तुरंत बाद आउट ऑफ टर्न प्रमोशन, गैलेंट्री अवॉर्ड नहीं दिए जाएंगे।
  • अवॉर्ड तभी मिलेगा जब कमेटी जांच में बहादुरी पूरी तरह साबित हो।

8 साल में 259 अपराधियों को एनकाउंटर में ढेर किया

राज्य सरकार के अनुसार, मार्च 2017 से अक्टूबर 2025 तक यूपी पुलिस ने 259 अपराधियों को एनकाउंटर में ढेर किया है। इस दौरान 15,000 से अधिक पुलिस एनकाउंटर हुए, जिनमें 31,000 से ज्यादा अपराधी गिरफ्तार हुए और 10,000 से अधिक को गोली मारी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Budget 2024