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भोजशाला में पूजा और नमाज एक साथ होगी:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रशासन दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करे; धार छावनी में तब्दील

भोजशाला में पूजा और नमाज एक साथ होगी:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रशासन दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करे; धार छावनी में तब्दील

नई दिल्ली/भोपाल7 मिनट पहले
भोजशाला क्षेत्र में 300 मीटर के दायरे में नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। 8 हजार पुलिस बल तैनात है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को धार भोजशाला मामले में बड़ा आदेश दिया है। 23 जनवरी (बसंत पंचमी, शुक्रवार) को हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा की पूरी छूट दी गई है, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने प्रशासन को दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करने, विशेष पास व्यवस्था करने और शांति-सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह व्यवस्था हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की।

आदेश के मुताबिक हिंदू समुदाय को हर मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक निःशुल्क प्रवेश की अनुमति है। उस दिन आगंतुक एक-दो फूल और कुछ चावल के दाने ले जा सकते हैं।

उपर्युक्त रियायतों के अतिरिक्त, परिसर अन्य सभी दिनों में पर्यटकों के लिए खुला रहेगा। प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति 1 रुपए होगा। 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा। बता दें, सुरक्षा व्यवस्था के लिए धार में आठ हजार पुलिस बल और अफसर तैनात किए गए हैं।

बुधवार को CRPF की आईजी नीतू भट्टाचार्य धार पहुंचीं और भोजशाला परिसर का निरीक्षण किया।

हिंदू पक्ष ने कहा- बसंत पंचमी पर दिनभर पूजन होंगे सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है। कल बसंत पंचमी है और सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान होंगे।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी व्यवस्था की जाएगी, जैसा कि पूर्व वर्षों में किया जाता रहा है।

मस्जिद पक्ष बोला- नमाज के बाद परिसर खाली कर देंगे मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी। इसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा। हिंदू पक्ष की ओर से यह सुझाव दिया गया कि नमाज शाम 5 बजे के बाद कराई जाए, ताकि पूजा निर्बाध चल सके। इस पर मस्जिद पक्ष ने स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता। अन्य नमाजों के समय में बदलाव संभव है।

पढ़िए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा…

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बसंत पंचमी शुक्रवार को है। ऐसे में प्रशासन को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

हमने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और मध्य प्रदेश राज्य की ओर से महाधिवक्ता को सुना। केएम नटराज ने ASI की ओर से भी पक्ष रखा। इसी प्रकार, आवेदक की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलें भी सुनी गईं।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) और महाधिवक्ता ने सुझाव दिया कि जब यह स्पष्ट हो जाए कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय से कितने लोग आने वाले हैं, तो उसी परिसर के भीतर एक अलग और विशिष्ट स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित समय में नमाज अदा की जा सके। इसी प्रकार, पूर्व प्रथा के अनुसार, बसंत पंचमी के अवसर पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करने हेतु हिंदू समुदाय को भी अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए।

वकील ने कहा– नमाजियों की संख्या डीएम को बता देंगे याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया। खुर्शीद ने कहा कि 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की अनुमानित संख्या समय रहते और यथासंभव आज ही जिला मजिस्ट्रेट धार को उपलब्ध करा दी जाएगी। जिला प्रशासन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से, आगंतुकों के लिए निःशुल्क पास जारी कर सकता है या कोई अन्य निष्पक्ष उपाय अपना सकता है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और धार्मिक अनुष्ठान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों।

ASG और महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से बनाए रखी जाएगी। हम दोनों समुदाय से अपील करते हैं कि वे आपसी सम्मान और सहिष्णुता बनाए रखें। कानून-व्यवस्था के संरक्षण में राज्य एवं जिला प्रशासन का सहयोग करें।

धार की भोजशाला परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यहां ड्रोन से भी नजर रखी जाएगी।

वकील बोले- पूजा बाधित होगी… कोर्ट ने कहा- एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखें

एमपी के वकील- हमने परिसर में एक जगह तय की है, जहां नमाज होगी और पूजा भी बाधित नहीं होगी।

सीजेआई- इस पुरातात्विक परिसर को लेकर दोतरफा दावे हैं। मामला हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए हम इस पर कोई राय नहीं दे रहे।

हमारे सामने सिर्फ 2003 में आए ASI के आदेश का मामला है। उस आदेश में ASI ने शुक्रवार को नमाज और मंगलवार व बसंत पंचमी को पूजा की अनुमति दी थी। इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को है। दलील दी गई कि इसके कारण प्रशासन को व्यवस्था बनाने में दिक्कत हो सकती है। हमने मस्जिद पक्ष, मध्य प्रदेश सरकार और ASI को सुना। याचिकाकर्ता को भी सुना।

राज्य सरकार ने बताया कि मुस्लिम पक्ष 1 से 3 बजे के बीच आएंगे। उनके आने-जाने के लिए अलग रास्ता रखा गया है। नमाज की जगह भी तय कर दी गई है। हिंदू पक्ष की पूजा की भी जगह तय की गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि कानून-व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा।

एक वकील ने कहा- परिसर में आने के लिए एक ही गेट है।

सीजेआई- प्रशासन इसका ध्यान रखे। डीएम को अनुमानित संख्या की जानकारी दे दें। सभी पक्ष एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखें और प्रशासन से सहयोग करें।

भोजशाला परिसर में जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई है।

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक बोले- अखंड पूजा होगी भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी हमने स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं है। भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन होगा।

हिंदू समाज ने अखंड पूजा का संकल्प लिया था। इसी भावना को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। गर्भगृह में अखंड पूजा में विघ्न नहीं होगा। पूजा सूर्योदय के साथ शुरू होगी और सूर्यास्त तक चलेगी। शर्मा ने कहा– नमाज को लेकर कहा गया है कि भोजशाला में अन्य​​​​​​​ स्थान पर होगी। स्थान जिला प्रशासन को तय करना है। पूजास्थल पर तो पूजा ही होगी।

गोपाल शर्मा ने बसंत पंचमी के दिनभर का शेड्यूल बताया

पूजन : सूर्योदय से सूर्यास्त तक​​​​​​​

सुबह 7 बजे : मां सरस्वती महायज्ञ की शुरुआत

सुबह 10.30 बजे : लालबाग से शोभायात्रा की शुरुआत

दोपहर 12.15 बजे : धर्म सभा

दोपहर 1.15 बजे : वाग्देवी की महा आरती

मस्जिद कमेटी बोली- हम सुप्रीम आदेश का पालन करेंगे कमाल मौलाना मस्जिद कमेटी अध्यक्ष जुल्फिकार पठान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला हमें सर्व सम्मति से स्वीकार है। जो आदेश है, उसका हम निश्चित तौर पर पालन करेंगे। कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए हैं कि भोजशाला के भीतर ही सुरक्षा के बीच नमाज करवाई जाए। कोर्ट के आदेश का अभी अध्ययन चल रहा है। बाकी बिंदुओं पर मुस्लिम समाज बाद में प्रतिक्रिया देगा।

कलेक्टर बोले- बैठक करके रणनीति बनाएंगे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भोजशाला पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कलेक्टर ने कहा- हमारे वकील आदेश को पढ़ रहे हैं। आधिकारिक रूप से आदेश मिलने के बाद हम मीडिया को ब्रीफ करेंगे। फिर सभी के साथ बैठक करके आगे की रणनीति पर बात करेंगे। प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अलग-अलग व्याख्या न करें।

दिग्विजय बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करें कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा- मैं माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं। यह व्यवस्था साल 2003, 2013 और 2016 में कायम रखी गई थी, जिसमें सामान्य तौर पर मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम जाते हैं।

रात से ही भारी पुलिस बल तैनात, सीसीटीवी और ड्रोन से भी निगरानी

आठ हजार पुलिसकर्मियों का बल मौजूद धार में आठ हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। 50 ‎प्रतिशत फोर्स बुधवार रात तक पहुंच चुका था। इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने बताया कि पुलिस की ‎तैयारी पूरी है। ‎डिप्लॉय का प्लान भी बन चुका है। हम ‎सीसीटीवी से लगातार निगरानी रख रहे हैं। ‎हमने थ्रीडी मैपिंग भी कराई है, जिससे हर ‎परिस्थिति का पता चलेगा। बाइक पार्टी और मोबाइल पार्टी द्वारा भी‎ नजर रख रहे हैं। सभी मोहल्लों पर पुलिस की‎ नजर है।‎

अफसरों ने पुलिस बल को पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

भोजशाला का 300 मीटर क्षेत्र नो-फ्लाई जोन भोजशाला क्षेत्र में 300 मीटर के दायरे में नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस दायरे में ड्रोन, यूएवी, पैरा ग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून सहित किसी भी तरह की उड़ान गतिविधि पर पूरी तरह पाबंदी है।

सार्वजनिक सड़कों और स्थलों पर भवन निर्माण सामग्री, मलबा, टायर और लावारिस गुमटियां रखने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। उल्लंघन की स्थिति में नगर पालिका सारा सामान जब्त कर सकता है।

बसंत पंचमी पर वाग्देवी पूजा से पहले धार में भगवा झंडे लगाए गए हैं। पुलिस बल गश्त कर रहा है।

एआई से भीड़ पर नजर रख रही पुलिस इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने बताया कि इस बार ड्रोन कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए भीड़ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। AI सिस्टम भीड़ की संख्या, उसकी दिशा और किसी स्थान पर अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत जैसी जानकारियां रियल टाइम पर उपलब्ध करा रहा है।

ये जानकारी भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित पचौरी ने “धार की भोजशाला” किताब के आधार पर दी है।

भोजशाला को लेकर विवाद होते रहे, व्यवस्था बदलती रही

1995 – एक विवाद के बाद से यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। 12 मई 1997 को कलेक्टर ने भोजशाला में आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया। मंगलवार की पूजा पर रोक लगा दी गई। हिंदुओं को बसंत पंचमी पर और मुसलमानों को शुक्रवार को 1 से 3 बजे तक नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। ये प्रतिबंध 31 जुलाई 1997 को हटा दिया गया।

6 फरवरी 1998 – केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी आदेश तक प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया। 2003 में मंगलवार को फिर से पूजा करने की अनुमति दी गई। बगैर फूल-माला के पूजा करने के लिए कहा गया। पर्यटकों के लिए भी भोजशाला को खोला गया।

18 फरवरी 2003 – भोजशाला परिसर में सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंसा फैली। 2003 से हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा की अनुमति और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति दी गई। बाकी पांच दिनों में भोजशाला पर्यटकों के लिए यह खुली रहती है।

2013 – बसंत पंचमी और शुक्रवार एक दिन आने पर धार में माहौल बिगड़ गया था। हिंदुओं के जगह छोड़ने से इनकार करने पर पुलिस को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा था। इसके बाद माहौल बिगड़ गया। साल 2016 में भी शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ने से यहां तनाव का माहौल बन गया था।

जानकारी “धार की भोजशाला” किताब के आधार पर।

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