अखाड़ा परिषद बोला-शंकराचार्य पद तभी मान्य…जब 13 अखाड़े चादर ओढ़ाएं:माघ मेले में शंकराचार्य समर्थकों- पुलिस टकराव पर जताई चिंता; कहा- इससे सम्मान नहीं बढ़ता
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और पुलिस के बीच हुए टकराव ने संत समाज को भी दो हिस्सों में खड़ा कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर पहली बार उज्जैन से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि महाराज का बयान सामने आया है। उन्होंने न सिर्फ घटना को चिंताजनक बताया, बल्कि शंकराचार्य के पद और अखाड़ों की परंपरा को लेकर भी सीधे सवाल भी खड़े कर दिए।
हरिगिरि महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वे जिस पद पर आसीन हुए हैं, उसमें अभी अखाड़ा परिषद की ओर से उन्हें चादर ओढ़ाना बाकी है। हमारी परंपरा है कि समस्त 13 अखाड़े मिलकर एक साथ चादर ओढ़ाते हैं। जब समाज और अखाड़े आपको चादर ओढ़ाएंगे, तभी आप पूरे समाज के शंकराचार्य होंगे और समाज आपको पूरी तरह स्वीकार करेगा।
टकराव से किसी का सम्मान नहीं बढ़ता… हरिगिरि महाराज ने कहा कि माघ मेले की घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। यह पूरा मामला जांच का विषय है। उन्होंने साफ कहा कि टकराव से किसी का सम्मान नहीं बढ़ता, न साधु-संतों का और न ही प्रशासन का।
बता दें, इस घटनाक्रम के बाद प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में साधु-संत लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे माघ मेले का माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है।
बोले– अफसर धर्म और प्रयागराज की मर्यादा को समझते हैं महामंत्री ने इस मामले में मेला प्रशासन को क्लीन चिट देते हुए कहा कि मेले में तैनात विकास प्राधिकरण अध्यक्ष और अन्य अधिकारी सभी नारायण और त्रिवेणी के उपासक हैं। वे धर्म और प्रयागराज की मर्यादा को समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वीआईपी घाट पर स्नान को लेकर हाईकोर्ट की दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं, ऐसे में विवाद से बचना ही सबसे बेहतर रास्ता था।
हरिगिरि महाराज ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थ की गरिमा को ठेस पहुंची। गलती कहां हुई, यह गंभीरता से देखा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था- शंकराचार्य ही तय करता है अगला शंकराचार्य इससे पहले, सोमवार को प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि शंकराचार्य वो होता है जिसे बाकी 3 पीठ शंकराचार्य कहते हैं। 2 पीठ हमें शंकराचार्य कहते हैं। पिछले माघ मेले में हमको साथ लेकर स्नान कर चुके हैं। अब आपको किस प्रमाण की जरूरत हैं।
क्या ये प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं या नहीं। भारत के राष्ट्रपति को भी अधिकार नहीं है कि वो तय करे कि कौन शंकराचार्य होगा। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करेगा। पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा। वो साइलेंट हैं। हम निर्विवाद रूप से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं।
शंकराचार्य पर विवाद की चार वजह ये भी
- अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिषपीठ शंकराचार्य बताते हैं।
- कुछ संत और मठ उनकी नियुक्ति को मान्यता नहीं देते।
- विवाद उत्तराधिकार और परंपरागत प्रक्रिया को लेकर है।
- इस मुद्दे पर अब तक कोई अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।
