‘ऑपरेशन त्राशी-I’ में शहीद जवान पंचतत्व में विलीन:बागेश्वर में शव देखते ही मां बेहोश, पत्नी-बच्चों की हालत बिगड़ी; ग्रेनेड हमले में हुए थे घायल
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ में शहीद हुए बागेश्वर के हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले हवलदार गजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर हेलिकॉप्टर से बागेश्वर लाया गया।
हेलिकॉप्टर महाविद्यालय कपकोट स्थित हेलीपैड पर लैंड हुआ। पार्थिव शरीर पहुंचते ही पूरा क्षेत्र ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा। हेलीपैड पर शव को लेने शहीद की मां, पत्नी और पिता पहुंचे। तिरंगे में लिपटे बेटे के शव को देखकर मां बेहोश हो गई।
बाजार से निकाली शोक रैली
इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। परिजनों को सांत्वना देने के लिए प्रशासन और स्थानीय लोग आगे आए। इसके बाद शहीद को पूरे सम्मान के साथ ब्लॉक मुख्यालय होते हुए कपकोट बाजार से निकाला गया।
सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों लोगों ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर सपूत को अंतिम सलाम किया। जयकारों के साथ शहीद की अंतिम यात्रा सरयू गंगा तट तक पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
गजेंद्र सिंह गढ़िया ग्राम पंचायत बिथ्थी (पाण्याती) के रहने वाले थे। अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों के छिपे होने की आशंका में चल रहे अभियान के दौरान अचानक हुए ग्रेनेड हमले में वे घायल हो गए थे। छर्रे लगने से उन्हें गंभीर चोटें आईं और 18-19 जनवरी की रात को राज्य के एक सैन्य अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
अंतिम संस्कार की PHOTOS…
व्हाइट नाइट कोर ने दी श्रद्धांजलि, 19 जनवरी को किया ट्वीट
व्हाइट नाइट कोर ने 19 जनवरी को एक्स (ट्विटर) पर ट्वीट कर हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी। ट्वीट में कहा गया कि जनरल ऑफिसर कमांडिंग, व्हाइट नाइट कोर और सभी रैंकों ने स्पेशल फोर्स के हवलदार गजेंद्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है
कोर ने बताया कि हवलदार गजेंद्र सिंह ने 18-19 जनवरी की रात को सिंगपोरा इलाके में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बहादुरी से कार्रवाई करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। पोस्ट में उनके साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए शोकाकुल परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही गई।
ग्रेनेड हमले में घायल हुए थे 8 सैनिक
सुरक्षा बलों के अधिकारियों के मुताबिक चत्रू क्षेत्र के मंद्रल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में रविवार को आतंकियों के खिलाफ अभियान शुरू हुआ था। इसी दौरान आतंकियों की तरफ से अचानक ग्रेनेड हमला किया गया, जिसकी चपेट में सैनिक आ गए।
अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में 8 सैनिक घायल हुए थे। हमला होते ही सैनिकों को छर्रे लग गए और कई जवान घायल हो गए। इसी अभियान के दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सैन्य अस्पताल में ली अंतिम सांस
अधिकारियों के मुताबिक, घायल जवानों में से एक हवलदार गजेंद्र सिंह ने 18 और 19 जनवरी की रात को राज्य के एक सैन्य अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। इसके बाद उनकी शहादत की खबर जैसे ही उत्तराखंड पहुंची, गांव और परिवार में कोहराम मच गया।
अभियान दोबारा शुरू, घने जंगल और खड़ी ढलानों में सर्च ऑपरेशन
अधिकारियों के मुताबिक ग्रेनेड धमाके के बाद अभियान को रविवार देर रात रोक दिया गया था। इसके बाद सोमवार सुबह से घने जंगल और खड़ी ढलान वाले चुनौतीपूर्ण इलाके में इसे फिर से शुरू किया गया है।
बताया गया कि सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें इलाके की तलाशी ले रही हैं। ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इलाके में कड़ी सुरक्षा घेराबंदी की गई है, ताकि आतंकवादी भाग न सकें।
इलाके में 2 से 3 आतंकी फंसे होने की आशंका
अधिकारियों के मुताबिक इलाके में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 2 से 3 आतंकवादियों का एक समूह फंसा हुआ है। इसी को लेकर ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ नाम से संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि यह मुठभेड़ इस साल जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीसरी झड़प है। इससे पहले 7 से 13 जनवरी के बीच कठुआ जिले के बिलवार क्षेत्र के कहोग और नजोते जंगलों में मुठभेड़ हुई थी, हालांकि किसी के मारे जाने की खबर नहीं थी।
गांव में मातम, हर आंख नम
हवलदार गजेंद्र सिंह के शहीद होने की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे। शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाते हुए लोगों ने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन नजर आया और हर आंख नम थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पत्नी-बच्चों की हालत बिगड़ी
हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया के परिवार में उनके पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंदा गढ़िया, पत्नी लीला गढ़िया और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा राहुल गढ़िया है, जबकि छोटा बेटा धीरज गढ़िया कक्षा 4 में पढ़ता है और अपनी मां के साथ देहरादून में रहता है।
जवान की पत्नी लीला गढ़िया दोनों पुत्रों के साथ हेलिकॉप्टर से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचीं। वहां से टैक्सी द्वारा उन्हें कपकोट लाया गया। परिजनों के अनुसार पत्नी बार-बार बेसुध हो रही हैं, जबकि मासूम बच्चे पिता को याद कर उनसे लिपटकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
छोटे भाई शिक्षक बोले- देश सेवा ही था लक्ष्य
शहीद के छोटे भाई किशन सिंह गढ़िया एंजल एकेडमी स्कूल में टीचर हैं। उन्होंने बताया कि गजेंद्र सिंह गढ़िया शुरू से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे और अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते थे। उन्होंने कहा कि देश के लिए सेवा करना ही उनका लक्ष्य था और वे हमेशा अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देते थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी शहीद की वीरता को नमन किया है।
सीएम धामी ने जताया शोक, दी श्रद्धांजलि
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वीर जवान के बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के परिवार के प्रति संवेदना जताई और दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने की बात कही।
अंतिम संस्कार में विधायक सुरेश गढ़िया, नगर पंचायत अध्यक्ष गीता ऐठानी, ब्लॉक प्रमुख भावना साही, शेर सिंह गढ़िया, बलवंत सिंह, हरीश ऐठानी, विक्रम सिंह शाही, गोविंद सिंह, शिव सिंह बिष्ट और ललित फर्स्वाण सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
एसडीएम अनिल चिनियाल सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
