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जम्मू-कश्मीर में LG ने 5 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया:आतंकी संगठनों के लिए काम करने का आरोप; 5 साल में 85 कर्मचारी हटाए गए

जम्मू-कश्मीर में LG ने 5 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया:आतंकी संगठनों के लिए काम करने का आरोप; 5 साल में 85 कर्मचारी हटाए गए

श्रीनगर3 मिनट पहले
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को 5 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया।

जम्मू-कश्मीर के 5 सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संगठनों के लिए काम करने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। LG मनोज सिन्हा ने मंगलवार को ये कार्रवाई की।

अधिकारियों के अनुसार ये सभी लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम कर रहे थे। 2021 से अभी तक सरकार ने 85 कर्मचारियों पर इस तरह की कार्रवाई की है।

निकाले गए कर्मचारियों में एक शिक्षक, एक लैब टेक्नीशियन, एक ड्राइवर, असिस्टेंट लाइनमैन और वन विभाग का एक फील्ड वर्कर शामिल है। पांचों को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत नौकरी से निकाला गया।

इन पर हुई कार्रवाई…

1. मोहम्मद इश्तियाक (शिक्षा विभाग): स्कूल शिक्षा विभाग में रहबर-ए-तालीम के तौर पर लिया गया, 2013 में शिक्षक के रूप में नियमित हुआ। इसपर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए काम करने का आरोप है। LeT कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के संपर्क में था। इसको 2022 में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अप्रैल 2022 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया।

2. तारिक अहमद राह (लैब टेक्नीशियन): अधिकारियों के मुताबिक कम उम्र से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के प्रभाव में था। 2005 में हिजबुल आतंकी अमीन बाबा के पाकिस्तान भागने में मदद की। SIA जांच में इसका आतंकी लिंक सामने आया। अमीन बाबा वर्तमान में पाकिस्तान से भारत विरोधी गतिविधियां संचालित कर रहा है।

3. बशीर अहमद मीर (असिस्टेंट लाइनमैन, PHE विभाग): 1996 में सरकारी सेवा में नियमित किया गया। बांदीपोरा के गुरेज इलाके में LeT का सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) था। आतंकियों को मार्गदर्शन, लॉजिस्टिक सहायता और आश्रय प्रदान करने का आरोप। सुरक्षा बलों की आवाजाही की जानकारी साझा करता था। लंबे समय से गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त था।

4. फारूक अहमद भट (फील्ड वर्कर, वन विभाग): आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहने का आरोप। हिजबुल से जुड़े एक पूर्व विधायक का निजी सहायक भी रहा। संगठन के लिए संपर्क और सहयोग की भूमिका निभाई। सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद आतंकी नेटवर्क से संबंध बनाए रखे।

5. मोहम्मद यूसुफ (ड्राइवर, स्वास्थ्य विभाग): पाकिस्तान में बैठे हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी बशीर अहमद भट के संपर्क में रहने का आरोप। इसे हथियार, गोला-बारूद की खरीद और धन पहुंचाने का काम सौंपा गया था। गांदरबल जिले में आतंकी फंडिंग और सप्लाई में भूमिका रही। 20 जुलाई 2024 को पुलिस ने वाहन रोककर इसे गिरफ्तार किया। इसके पास से पिस्तौल, गोला-बारूद, एक ग्रेनेड और ₹5 लाख नकद बरामद हुए थे।

8 जनवरी: केंद्रीय गृह मंत्री ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 8 जनवरी को जम्मू और कश्मीर पर एक हाई लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी। बैठक में उन्होंने सभी सुरक्षा बलों को मिशन मोड में आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर और आतंकी फंडिंग को निशाना बनाते हुए आतंकवाद विरोधी अभियानों को जारी रखने का निर्देश दिया था।

गृह मंत्री अमित शाह ने 8 जनवरी को उपराज्यपाल और अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी।

20 दिसंबर: जम्मू-कश्मीर के रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट के 29 मजदूरों के टेरर लिंक मिले

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर बन रहे रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम करने वाले 29 मजदूरों के टेरर लिंक मिलने का ममला सामने आया था। ये कर्मचारी देश विरोधी और क्रिमिनल एक्टिविटी में शामिल थे।

पुलिस ने कंपनी से इन कर्मचारियों को काम पर रखने के फैसले पर फिर से विचार करने को कहा था।

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