G20 में 20 ग्लोबल लीडर्स से मिले PM मोदी:कहा- AI के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना जरुरी, अपराध और आतंकवाद में इसका इस्तेमाल खतरनाक
PM मोदी ने जोहान्सबर्ग में हो रहे G20 समिट के दौरान दुनिया के 20 ग्लोबल लीडर्स से मुलाकात की। इनमें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता शामिल रहे।
मोदी ने रविवार को समिट के तीसरे सेशन में दुनिया को AI के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, इसलिए सभी देशों को मिलकर इसके लिए मजबूत नियम-कानून बनाने चाहिए।
मोदी ने कहा कि AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट (यानी अंतरराष्ट्रीय समझौता) होना जरूरी है। इसमें तीन चीजें सबसे जरूरी होंगी। निगरानी (Oversight), सुरक्षा (Safety) और पारदर्शिता (Transparency)।
उन्होंने खास तौर पर चेतावनी दी कि डीपफेक वीडियो-ऑडियो, अपराध और आतंकवाद में AI का इस्तेमाल बहुत खतरनाक है। मोदी ने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो AI का गलत इस्तेमाल समाज के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। इसलिए समय रहते पूरी दुनिया को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
मोदी-रामफोसा की द्विपक्षीय बैठक, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट पर चर्चा
पीएम मोदी ने रविवार को G20 शिखर सम्मेलन से इतर साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
इससे पहले मोदी ने बताया था कि, कल G20 शिखर सम्मेलन की बैठक अच्छी रही। उन्होंने कहा, ‘मैंने दो सत्रों में भाग लिया और प्रमुख मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।’
मोदी ने X पर बताया कि, ‘जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति रामफोसा के साथ शानदार बैठक हुई। हमने भारत-दक्षिण अफ्रीका साझेदारी के सभी पहलुओं की समीक्षा की, विशेष रूप से ट्रेड, कल्चर, इंवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, AI, रेयर अर्थ मेटल में सहयोग में विविधता लाने पर।’ इसके साथ ही मोदी ने G20 की सफल अध्यक्षता के लिए राष्ट्रपति रामफोसा को बधाई दी।
IBSA बैठक में मोदी बोले- वैश्विक संस्थानों में सुधार अब जरूरत बन गई है
मोदी G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) नेताओं की बैठक में शामिल हुए। इसमें विदेश मंत्री एस.जयशंकर भी शामिल हुए। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी बैठक में मौजूद रहे।
इस दौरान मोदी ने 4 मुद्दों पर बात रखी-
- वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी: IBSA को दुनिया को एक संदेश देना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि जरूरी हो गया है। ये संस्थाएं 21वीं सदी की वास्तविकता से बहुत दूर हो चुकी हैं। अब बदलाव का समय आ गया है।
- आतंकवाद के खिलाफ एकजुट लड़ाई: आतंकवाद के मुद्दे पर कोई दोहरा मापदंड नहीं चल सकता। तीनों देशों को इस लड़ाई में पूरा समन्वय रखना होगा।
- आईबीएसए डिजिटल इनोवेशन एलायंस की शुरुआत: तकनीक का इस्तेमाल इंसानों के विकास के लिए किया जाए। इसके लिए एक नया ‘आईबीएसए डिजिटल इनोवेशन अलायंस’ बनाया जाना चाहिए।
- IBSA फंड फॉर क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर: खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के लिए ‘IBSA फंड फॉर क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर’ शुरू किया जाए। यह कोष जलवायु परिवर्तन से प्रभावित कृषि को मजबूत बनाने में मदद करेगा।
IBSA (India-Brazil-South Africa) एक त्रिपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंच है जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
6 जून 2003 को ब्राजील में तीनों देशों के तत्कालीन विदेश मंत्रियों ने ब्रासीलिया घोषणापत्र (Brasília Declaration) पर हस्ताक्षर करके IBSA की औपचारिक शुरुआत की।
साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को मंजूरी मिली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बॉयकॉट के बावजूद 20वीं G20 समिट के पहले दिन शनिवार को सदस्य देशों ने साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने बताया कि सभी देशों का अंतिम बयान पर सहमत होना बेहद जरूरी था, भले ही अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। वहीं, ट्रम्प ने आखिरी सेशन में 2026 की मेजबानी लेने के लिए एक अमेरिकी अधिकारी को भेजने की बात कही थी।
रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने अमेरिकी अधिकारी को मेजबानी सौंपने के प्रस्ताव को नकार दिया। अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा आज G20 की अगली अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने परंपरा तोड़ी
इस बार के G20 समिट में दो बड़ी परंपराएं टूट गईं और यही वजह है कि यह बैठक ऐतिहासिक रूप से अलग मानी जा रही है।
पहली परंपरा मेजबानी सौंपने की है। हर G20 समिट में पिछले साल की मेजबानी करने वाला देश, इस साल के मेजबानी देश को औपचारिक रूप से ‘गवेल’ (अध्यक्षता का प्रतीक) सौंपता है।
यह एक लाइव सेरेमनी होती है, जिसमें दोनों देशों के नेता आमने-सामने मौजूद रहते हैं। इस बार अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति ट्रम्प शामिल नहीं हुए।
2024 में G20 की मेजबानी अमेरिका (सैन फ्रांसिस्को) ने की थी, इसलिए गवेल ट्रम्प को ही सौंपना था। लेकिन उनकी गैरहाजिरी की वजह से साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने खाली कुर्सी को मेजबानी सौंपने का ऐलान किया है।
पहले दिन ही पास हुआ G20 समिट का घोषणापत्र
दूसरी बड़ी परंपरा घोषणापत्र से जुड़ी है। G20 समिट के अंत में सभी देश मिलकर एकमत से संयुक्त घोषणापत्र जारी करते हैं।
यानी दो दिन की बैठकें, चर्चाएं, ड्राफ्टिंग सब पूरा होने के बाद अंतिम सत्र में घोषणापत्र जारी किया जाता है। लेकिन इस बार घोषणापत्र पहले ही दिन सर्वसम्मति से पास हो गया।
जानिए पीएम मोदी ने पहले और दूसरे समिट में क्या कहा…
मोदी बोले- पुराने डेवलपमेंट मॉडल को बदलना जरूरी
पीएम मोदी ने G20 समिट के पहले दो सत्रों को संबोधित किया। पहले सेशन में उन्होंने वैश्विक चुनौतियों पर भारत का नजरिया दुनिया के सामने रखा।
मोदी ने पुराने डेवलपमेंट मॉडल के मानकों पर दोबारा सोचने की अपील की। उन्होंने कहा- पुराने डेवलपमेंट मॉडल ने रिसोर्स छीने, इसे बदलना जरूरी है।
वहीं समिट के दूसरे सत्र में पीएम ने भारत के श्री अन्न (मोटा अनाज), जलवायु परिवर्तन, G20 सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप और डिजास्टर रिस्क रिडक्शन पर बात की।
पीएम मोदी ने कहा-
G20 ने भले ही दुनिया की अर्थव्यवस्था को दिशा दी हो, लेकिन आज की ग्लोबल विकास मॉडल के पैरामीटर्स ने बड़ी आबादी को रिसोर्स से वंचित किया है और प्रकृति के दोहन को बढ़ावा दिया है। अफ्रीकी देशों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखता है।

मोदी ने G20 समिट में तीन पहल पेश कीं
1.वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार : इसका मकसद दुनिया के लोक ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा और सामुदायिक प्रथाओं को एक साथ लाना है।
2. अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव: अफ्रीकी युवाओं के लिए कौशल विकास, ट्रेनिंग और रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की योजना।
3. ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ इनिशिएटिव: प्रधानमंत्री ने इसे अहम बताते हुए कहा कि ड्रग तस्करी, अवैध पैसों का नेटवर्क और आतंकवाद की फंडिंग आपस में जुड़े हैं।
यह पहल इन्हें रोकने के लिए सदस्य देशों के वित्तीय, सुरक्षा और शासन तंत्र को एकजुट करेगी।मोदी के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क से ड्रग नेटवर्क पर सख्त चोट की जा सकेगी और आतंकवाद की फंडिंग भी कमजोर होगी।
दिल्ली घोषणा-पत्र की सराहना की गई
इस G-20 समिट के दौरान दिल्ली में 2023 के 18वें जी-20 घोषणा-पत्र की सभी सदस्य देशों ने सराहना की। इसके तहत महिला सशक्तिकरण, जलवायु परिवर्तन फंड और डिजिटल लिटरेसी को बढ़ावा देने के बिंदुओं की समीक्षा कर नए फैसले किए गए।
UN सुरक्षा परिषद (UNSC) का विस्तार कर भारत को भी जगह दिए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ।
साउथ अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार राष्ट्रीय आपदा घोषित
दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ शुक्रवार को देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में महिलाएं इकट्ठा हुईं। ये प्रदर्शन G20 सम्मेलन से ठीक पहले हुए। लगातार दबाव और विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने महिलाओं पर अत्याचार को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया।
जोहान्सबर्ग, प्रिटोरिया, केप टाउन और डरबन समेत 15 जगहों पर महिलाएं काले कपड़े पहनकर सड़क पर उतरीं। काले पहनने का मतलब था कि वे महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए शोक भी मना रही हैं और इसके खिलाफ विरोध भी कर रही हैं।
इन महिलाओं ने 15 मिनट तक चुपचाप जमीन पर लेटकर विरोध जताया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में हर दिन करीब 15 महिलाओं की हत्या हो जाती है।
यह पूरा आंदोलन G20 वीमेन शटडाउन नाम से चलाया गया था, जिसे वूमेन फॉर चेंज नाम की संस्था ने आयोजित किया। उन्होंने महिलाओं और LGBTQ+ समुदाय से कहा कि वे एक दिन न कोई काम करें और न ही कहीं पैसा खर्च करें, ताकि समाज और अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका का महत्व दिख सके।
साउथ अफ्रीका में और भी विरोध प्रदर्शन
महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के अलावा, जलवायु और अमीरी-गरीबी की असमानता पर काम करने वाले एक्टिविस्ट्स ने G20 के खिलाफ एक अलग समिट शुरू की है।
व्हाइट अल्पसंख्यक कम्युनिटी की यूनियन और एंटी-इमिग्रेशन ग्रुप भी बेरोजगारी और भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
G7 देशों ने ही G20 बनाया
G20 को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के ग्रुप G7 के विस्तार के रूप में देखा जाता है। G7 में फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा हैं।
1997-98 में एशिया के कई देश (थाईलैंड, इंडोनेशिया, कोरिया आदि) आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। उस समय सिर्फ G7 (7 अमीर देश) फैसले लेते थे, लेकिन संकट एशिया में था।
G7 ने महसूस किया कि अब सिर्फ 7 देश मिलकर दुनिया नहीं चला सकते, बल्कि भारत, चीन, ब्राजील जैसे विकासशील देशों को भी शामिल करना पड़ेगा। इन देशों ने 1999 में G20 बनाया।
शुरू में यह सिर्फ वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों का फोरम था। फिर 2008 में फैसला लिया गया कि सिर्फ वित्त मंत्री नहीं, देशों के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री भी इसमें शामिल होंगे।
नवंबर 2008 में वॉशिंगटन में पहली लीडर्स समिट हुई। इसके बाद हर साल यह समिट की जाती है।
