जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गुरुवार को विपक्षी भाजपा विधायक, NC विधायकों से भिड़ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा नेता खड़े हो गए और प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि सदन में जम्मू के बाढ़ प्रभावित इलाकों पर आधे घंटे की चर्चा की जाए। लेकिन अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने BJP विधायकों से प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध किया।
भाजपा सदस्य नहीं माने और अपनी मांग पर अड़े रहे। हंगामा बढ़ने पर किश्तवाड़ से भाजपा विधायक शगुन परिहार सदन के वेल में जाने लगीं, लेकिन महिला वॉच एंड वार्ड स्टाफ ने उन्हें रोक दिया।
इसके बाद वेल में कूदने दो भाजपा विधायकों आरएस पठानिया और सुरिंदर कुमार को मार्शलों ने बाहर निकाल दिया। BJP विधायक पूरे प्रश्नकाल तक सदन में खड़े रहे, बाद में उन्होंने बायकॉट कर दिया।
बुधवार को भी हुआ था हंगामा
उमर सरकार टेनेंसी रिफॉर्म, पंचायती राज, लेबर वेलफेयर और कोऑपरेटिव से जुड़े चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है। बुधवार को भी सदन में हंगामा हुआ, जब राज्य निर्वाचन आयुक्त की एज लिमिट 65 से 70 साल करने वाला विधेयक पेश किया गया था।
4 बिल जिन्हें सदन में पेश किया जाना है
- जम्मू और कश्मीर टेनेंसी बिल 2025- इस विधेयक का मकसद एक रेंट अथॉरिटी का गठन करना है, जो किराए पर स्थानों को विनियमित करेगा और मकान मालिकों तथा किराएदारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक इंस्टेंट ज्यूडीशियल सिस्टम देगा। यह विधेयक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में किराएदारी संबंधों में ट्रांसपैरेंसी और न्यायसंगत बना सकता है।
- जम्मू और कश्मीर पंचायती राज (अमेंडमेंट) बिल 2025- यह विधेयक 1989 के अधिनियम के तहत स्थापित पंचायती राज ढांचे को मजबूत करने के लिए बदलावों का प्रस्ताव करता है, जिससे स्थानीय स्वशासन को और अधिक अधिकार और संसाधन मिल सकें।
- जम्मू और कश्मीर शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट्स (लाइसेंसिंग, एम्प्लॉयमेंट का रेगुलेशन और सर्विस की शर्तें) बिल 2025- इस बिल का मकसद वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में श्रम कानूनों और काम करने की स्थितियों को सरल बनाना है। यह बिल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए व्यवसायों के लिए अनुपालन को आसान बनाने की कोशिश करेगा।
- जम्मू और कश्मीर कोऑपरेटिव सोसाइटीज (अमेंडमेंट) बिल 2025- यह विधेयक पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सहकारी समितियों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए संशोधन चाहता है। इसका लक्ष्य सहकारी आंदोलन को पुनर्जीवित करना, उनकी स्वायत्तता बढ़ाना और उन्हें आर्थिक विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम बनाना है।
