पूजा खेडकर बोलीं- पुणे कलेक्टर ने मुझे अपमानित किया:ACS को पत्र में लिखा- मीडिया ट्रायल के कारण मेरी छवि घमंडी अधिकारी की बनी
पूर्व ट्रेनी IAS ऑफिसर पूजा खेडकर का एक पत्र रविवार (11 अगस्त) को सामने आया है, जो उन्होंने महाराष्ट्र के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) नितिन गद्रे को 11 जुलाई को लिखा था। उन्होंने लिखा- पुणे कलेक्टर सुहास दिवासे ने मुझे IAS ट्रेनिंग के पहले दिन ही अपमानित किया था।
पूजा ने पत्र में लिखा- मीडिया कवरेज से मेरी छवि घमंडी अधिकारी की बन गई। इससे मुझे मानसिक आघात पहुंचा और मैं बेहद परेशान हूं। पुणे में ट्रेनिंग के दौरान सीनियर ऑफिसर के चेंबर पर कब्जा करने के आरोपों को लेकर पूजा ने लिखा- एडिशनल कलेक्टर अजय मोरे ने मुझे अपना चेंबर दिया था।
अजय मोरे ने अपने कर्मचारियों को चेंबर व्यवस्थित करने के लिए भी कहा था। कर्मचारियों ने मेरी जरूरतों के बारे में पूछा और स्टेशनरी आदि का इंतजाम किया। अगले दिन बाद जब कलेक्टर सुहास दिवासे ऑफिस आए तो उन्हें किसी ने एडिशनल कलेक्टर के चेंबर में मेरे बैठने की व्यवस्था के बारे में बताया, जिससे वे नाराज हो गए।
सुहास दिवासे ने तहसीलदार को बुलाकर चेंबर से मेरा सामान हटाने को कहा। जब मैंने उनसे बात की तो उन्होंने आरोप लगाया कि मैंने चेंबर पर कब्जा किया है। उन्होंने मेरी कोई बात नहीं सुनी। हालांकि, कलेक्टर दिवासे ने खेडकर के आरोपों को नकारते हुए पूरी तरह से निरर्थक करार दिया।
पूजा ने कहा- मैंने कलेक्टर से माफी मांगी
पूजा ने पत्र में लिखा- चेंबर वाली बात को लेकर दिवासे ने आपको ( एडिशनल चीफ सेक्रेटरी नितिन गद्रे को) पत्र लिखा और मेरी शिकायत की। अगले दिन मैंने दिवासे से मिलने की कोशिश की, लेकिन वे व्यस्त थे। मैंने उन्हें मैसेज कर माफी मांगी और कहा कि वे मेरे बैठने की व्यवस्था के बारे में जो भी फैसला लेंगे, मुझे स्वीकार होगा। मुझे लगा कि मामला खत्म हो गया है।
वाशिम ट्रांसफर होने के 3 दिन बाद पूजा ने यह पत्र लिखा था
पूजा को सबसे पहले IAS ट्रेनिंग के लिए पुणे डिस्ट्रिक्ट मिला था। यहां पूजा पर अधिकारियों से गलत व्यवहार करने और पर्सनल ऑडी कार पर लाल-नीली बत्ती लगाने के आरोप लगे। मामला बढ़ने पर 24 जून को कलेक्टर सुहास दिवासे ने महाराष्ट्र के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखा था।
इसके बाद 8 जुलाई को पूजा का ट्रांसफर वाशिम कर दिया गया। इसके 3 दिन बाद यानी 11 जुलाई को पूजा ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को यह पत्र लिखा था। हालांकि, इसकी जानकारी आज 11 अगस्त को सामने आई है।
पूजा का UPSC ने सिलेक्शन रद्द कर दिया था
UPSC ने 31 जुलाई को उनका सिलेक्शन रद्द कर दिया और कहा कि वह भविष्य में UPSC का कोई एग्जाम नहीं दे पाएंगी। पूजा पर उम्र, माता-पिता की गलत जानकारी, पहचान बदलकर तय सीमा से ज्यादा बार सिविल सर्विसेस का एग्जाम देने का आरोप था।
UPSC ने दस्तावेजों की जांच के बाद पूजा को सीएसई-2022 नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया। पूजा को एग्जाम में 2022 में 841वीं रैंक मिली थी। वे 2023 बैच की ट्रेनी IAS हैं। जून 2024 से ट्रेनिंग कर रही थीं, जो बाद में रोक दी गई।
आयोग पूजा की धोखाधड़ी पहचानने में कहां चूका
खेडकर के केस के चलते UPSC ने 2009 से 2023 तक 15,000 से ज्यादा रिकमंड किए गए उम्मीदवारों के डेटा की जांच की। इसमें पाया गया कि उनके अलावा किसी अन्य उम्मीदवार ने CSE नियमों के तहत तय अटेम्प्ट से ज्यादा अटेम्प्ट नहीं दिए थे। पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर का मामला इकलौता था।
उन्होंने कई बार न केवल अपना नाम, बल्कि अपने माता-पिता का नाम बदलकर परीक्षा दी थी, इसलिए UPSC के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) उनके अटेम्प्ट्स की संख्या का पता नहीं लगा सका। UPSC अपनी SOP को और मजबूत करने की प्रक्रिया में है, ताकि भविष्य में ऐसे मामले दोबारा न हों।
पूजा पर OBC नॉन-क्रीमीलेयर कोटे का फायदा उठाने का भी आरोप
पूजा पर माता-पिता के मैरिटल स्टेटस की जानकारी छिपाकर OBC नॉन-क्रीमीलेयर कोटे का फायदा उठाने का भी आरोप लगा है। पूजा के पिता दिलीप खेडकर रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। उन्होंने चुनाव भी लड़ा था। एफिडेविट में उन्होंने अपनी संपत्ति 40 करोड़ रुपए बताई थी। पूजा ने परिवार की संपत्ति 8 लाख से कम बताई थी।
पूजा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने माता-पिता के तलाक का दावा किया है। उनके पिता अब उनके साथ नहीं रहते, इसलिए वे अब OBC नॉन-क्रीमी लेयर के दायरे में आती हैं। पुणे पुलिस के मुताबिक, UPSC ने पूजा के माता-पिता की मैरिटल स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
विकलांगता सर्टिफिकेट से जुड़े विवाद
- विकलांगता सर्टिफिकेट में पूजा खेडकर का एड्रेस ‘प्लॉट नंबर 53, देहू अलंदी रोड, तलावडे, पिंपरी चिंचवाड़, पुणे’ लिखा गया था। जबकि इस एड्रेस पर कोई घर नहीं, बल्कि थर्मोवर्टा इंजीनियरिंग कंपनी नाम की एक फैक्ट्री है। पूजा की जिस ऑडी को जब्त किया गया था, वह इसी कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
- सरकारी नियमों के तहत विकलांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है, लेकिन पूजा के सर्टिफिकेट में राशन कार्ड लगाया गया था।
- विकलांग कोटे से UPSC में सिलेक्शन होने के बाद से पूजा के कई विकलांगता सर्टिफिकेट सामने आ चुके हैं। पूजा खेडकर ने 2018 और 2021 में अहमदनगर डिस्ट्रिक्ट सिविल हॉस्पिटल की ओर से जारी 2 विकलांग सर्टिफिकेट UPSC को सौंपे थे।
- पूजा ने अपनी विकलांगता सर्टिफिकेट की पुष्टि के लिए दिल्ली में मेडिकल जांच के लिए कई बार अपॉइंटमेंट लिया था, लेकिन बाद में उन्होंने एक प्राइवेट हॉस्पिटल में बनी रिपोर्ट को UPSC में जमा कर दिया।
- यशवंत राव चह्वाण मेमोरियल (YCM) अस्पताल ने साफ कर दिया है कि पूजा खेडकर का लोकोमीटर सर्टिफिकेट बनाने में कोई गलती नहीं हुई। सर्टिफिकेट में पूजा को 7% लोकोमीटर डिसेबिलिटी बताई गई थी। अस्पताल को पिंपरी चिंचवाड नगर निगम संचालित करता है।
- पूजा ने UPSC को दिए एक हलफनामे में दावा किया था कि वह मानसिक रूप से अक्षम हैं और उन्हें देखने में भी दिक्कत होती है। पूजा ने मेडिकल टेस्ट देने से 6 बार मना किया था, जबकि मेडिकल टेस्ट देना जरूरी होता है।
- कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूजा का पहला मेडिकल टेस्ट दिल्ली AIIMS में अप्रैल 2022 में शेड्यूल हुआ था। उन्होंने कोविड पॉजिटिव होने का हवाला देकर इसमें शामिल होने से मना कर दिया था।
