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कर्नाटक में कैदी के पेट से निकला की-पेड मोबाइल:बोला- पकड़े जाने के डर से निगला; दर्द होने पर 20 दिन बाद अस्पताल लाया गया

कर्नाटक के शिवमोगा की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी परशुराम (28) को पेट दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उसकी जांच की और कई सारे टेस्ट किए। उसका इलाज किया, लेकिन उसकी हालात में सुधार ना होता देख उसे बेंगलुरु के विक्टोरिया हॉस्पिटल रेफर किया दिया गया था।

यहां अल्ट्रासाउंड में सामने आया कि परशुराम के पेट में कोई बाहरी ऑब्जेक्ट है। इसके बाद 25 अप्रैल को उसकी सर्जरी की गई। पेट से डॉक्टरों को चाइनीज फोन और सिम कार्ड मिला।

पकड़े जाने के डर से निगला था फोन, 20 दिन से परेशान था
डॉक्टरों को परशुराम ने बताया कि पुलिस चेकिंग में पकड़े जाने के डर से उसने फोन और सिम कार्ड निगल लिया था। 20 दिन से मोबाइल पेट में था, जब दर्द ज्यादा बढ़ गया तो अस्पताल में भर्ती हुआ था।

डॉक्टरों ने बताया कि फोन इतना छोटा था कि परशुराम ने उसे आसानी से निगल लिया, फोन आहार नली में भी नहीं फंसा, लेकिन छोटी आंत में जाकर फंस गया। परशुराम ने सोचा था कि शौच के दौरान फोन उसके पेट से बाहर निकल जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। धीरे-धीरे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

वापस जेल भेज गया परशुराम
सर्जरी के बाद परशुराम को वापस शिवमोगा जेल भेज दिया। उसके खिलाफ जेल में मोबाइल तस्करी के मामले में कर्नाटक प्रिजन्स (अमेडमेंट) एक्ट 2022 के तहत केस दर्ज किया गया है।

जेल प्रशासन का कहना है कि जेल में मोबाइल, ड्रग और अन्य चीजों की जांच के लिए लगातार सर्च किया जाता है। कई बार कैदी टॉयलेट या उन जगहों पर चीजें छुपाते हैं, जहां कोई चेक नहीं करता, लेकिन परशुराम ने उसे निगल लिया था।

‘गो हैंग योरसेल्फ’ कहना खुदकुशी के लिए उकसाना नहीं ​​​​:पादरी की मौत के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि ‘गो हैंग योरसेल्फ’ कहने को खुदकुशी के लिए उकसाने वाला बयान नहीं कहा जा सकता। जस्टिस एम नाग प्रसन्ना ने उडुपी के एक पादरी की खुदकुशी के मामले में सुनवाई करते हुए ये बात कही। मामले में याचिकाकर्ता पर पादरी को ‘गो हैंग योरसेल्फ’ कहकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। पूरी खबर पढे़ं…

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