ऑपरेशन सिंदूर का असर, सेना को 1 लाख करोड़ ज्यादा:10 साल में सबसे बड़ा इजाफा; लड़ाकू विमान और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़
बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है।
आइए जानते हैं रक्षा बजट का पूरा गणित…
सेना को मिलने वाले बजट में मुख्य रूप से 4 पार्ट होते हैं :
1. कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी हथियार खरीद के बजट में 22% की बढ़त
इस बार तीनों सेनाओं के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 2.19 लाख करोड़ रुपए मिले हैं, जो पिछले साल से 21.84% ज्यादा है। पिछले साल यह 1.80 लाख करोड़ रुपए था। इस बजट के ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल हथियार खरीद और मॉडर्नाइजेशन पर खर्च होता है।
2. रेवेन्यू खर्च यानी सैलरी 17% बढ़ाया
रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के लिए इस साल 3.65 लाख करोड़ रुपए दिए गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 17.24% ज्यादा है। इस बजट का ज्यादातर हिस्सा सैनिकों को सैलरी बांटने में खर्च होता है।
3.रिटायर्ड सैनिकों के लिए पेंशन बजट 6.5% बढ़ा
डिफेंस पेंशन के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपए दिए गए हैं, जो पिछले साल से 6.53% ज्यादा है। ये रिटायर्ड सैनिकों और उनके परिवारों को पेंशन या आर्थिक मदद देने में खर्च किए जाएंगे।
4. सिविल डिफेंस बजट में मामूली कटौती
सिविल डिफेंस बजट में इस बार हल्की कटौती हुई है। पिछले साल यह 28,555 करोड़ रुपए था, जो इस साल घटकर 28,426 करोड़ रुपए रह गया है। यानी करीब 0.45% की कमी। इस बजट का इस्तेमाल इंडियन कोस्ट गार्ड, डिफेंस एकाउंट्स और प्रशासनिक खर्चों के लिए किया जाता है।
डिफेंस बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का असर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बजट देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे सेना की तैयारियां और ज्यादा मजबूत होंगी।’
- 114 राफेल की डील, नए एयरक्राफ्ट और इंजन पर खर्च
रक्षा बजट में सबसे ज्यादा ध्यान लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर दिया गया है। इसके लिए 63,733 करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं, नेवी बेड़े के लिए 25,024 करोड़ रुपए दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल जेट की डील होने वाली है। जल्द ही फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन 18 राफेल जेट भारत को देगी। वहीं, इस पूरे प्रोजेक्ट में कम से कम 60% काम भारत में ही होगा। यानी ज्यादातर पुर्जे और पार्ट्स बनाने का काम भारत में किया जाएगा।
- रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 17 हजार करोड़ रुपए
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया गया है। इसके लिए 17,250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस रकम से नई तकनीक, स्वदेशी हथियार और आधुनिक सिस्टम विकसित किए जाएंगे। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदे नहीं, बल्कि बनाए भी।
- कस्टम ड्यूटी हटाने से डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा
वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा। उत्पादन सस्ता होगा और निजी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा।
डिफेंस बजट में भारत, चीन से पीछे लेकिन पाकिस्तान से आगे
पिछले साल चीन का रक्षा बजट करीब 247 बिलियन डॉलर यानी 22.6 लाख करोड़ रुपए रहा। अनुमान है कि इस साल 2026 में ये 300 बिलियन डॉलर यानी 27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है।
वहीं पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है। पिछले साल उसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद 81 हजार करोड़ का डिफेंस बजट पेश किया, जो 2024 से 20% ज्यादा था।
हालांकि, 2025 में रक्षा बजट में बढ़ोतरी के लिए पाकिस्तान को अपने कुल बजट में 7% की कटौती करनी पड़ी थी। वहीं, भारत ने कुल बजट को भी पिछले साल से लगभग 8% बढ़ाते हुए रक्षा बजट को 15% बढ़ाया है।
