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तिरुपति मंदिर बोर्ड बोला-लड्डू मामले में क्लीन चिट नहीं दी:SIT चार्जशीट में घी में मिलावट के सबूत; CBI रिपोर्ट में चर्बी की पुष्टि नहीं

तिरुपति मंदिर बोर्ड बोला-लड्डू मामले में क्लीन चिट नहीं दी:SIT चार्जशीट में घी में मिलावट के सबूत; CBI रिपोर्ट में चर्बी की पुष्टि नहीं

तिरुपति15 घंटे पहले

तिरुपति मंदिर के लड्डू में मिलावट के मामले में मंदिर के बोर्ड तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम(TTD) ने कहा का उसने किसी को भी क्लीनचिट नहीं दी है।

बोर्ड के चेयरमैन बीआर नायडू ने शुक्रवार को तिरुपति में पद्मावती रेस्ट हाउस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि SIT की चार्जशीट में श्रीवारी लड्डू बनाने में मिलावटी घी की मौजूदगी साफ तौर पर साबित हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ समूह झूठा दावा करके भक्तों को गुमराह कर रहे हैं कि इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई है।

दरअसल, सीबीआई ने फाइनल चार्जशीट में कहा है कि लड्‌डुओं में पशु चर्बी नहीं, मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ था। नेल्लोर कोर्ट में पेश चार्जशीट में कहा गया कि प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में वनस्पति तेल, बीटा केरोटिन व एस्टर केमिकल की मिलावट पाई गई। उत्तराखंड के भगवानपुर की भोले बाबा डेयरी ने मिलावटी घी की सप्लाई की थी।

YSRCP के वरिष्ठ नेता और पूर्व TTD चेयरमैन भूमना करुणाकर रेड्डी ने कहा कि CBI रिपोर्ट में तिरुपति लड्डू में कोई पशु चर्बी नहीं पाई गई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट ने गठबंधन नेताओं के झूठे प्रचार और राजनीतिक नाटक का पर्दाफाश किया।

नायडू बोले- कंपनी के पास क्षमता नहीं थी फिर भी टेंडर दिया

बीआर नायडू ने कहा कि घी के टेंडर उन कंपनियों को दिए गए जिनके पास जरूरी क्षमता नहीं थी। लगभग 60 लाख किलोग्राम मिलावटी घी खरीदा गया, जिसकी कीमत लगभग ₹250 करोड़ थी।

उन्होंने कहा कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) द्वारा किए गए टेस्ट में घी में जानवरों की चर्बी की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

चेयरमैन बीआर नायडू ने कहा कि कुछ संस्थाओं ने एक भी गाय न होने या कोई वास्तविक उत्पादन क्षमता न होने के बावजूद घी बनाने का दावा किया।

उन्होंने कहा कि इस कथित मिलावटी घी का इस्तेमाल करके लगभग 200 मिलियन लड्डू बनाए गए, जिससे तिरुमाला मंदिर की पवित्रता को गंभीर नुकसान पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ डेयरियों को सिर्फ कमीशन के लिए चुना गया और कुछ व्यक्तियों पर जानबूझकर हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

पहले पूरे मामले को समझिए

2022 में लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट की कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद SIT ने जांच की थी। इसके बाद TTD ने उत्तराखंड की भोलेबाबा डेयरी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

इसके बावजूद डेयरी मालिकों ने दूसरी डेयरी फर्मों के नाम पर टेंडर हासिल किए और घी की सप्लाई जारी रखी। इनमें वैष्णवी डेयरी (तिरुपति), माल गंगा डेयरी (उत्तर प्रदेश) और AR डेयरी फूड्स (तमिलनाडु) शामिल हैं। ये सब सुब्बा रेड्डी के चेयरमैन रहते हुए हुआ।

बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ने हवन किया

इस बीच, मंगलवार को YSRCP के वरिष्ठ नेता और पूर्व TTD चेयरमैन भूमना करुणाकर रेड्डी ने तिरुपति में श्रीनिवास प्रसादा निंदा परिहार होमम (श्रीनिवास प्रसाद निंदा निवारण अनुष्ठान) किया।

रेड्डी ने यह हवन प्रायश्चित के रूप में किया। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण की टिप्पणयों को पवित्र भगवान वेंकटेश्वर स्वामी लड्डू प्रसादम के खिलाफ बताया।

YSRCP ने TDP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि तिरुपति लड्डू मुद्दे पर CBI रिपोर्ट में तथ्यों को स्पष्ट रूप से स्थापित करने के बावजूद सरकार ने आधारहीन टिप्पणियां कीं।

रेड्डी ने कहा कि लड्डू में मिलावट पर CBI रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कुछ अधिकारियों और घी सप्लायरों के बीच सांठगांठ थी, और इस मामले में किसी भी YSRCP नेता का कोई उल्लेख नहीं था।

इसके बावजूद, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू कैबिनेट बैठकों में आरोप लगाते रहे, झूठा दावा करते हुए कि टेंडर नियमों में ढील के कारण मिलावट हुई।

भूमना ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण दोनों ने सार्वजनिक रूप से मिलावट के बारे में चिंता जताई थी, लेकिन CBI रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि तिरुपति लड्डू में कोई पशु वसा नहीं पाया गया।

उन्होंने कहा कि CBI रिपोर्ट उनके गुमराह करने वाले अभियान का सीधा जवाब थी।

TDP ने YSRCP पर आरोप लगाया था

आंध्र के CM चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP ने 18 सितंबर 2025 को आरोप लगाया था कि राज्य में YSR कांग्रेस सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू (प्रसादम्) में जानवरों की चर्बी वाला घी और फिश ऑयल मिलाया गया था। इसके अगले दिन TDP ने एक लैब रिपोर्ट दिखाकर अपने आरोपों की पुष्टि का दावा किया।

जानिए क्या है तिरुपति लड्डू का इतिहास

तिरुमाला मंदिर में रोजाना 3.5 लाख से ज्यादा भक्तों को लड्डू प्रसाद दिया जाता है। यह परंपरा 1715 से, यानी 300 से अधिक सालों से चली आ रही है।

प्रसाद मंदिर की रसोई पोट्टु में तैयार होता है, जहां पारंपरिक समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से इसे बनाने की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। लड्डू को भक्तों को देने से पहले सबसे पहले भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किया जाता है।

लड्डू बनाने के प्रोसेस को दित्तम कहते हैं

लड्डू बनाने की प्रोसेस को दित्तम कहा जाता है। इसमें कौन सी चीज कितनी मात्रा में डालनी है इसका बहुत सख्ती से पालन किया जाता है।

इतने लंबे समय में लड्डू की रेसिपी में सिर्फ छह बार ही बदलाव किए गए हैं। पहले लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनते थे, ताकि वे ज्यादा समय तक ठीक रहें। बाद में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें बादाम, काजू और किशमिश भी मिलाना शुरू किया गया।

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