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सिंघवी बोले-कुत्तों से जुड़े नियम मौजूद, कोर्ट दखल न दे:सलाह एक्सपर्ट से ही लें; अफसरों की राय के कारण अरावली पर फैसला पलटना पड़ा

सिंघवी बोले-कुत्तों से जुड़े नियम मौजूद, कोर्ट दखल न दे:सलाह एक्सपर्ट से ही लें; अफसरों की राय के कारण अरावली पर फैसला पलटना पड़ा

नई दिल्ली3 घंटे पहले

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से इस मामले में दखल न देने की अपील की।

ACGS (All Creatures Great and Small) नाम की संस्था की तरफ से दलील दे रहे सिंघवी ने कहा कि इस विषय पर कानून और नियम पहले से मौजूद हैं। ऐसे में अदालत का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। जब संसद जानबूझकर दखल नहीं दे रही है तो वहां अदालत को भी नहीं जाना चाहिए।

सिंघवी ने आगे कहा कि एमीकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) अच्छे तो होते हैं लेकिन वे कानून के सलाहकार होते हैं। किसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट नहीं। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स (जैसे पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य विशेषज्ञ) को भी शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने अरावली केस का उदाहरण दिया, जहां पहले बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे एक्सपर्ट नहीं। इसी वजह से उस फैसले पर दोबारा विचार करना पड़ा।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों को लेकर फैसला सुनाया था। उसके अनुसार 100 मीटर से ऊपर की ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही ‘अरावली हिल्स’ माना जाना था। 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले एक्सपर्ट राय जरूरी है।

सुनवाई की 3 बड़ी बातें…

  • सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी (एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट) ने कहा- लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के लिए अपमानजनक बातें करते हैं। कह रहे हैं कि महिलाएं संतुष्टि के लिए कुत्तों के साथ सोती हैं।
  • एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कुत्तों के माइक्रो-चिप लगवाने की सलाह भी ठीक है। इसकी कीमत 100-200 रुपये है। एक बार जब यह लग जाएगी तो अगर कोई आक्रामक कुत्ता लोगों के पीछे भागता है। तो उसे ट्रैक कर ऑरेंज कैटेगरी में डाला जा सकता है। अगर काटने की घटना होती है तो रेड फ्लैग लगाया जा सकता है। दूसरे देशों में यह कारगर है। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा- उन देशों की आबादी कितनी है? जरा प्रैक्टिकल बातें करें।
  • एक वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। AIIMS में गोल्डी नाम की एक फीमेल डॉग कई सालों से हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े होते हैं। अगर ऐसे कुत्ते अस्पताल में होंगे तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। अस्पतालों में कुत्तों को अच्छा दिखाने या ‘महान’ साबित करने की कोशिश न करें।

अपडेट्स

01:32 PM9 जनवरी 2026

आवारा कुत्तों पर अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी

आवारा कुत्तों पर शुक्रवार को करीब 1.50 घंटे सुनवाई चली। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी रखी।

11:51 AM9 जनवरी 2026

माइक्रो-चिप पर जस्टिस मेहता बोले- यह प्रैक्टिकली कितना संभव

सीनियर वकील: कुत्तों के माइक्रो-चिप लगवाने की सलाह भी ठीक है। इसकी कीमत 100-200 रुपये है। एक बार जब यह लग जाएगी तो अगर कोई आक्रामक कुत्ता लोगों के पीछे भागता है। तो उसे ट्रैक कर ऑरेंज कैटेगरी में डाला जा सकता है। अगर काटने की घटना होती है तो रेड फ्लैग लगाया जा सकता है। दूसरे देशों में यह कारगर है। वहां इंसान और कुत्ते साथ रहते हैं।

जस्टिस मेहता: उन देशों की आबादी कितनी है? जरा प्रैक्टिकल बातें करें।

11:45 AM9 जनवरी 2026

जस्टिस मेहता बोले- कुत्तों को महान बताने की कोशिश न करें

एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गोल्डी नाम की एक फीमेल डॉग AIIMS में सालों से रह रही है। इस पर जस्टिस मेहता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या उसे ऑपरेशन थिएटर तक ले जाया गया था? सड़क पर रहने वाले किसी भी कुत्ते में कीड़े हो सकते हैं। अगर ऐसे कुत्ते अस्पतालों में घुस जाएं तो सोचिए क्या होगा।

अंत में जज ने कहा कि बहस पूरी होने के बाद वे इस मामले की असल स्थिति सबके सामने रखेंगे।

11:32 AM9 जनवरी 2026

वकील ने कुत्तों की सुनवाई पर 4 सुझाव दिए

  • पब्लिक जगहों की जोनिंग: कुछ जगहें आवारा कुत्तों से फ्री होनी चाहिए, जैसे हॉस्पिटल और मेन रोड।
  • फीडर्स और ऐसी जगहों की पहचान करें जो पब्लिक रास्तों से दूर हों लेकिन कुत्तों के इलाके में हों।
  • समय पर एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों को लागू करना। राज्यों को इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी पहचानने और उनसे पूछने का निर्देश दें कि वे इसे कैसे बनाएंगे।
  • हर नगर निगम क्षेत्र में एक ऐसा अधिकारी होना चाहिए जिसकी जिम्मेदारी/जवाबदेही हो।

ये सुझाव सुनकर जस्टिस मेहता ने कहा कि इन पर दूसरे वकीलों की अलग राय हो सकती है, लेकिन हमें खुशी है कि आपने चीजों को बैलेंस करने की कोशिश की है।

11:28 AM9 जनवरी 2026

वकील बोले- यह कुत्तों बनाम इंसानों का मामला नहीं है

सीनियर एडवोकेट शादान फरासत (एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट की तरफ से): यह कुत्तों बनाम इंसानों का मामला नहीं है। यह ऐसा मामला है जहां राज्य सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की अपनी जिम्मेदारी में फेल हो गया है।

जिम्मेदारी कोर्ट पर डाल दी गई है। कुत्ते कुछ हद तक कुछ स्थितियों में खतरा बन गए हैं। एक भी जान जाना आर्टिकल 21 के अधिकार का उल्लंघन है। लेकिन राज्य क्या कहते हैं कि हम एक के लिए दूसरे को बलि का बकरा बनाएंगे। ऐसा नहीं हो सकता। यह उनके लिए आसान रास्ता है। इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा होनी चाहिए।

11:16 AM9 जनवरी 2026

महिला वकील की दलील- कुत्ते रखने पर महिलाओं पर कमेंट होते हैं

एडवोकेट पावनी: कुत्तों की केयर करने वालों के खिलाफ कई घटनाएं सामने आ रही हैं। हरियाणा में सोसाइटी ने बाउंसर रखे हैं। कुत्तों की अवैध ब्रीडिंग बड़े पैमाने पर हो रही है।

जस्टिस मेहता: इसका आवारा कुत्तों की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आपके पास सुझाव हैं, तो आप दे सकते हैं।

पावनी: विदेशी कुत्तों के इंपोर्ट की वजह से कुत्तों को आवारा छोड़ दिया जा रहा है। लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के लिए अपमानजनक बातें करते हैं। कह रहे हैं कि महिलाएं संतुष्टि के लिए कुत्तों के साथ सोती हैं!

जस्टिस नाथ: लोग किसी के लिए भी अपमानजनक बातें कह सकते हैं। हमारे बारे में भी बातें कही जाती हैं। आप एक्शन लीजिए।

11:07 AM9 जनवरी 2026

एडवोकेट बोलीं- कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं पर अत्याचार हो रहा

सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी (एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट): मैं कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं की खराब हालत को सामने लाना चाहती हूं। कुछ लोग महिलाओं को परेशान कर रहे हैं, पीट रहे हैं और उन पर हमला कर रहे हैं।

जस्टिस नाथ: FIR दर्ज कराओ, आपको कौन रोक रहा है? यह एक आपराधिक अपराध है।

पावनी: अधिकारी चुप हैं, यह तो एक तरह से समर्थन करना हुआ। 50 लोग घर में घुस आए, कपड़े उतारे, महिला पर हमला किया। उसके पति को भी पीटा।

जस्टिस नाथ: हम अलग-अलग मामलों का ध्यान नहीं रख सकते। यह कानून और व्यवस्था की समस्या है।

पावनी: कोई FIR दर्ज नहीं की जा रही है।

10:55 AM9 जनवरी 2026

आवारा कुत्तों का मुद्दा- पढ़ें सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली 6 सुनवाई

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनकी संख्या सामने नहीं आई है।

यह मामला 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के एक्शन से शुरू हुआ था, जब दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली रैबीज बीमारी पर एक मीडिया रिपोर्ट पब्लिश की गई थी। इस मामले में अब तक 5 बार सुनवाई हो चुकी है।

6 जनवरी को आवारा कुत्तों के मामले में दो वकीलों ने एक और याचिका लगाई। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि इंसानों के मामलों में भी इतने आवेदन नहीं आते। बुधवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। तब सभी की बात सुनी जाएगी।

  • 8 जनवरी: जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं। इस पर एक वकील (कुत्तों के फेवर वाले) ने इनकार किया। फिर जस्टिस ने कहा- अपना सिर मत हिलाइए, ये बात मैं पर्सनल एक्सपीरियंस से बोल रहा
  • 11–14 अगस्त 2025: कोर्ट ने पहली बार डॉग्स को सड़कों से उठाकर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था।
  • 22 अगस्त 2025: पहले के आदेश में बदलाव किया। नसबंदी-टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उनके इलाके में छोड़ने को कहा। सार्वजनिक जगहों पर निर्दिष्ट फीडिंग-जोन घोषित करना।
  • 27 अक्टूबर 2025: राज्यों को फटकार लगाई। कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं से देश की छवि को नुकसान पहुंचता
  • 3 नवंबर 2025: मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत बुलाने के लिए कहा। जब बिहार के मुख्य सचिव ने चुनाव के कारण छूट मांगी, तो कोर्ट ने यह अनुमति नहीं दी। कहा कि चुनाव में आपकी भूमिका विशेष नहीं है, इसलिए आपको पेश होना ही होगा।
  • 7 नवंबर 2025: कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशनों आदि से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश जारी किया। आदेश में कहा गया कि ठिकानों से हटाए गए कुत्ते फिर वहीं वापस नहीं छोड़े जाएं।

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