शाह बोले-वंदे मातरम् का विरोध कांग्रेस के खून में है:लोकसभा में गांधी परिवार के दोनों सदस्य नदारद थे; खड़गे ने वंदे मातरम् के नारे लगाए
राज्यसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा जो लोग वंदे मातरम् के महत्व को नहीं जानते वे इसे चुनाव से जोड़ रहे हैं। एक दिन पहले लोकसभा में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सवाल पूछा था कि ये गीत 150 साल से देश की आत्मा का हिस्सा है। फिर आज इस पर बहस क्यों हो रही है? मैं बताती हूं- क्योंकि बंगाल का चुनाव आ रहा। मोदी जी उसमें अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।
हालांकि शाह ने जवाब में प्रियंका का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, जब वंदे मातरम 100 साल का हुआ, पूरे देश को बंदी बना दिया गया। जब 150 साल पर कल सदन (लोकसभा) में चर्चा शुरू हुई, गांधी परिवार के दोनों सदस्य (राहुल-प्रियंका) नदारद थे। वंदे मातरम का विरोध नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस नेतृत्व के खून में है।
दरअसल राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के मौके पर भारत सरकार की ओर से सालभर का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 2 दिसंबर को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों के प्रतिनिधियों की मीटिंग बुलाई थी। इसमें तय किया गया था कि वंदे मातरम को लेकर 8 दिसंबर को लोकसभा और 9 दिसंबर को राज्यसभा में चर्चा होगी।
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लाइव अपडेट्स
खड़गे बोले- प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सिर्फ नेहरू को क्यों निशाना बनाते हैं?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- नेहरू जी, महात्मा गांधी, मौलाना आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र, सरदार पटेल, गोविंद वल्लभ पंत सहित कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें सिफारिश की गई थी कि राष्ट्रीय समारोहों में जहां भी वंदे मातरम गाया जाता है, केवल पहले दो स्टैंजा ही गाए जाने चाहिए। क्या कांग्रेस कार्यसमिति में नेहरू जी अकेले थे? आप उन सभी बड़े नेताओं का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने सामूहिक फैसला लिया था। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री नेहरू जी को क्यों निशाना बनाते हैं?
नड्डा बोले- वंदे मातरम् पर चर्चा कीजिए, इकॉनोमी पर भी चर्चा करेंगे
नड्डा ने खड़गे को टोका। नड्डा ने कहा- आज वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है, तो उस पर कीजिए। आप दूसरे मुद्दे उठा रहे हैं। ये डिबेट का तरीका नहीं है।
खड़गे बोले- PM मोदी रुपए गिरने पर मनमोहन से सवाल करते थे, अब क्या हुआ
खड़गे ने कहा- रुपये के गिरते स्तर पर मोदी ने 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा था कि देश जानना चाहता है कि ऐसा क्या कारण है कि सिर्फ भारत का रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता ही चला गया, गिरता ही चला गया। ये सिर्फ आर्थिक कारणों से नहीं हुआ। ये आपकी भष्ट्र राजनीति के कारण हुआ।
खड़गे ने आगे कहा- मैं पूछता हूं कि क्या आपके साथ भी ऐसा ही हुआ। क्या आप भी भ्रष्ट हैं। आपकी सरकार की हालत को उससे भी बदतर हो गई है। उसे समय 55-60 रुपए था। आज 100 रुपए हो गया। जैसे हिमालय से गिरने के बाद लोगों के शव के टुकड़े नहीं मिलते, वैसे ही आज भारतीय रुपए की स्थिति हो गई है।
खड़गे ने कहा- मैं 60 सालों से यही गीत गा रहा
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वंदे मातरम् पर अपनी स्पीच शुरू की। वंदे मातरम्, वंदे मातरम् के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के बोलने के बाद मुझे समय दिया, सभापति का इसके लिए धन्यवाद। मैं सौभाग्यशाली हूं। मैं 60 सालों से यही गाना गा रहा हूं। वंदे मातरम् नहीं गाने वालों ने अभी शुरूआत की है। कांग्रेस की तरह से बंकिमजी को नमन करता हूं। आजादी के आंदोलन में जिन लोगों ने बलिदान दिया, उनको भी नमन है। 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रविन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार वंदे मातरम् गाया था।
शाह ने कहा- तिरंगा फहराते वक्त वंदे मातरम् का कहना भूलना नहीं
अमित शाह ने कहा, जिस गान को गांधी ने राष्ट्र की शुद्धतम आत्मा से जुड़ा गीत कहा, वो वंदे मातरम् का टुकड़ा करने का काम कांग्रेस ने किया। वंदे मातरम् ने आजादी के आंदोलन को गति दी। श्यामजी कृष्ण वर्मा, मैडम भीखाजी कामा और वीर सावरकर ने भारत का त्रिवर्ण ध्वज निर्मित किया था, उस पर भी स्वर्णिम अक्षर में एक ही नाम लिखा था- वंदे मातरम् । भारतीय जनता पार्टी का एक भी सदस्य वंदे मातरम् गान के समय सम्मान के साथ कड़ा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। कांग्रेस के जिस जिस सांसद ने वंदे मातरम् नहीं गाने पर बयान दिया। सदन से बाहर चले गए, मैं इसकी लिस्ट आज शाम तक सदन के पटल पर रख दूंगा। इस सदन के चर्चा के रिकॉर्ड में रहना चाहिए कि कांग्रेस के सांसद वंदे मातरम् का विरोध करते हैं बंकिम चंद्र की 130वीं जयंती पर हमारी सरकार ने एक स्टांप जारी किया। आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर हर घर तिरंगा अभियान भी हमने शुरू किया। और आह्वान किया था तिरंगा फहराते वक्त वंदे मातरम् का कहना भूलना नहीं है।
शाह ने कहा- वंदे मातरम् का विरोध नेहरू से आज तक कांग्रेस नेतृत्व के खून में
अमित शाह ने कहा, गुलामी के कालखंड में वंदे मातरम् गीत ने घनघोर अंधेरे के बीच लोगों के मन में आजादी के खिलाफ लड़ने का जोश जगाया। जब वंदे मातरम 100 साल का हुआ, पूरे देश को बंदी बना दिया गया। जब 150 साल पर कल सदन (लोकसभा) में चर्चा शुरू हुई, गांधी परिवार के दोनों सदस्य (राहुल-प्रियंका) नदारद थे। वंदे मातरम का विरोध नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस नेतृत्व के खून में है। कांग्रेस पार्टी की एक नेत्री ने लोकसभा में कहा कि वंदे मातरम पर अभी चर्चा की कोई जरूरत नहीं है।
अमित शाह बोले- हम सब सौभाग्यशाली हैं कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘वंदे मातरम् के यशोगान के लिए चर्चा के लिए हम यहां आए है। चर्चा के जरिए हमारे देश के किशोर, युवा, आने वाली पीढ़ियों तक वंदे मातरम् का योगदान पता चले। हम सब सौभाग्यशाली है कि हमें एतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं।
उन्होंने कहा, इस महान सदन में वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है तब कल कुछ सदस्यों ने लोकसभा में सवाल किया था इस चर्चा की जरूरत क्या है। चर्चा की जरूरत वंदे मातरम् के प्रति समर्पण के प्रति जरूरत जब यह बना तब भी थी और अब भी है।’
शाह ने कहा- जब एक जवान प्राण त्यागता है, वंदे मातरम् बोलता
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- ‘सही है कि वंदे मातरम् के रचनाकार बंकिम बाबू बंगाल में पैदा हुए, बंगाल में गीत की रचना हुई। आनंदमठ में समाहित हुआ, उसका बैकग्राउंड भी बंगाल था, लेकिन यह सिर्फ बंगाल तक या देश तक सीमित नहीं रहा। दुनिया भर में जहां तक आजादी के दीवाने थे, उन्होंने इसका गुणगान किया। जब सरहद पर एक जवान अपने प्राण त्यागता है, तो उसकी जुबान पर वंदे मातरम् होता है।’
शाह ने कहा- आने वाली पीढ़ियों को वंदे मातरम् के बारे में बताना जरूरी
