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ताऊ देवीलाल का हाथ पकड़कर राजनीति में आए धनखड़:चौटाला परिवार से करीबी संबंध; उपराष्ट्रपति आवास खाली कर उन्हीं के बंगले में रहने पहुंचे

ताऊ देवीलाल का हाथ पकड़कर राजनीति में आए धनखड़:चौटाला परिवार से करीबी संबंध; उपराष्ट्रपति आवास खाली कर उन्हीं के बंगले में रहने पहुंचे

हिसार1 घंटे पहलेलेखक: चेतन सिंह
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़। इनसेट में ताऊ देवीलाल का फाइल फोटो

21 जुलाई को अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए जगदीप धनखड़ 1 सितंबर को अपना सरकारी आवास छोड़कर नई दिल्ली के ही छत्तरपुर एरिया में बने एक फार्म हाउस में शिफ्ट हो गए। जिस फार्म हाउस में जगदीप धनखड़ शिफ्ट हुए हैं, वह देश की सियासत में अपनी खास पहचान रखने वाले चौटाला परिवार का है। धनखड़ इसी चौटाला परिवार के मुखिया और देश के उपप्रधानमंत्री रहे स्व. ताऊ देवीलाल का हाथ पकड़कर राजनीति में आए।

जगदीप धनखड़ और चौटाला फैमिली, दोनों जाट बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं और दोनों परिवारों के बीच गहरे पारिवारिक संबंध हैं। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी धनखड़ का चौटाला परिवार से लगाव कई बार नजर आया। चौटाला परिवार ने जब भी किसी प्रोग्राम का न्योता दिया, धनखड़ ने कभी ना नहीं कहा।

यही वजह रही कि जब धनखड़ के उपराष्ट्रपति का सरकारी आवास खाली करने की बारी आई तो ताऊ देवीलाल के पोते और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रमुख अभय चौटाला ने उन्हें अपना फार्म हाउस दे दिया। अभय ने यहां तक कहा कि यह फॉर्म हाउस जगदीप धनखड़ का ही है और वह जब तक चाहें, यहां रह सकते हैं।

चौधरी देवीलाल के साथ जगदीप धनखड़। -फाइल फोटो

राजनीतिक विश्लेषक ने धनखड़ और देवीलाल के रिश्ते का इतिहास बताया…

  • चौटाला परिवार से 38 साल पुराना संबंध: हरियाणा के जाने माने राजनीतिक विश्लेषक सतीश त्यागी बताते हैं कि चौटाला और धनखड़ परिवार का संबंध आज का नहीं, बल्कि 38 साल पुराना है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से लेकर देश के उप प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे चौधरी देवीलाल ने जगदीप धनखड़ को राजनीति में बड़ा ब्रेक दिया था।
  • राजस्थान हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते थे: उन्होंने बताया कि 1987 में राजीव गांधी जब देश के प्रधानमंत्री थे, तब देवीलाल ने दिल्ली के बोट क्लब पर विपक्षी दलों की रैली का आह्वान किया था। रैली को विजय रैली का नाम दिया गया। उस समय जगदीप धनखड़ राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर में प्रैक्टिस करते थे।
  • देवीलाल से प्रभावित थे धनखड़: सतीश त्यागी के मुताबिक, किसान पृष्ठभूमि के होने के नाते धनखड़ के दिल में किसानों एवं कामकाजी वर्ग के लिए कुछ करने की चाह थी। उस समय हरियाणा एवं पंजाब के साथ-साथ राजस्थान में भी देवीलाल का नाम था, इसलिए जगदीप धनखड़ उनसे खासे प्रभावित थे।
  • रैली में धनखड़ पर देवीलाल की नजर पड़ी: सतीश त्यागी बताते हैं कि विजय रैली में देवीलाल की निगाह जगदीप धनखड़ पर पड़ी थी। उन्होंने जगदीप धनखड़ को अपने पास बुलाया और उनकी पीठ पर हाथ रखकर शाबाशी दी थी। वहीं से जगदीप धनखड़ का देश की राजनीति में पदार्पण हो गया।
  • झुंझनू सीट से सांसद बने धनखड़: सतीश बताते हैं कि करीब 2 साल बाद वर्ष 1989 में झुंझनू लोकसभा सीट पर चुनाव हुआ तो देवीलाल ने विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में जगदीप धनखड़ को खड़ा कर दिया। वे चुनाव जीत गए। वर्ष 1989 से लेकर 1991 तक जगदीप धनखड़ झुंझनू लोकसभा क्षेत्र से नौवीं लोकसभा में जनता दल की तरफ से सांसद रहे। फिर धनखड़ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1993 से लेकर 1998 तक उन्होंने राजस्थान विधानसभा में किशनगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

ओपी चौटाला के निधन पर चौधरी देवीलाल को किया था याद पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 दिसंबर 2024 को हरियाणा के पूर्व CM ओमप्रकाश चौटाला के अंतिम दर्शनों के लिए सिरसा के तेजाखेड़ा गांव में पहुंचे थे। अंतिम दर्शन करते समय वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा था-

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आज जो मैं हूं, उसका निर्णय चौधरी साहब (चौधरी देवीलाल) ने किया था। दो बड़े महानुभावों को मैंने मना कर दिया था। मैं वकालत करना चाहता था, लेकिन चौधरी साहब बोले कि निर्णय मैंने ले लिया है। चौधरी साहब का लगाया वह बीज आपके समक्ष उपस्थित है।

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धनखड़ ने कहा था- 35 साल पहले का वह दिन जब बीज के रूप में चौधरी देवीलाल के आशीर्वाद से मुझे समझाया कि प्लीडर का प्री हटा दो। मैंने कहा कि प्लीडर हूं। चौधरी साहब ने मेरी यात्रा शुरू करवाई। मेरा हाथ पकड़ा, अर्थ बल दिया, दर्शन दिए और मुझे नौवीं लोकसभा में निर्वाचित करवाया। मंत्री पद दिया, मैं कभी नहीं भूल सकता।

जगदीप धनखड़ ओमप्रकाश चौटाला के निधन पर श्रद्धांजलि देने आए थे। -फाइल फोटो

धनखड़ ने बताया था चौटाला परिवार के साथ पुराना नाता तेजाखेड़ा में श्रद्धांजलि सभा में जगदीप धनखड़ ने कहा था- चौटाला परिवार के साथ पुराना नाता है। मेरे इकलौते बेटे की मौत हो गई तो पूरा चौटाला परिवार जयपुर आया था। चौटाला साहब ने कहा कि महाभारत के अर्जुन भी अपने बेटे को बचा नहीं पाए, तुम आगे बढ़ते रहो।

भावुक होते हुए धनखड़ ने कहा था- ऐसा कोई मौका नहीं आया, जब चौधरी साहब ने मेरी चिंता नहीं की। जब राज्यपाल बनने के बाद आशीर्वाद लिया तो उस समय मेरे गले में खराश थी। चौधरी साहब ने उसी समय एक विशेष प्रकार का लड्डू खाने को दिया। साथ ही अपने कर्मचारियों से कहा कि पैक कर दो। नीचे उतरा तो पूरी की पूरी टोकरी गाड़ी में रखी हुई थी।

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