एअर इंडिया CEO बोले-दोनों पायलट की मेडिकल स्थिति सामान्य थी:मेंटेनेंस समय से की गई; बोइंग ने कहा- विमानों के फ्यूल स्विच लॉक्स एकदम सेफ
एअर इंडिया के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने कहा कि दोनों पायलटों ने ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट पास किया था और उनकी मेडिकल स्थिति सामान्य थी। प्राइमरी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्लेन और इंजन में कोई टेक्निकल या मेंटेनेंस से जुड़ी खराबी नहीं थी।
विल्सन ने कहा- प्लेन के सभी जरूरी मेंटेनेंस कार्य समय से किए गए थे। ईंधन की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं थी और टेक-ऑफ रोल सामान्य था। उन्होंने कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में ये बात लिखी है। एअर इंडिया के CEO ने आगे लिखा-
रिपोर्ट में किसी भी तरह का कारण और सिफारिश नहीं दी गई है, हम सभी से अनुरोध करते हैं कि जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकालें। एअर इंडिया पूरी तरह से जांच एजेंसियों का सहयोग कर रही है।

इधर, अमेरिका की सरकारी एजेंसी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और बोइंग ने रविवार को प्राइवेट नोटिफिकेशन जारी करते हुए बताया कि बोइंग प्लेन के फ्यूल स्विच लॉक एकदम सेफ हैं।
FAA ने कहा, ‘फ्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन, लॉकिंग फीचर्स, बोइंग के अलग-अलग विमानों में एक ही है। फिर भी हम इसे खतरे की स्थिति नहीं मानते, जिसके लिए किसी भी बोइंग विमान मॉडल पर एयरवर्दीनेस डायरेक्टिव देने की जरूरत पड़े।’
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, FAA और बोइंग ने यह नोटिफिकेशन 11 जुलाई को अहमदाबाद-लंदन प्लेन क्रैश की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद जारी किया, जिसमें इंजन फ्यूल कटऑफ स्विच पर सवाल उठाए गए थे। फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के इंजन में फ्यूल के बहाव को कंट्रोल करते हैं।
थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल 6 साल में बार बदला बदला गया
न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से रविवार को बताया कि एअर इंडिया ने 2019 में बोइंग के निर्देश के बाद पिछले 6 सालों में अहमदाबाद-लंदन बोइंग 787-8 फ्लाइट के थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल (TCM) को दो बार बदला था।
TCM में फ्यूल कंट्रोल स्विच होते हैं, जो प्लेन क्रैश हादसे की जांच का केंद्र बन गए हैं। 12 जून को अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट में ये स्विच टेकऑफ के तुरंत बाद बंद हो गए थे। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई को बताया कि अहमदाबाद-लंदन प्लेन में TCM को 2019 और 2023 में बदला गया था।
फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने से दोनों इंजन बंद हो गए थे AAIB ने 15 पेज की अपनी रिपोर्ट में बताया कि अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट के दोनों इंजनों में फ्यूल फ्लो को कंट्रोल करने वाले स्विच बंद हो गए थे, इसलिए टेकऑफ के तुरंत बाद इंजन बंद हो गए और विमान का थ्रस्ट खत्म हो गया। पायलट ने 10 सेकेंड बाद दोबारा इन्हें चालू किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
कॉकपिट की रिकॉर्डिंग से पता चला है कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा था कि क्या तुमने स्विच बंद किया है? दूसरे ने जवाब दिया, नहीं। रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि उड़ान से पहले फ्लाइट के एक सेंसर में परेशानी थी जिसे ठीक किया गया।
प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है, जैसा कि इस तरह की रिपोर्ट्स में आमतौर पर होता है। यह सिर्फ तथ्यों को प्रस्तुत करती है और अंतिम रिपोर्ट शायद एक-दो साल बाद आएगी जिसमें इस हादसे की असल वजह पता चल सकती है।
मेडिकल होस्टल पर प्लेन क्रैश होने के कारण इस हादसे में कुल 270 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 241 यात्री और क्रू मेंबर्स शामिल थे। सिर्फ एक भारतीय मूल के ब्रिटिश यात्री की जान बची।
टेकऑफ से लेकर हादसे तक की पूरी उड़ान करीब 30 सेकेंड ही चली 15 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ से लेकर हादसे तक की पूरी उड़ान करीब 30 सेकेंड ही चली। इस समय तक रिपोर्ट में बोइंग 787-8 विमान और इंजन को लेकर किसी ऑपरेटर के लिए कोई चेतावनी या कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है।
साथ ही रिपोर्ट में मौसम, बर्ड-हिट और सबोटाज जैसे किसी भी कारण का जिक्र नहीं है। दोनों पायलट मुंबई बेस्ड थे और पिछले दिन अहमदाबाद पहुंचे थे। फ्लाइट से पहले पर्याप्त रेस्ट लिया था। को-पायलट इस फ्लाइट के लिए पायलट फ्लाइंग (PF) था और PIC पायलट मॉनिटरिंग (PM) था।
इस फ्लाइट के पायलट सुमीत सभरवाल और को-पायलट क्लाइव कुंदर थे। सुमित को 8,200 घंटे से ज्यादा का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। को पायलट को भी 1,100 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। यानी, दोनों एक्सपीरियंस्ड पायलट थे।
फ्यूल कंट्रोल स्विच का काम और तकनीक
फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास होते हैं। ये इंजन में फ्यूल की सप्लाई को कंट्रोल करते हैं। इसका मुख्य काम इंजन में फ्यूल की सप्लाई को शुरू करना (‘रन’ पोजिशन) या बंद करना (‘कटऑफ’ पोजिशन) है।
हर इंजन के लिए अलग-अलग फ्यूल कंट्रोल स्विच होता है। उदाहरण के लिए, बोइंग 787 में दो इंजन हैं, तो दो स्विच होंगे – एक बाएं इंजन के लिए, एक दाएं के लिए।
- रन पोजिशन: जब स्विच ‘रन’ पर होता है, तो फ्यूल वाल्व खुलता है और इंजन में फ्यूल की सप्लाई शुरू हो जाती है। इससे इंजन चालू रहता है और विमान को थ्रस्ट मिलता है।
- कटऑफ पोजिशन: जब स्विच को ‘कटऑफ’ पर किया जाता है तो फ्यूल वाल्व बंद हो जाता है और इंजन में फ्यूल की सप्लाई रुक जाती है। इससे इंजन तुरंत बंद हो जाता है।
फ्यूल कंट्रोल स्विच स्प्रिंग-लोडेड होते हैं और इनमें डिटेंट (एक तरह का लॉक) होता है, जो इन्हें अपनी पोजिशन में स्थिर रखता है।
स्विच को हिलाने के लिए तीन स्टेप्स चाहिए – पकड़ना, डिटेंट से बाहर निकालना और रिलीज करना। ये कोई नॉर्मल स्विच नहीं है जो गलती से धक्का लगने से दब जाए जाए।
जांच कहां तक पहुंची:
- विमान के मलबे वाली जगह पर काम, जैसे ड्रोन से फोटो और वीडियो लेना, पूरा हो चुका है। मलबे को हवाई अड्डे के पास एक सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है।
- दोनों इंजन मलबे से निकाल लिए गए हैं और हवाई अड्डे के एक हैंगर में सुरक्षित रखे गए हैं।
- आगे की जांच के लिए जरूरी हिस्सों को चुन लिया गया है और उन्हें अलग रखा गया है।
- विमान में ईंधन भरने के लिए इस्तेमाल किए गए टैंकों और बोसर्स से लिए गए ईंधन के नमूनों की जांच DGCA की लैब में की गई और वे ठीक पाए गए।
- APU फिल्टर और बाएं पंख के रिफ्यूल/जेटिसन वाल्व से बहुत कम मात्रा में ईंधन के नमूने मिले हैं। इनकी जांच ऐसी जगह की जाएगी जो कम मात्रा में भी टेस्ट कर सके।
- आगे के EAFR से डाउनलोड किए गए डेटा की विस्तार से जांच हो रही है।
- गवाहों और बचे हुए यात्री के बयान जांचकर्ताओं ने ले लिए हैं।
- चालक दल और यात्रियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का पूरा विश्लेषण किया जा रहा है ताकि मेडिकल और इंजीनियरिंग निष्कर्षों को मिलाया जा सके।
- शुरुआती सुरागों के आधार पर और जानकारी जुटाई जा रही है।
- जांच के इस चरण में B787-8 या GE GEnx-1B इंजन के ऑपरेटर्स और निर्माताओं के लिए कोई सुझाव नहीं दिए गए हैं।
- जांच अभी चल रही है, और जांच टीम हितधारकों से और सबूत, रिकॉर्ड और जानकारी की समीक्षा करेगी।
