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बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:अदालत ने कहा- EC के एक्शन से समस्या नहीं, लेकिन यह चुनाव से पहले क्यों

बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:अदालत ने कहा- EC के एक्शन से समस्या नहीं, लेकिन यह चुनाव से पहले क्यों

पटना24 मिनट पहले
बुधवार को महागठबंधन ने वोटर लिस्ट रिवीजन के विरोध में बिहार बंद किया था।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के रिवीजन मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई जारी है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वोटर लिस्ट रिवीजन नियमों को दरकिनार कर किया जा रहा है। वोटर की नागरिकता जांची जा रही है। ये कानून के खिलाफ है।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) यानी वोटर लिस्ट रिवीजन में नागरिकता के मुद्दे में क्यों पड़ रहे हैं?अगर आप वोटर लिस्ट में किसी शख्स का नाम सिर्फ देश की नागरिकता साबित होने के आधार पर शामिल करेंगे तो फिर ये बड़ी कसौटी होगी। यह गृह मंत्रालय का काम है। आप उसमे मत जाइए।

SIR के खिलाफ राजद सांसद मनोज झा, TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत 11 लोगों ने याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील गोपाल शंकर नारायण, कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी दलील दे रहे हैं। चुनाव आयोग की पैरवी पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, राकेश द्विवेदी और मनिंदर सिंह कर रहे हैं।

कोर्ट रूम LIVE

  • याचिकाकर्ता के वकील: अब जबकि चुनाव कुछ ही महीनों दूर हैं, चुनाव आयोग कह रहा है कि वह पूरी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 30 दिनों में करेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट: SIR प्रक्रिया में कोई बुराई नहीं है, लेकिन यह आगामी चुनाव से कई महीने पहले ही कर ली जानी चाहिए थी। भारत में मतदाता बनने के लिए नागरिकता की जांच करना आवश्यक है, जो संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत आता है। चुनाव आयोग जो कर रहा है, वह संविधान के तहत अनिवार्य है और इस तरह की पिछली प्रक्रिया 2003 में की गई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट: SIR के दौरान दस्तावेजों की सूची से आधार कार्ड को बाहर रखा जा रहा है।
  • चुनाव आयोग: वोटर रिवीजन के दौरान सिर्फ आधार ही नहीं मांगा जा रहा, अन्य दस्तावेज भी मांग रहे हैं।

वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अपडेट्स

43 मिनट पहले

चुनाव आयोग बोला- बिना सुनवाई किसी का नाम नहीं कटेगा

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सुनवाई का मौका दिए बिना किसी को भी मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा।

52 मिनट पहले

कोर्ट ने चुनाव आयोग से तीन मुद्दों पर जवाब मांगा

1.क्या उसके पास मतदाता सूची में संशोधन करने का अधिकार है।

2. इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई। 3. इसमें कितना समय लगेगा। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि समय बीतने के साथ, मतदाताओं के नाम शामिल करने या बाहर करने पर विचार करने के लिए मतदाता सूची को संशोधित करने की जरूरत होती है। राकेश द्विवेदी ने पूछा अगर चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में संशोधन करने का अधिकार नहीं है, तो यह कौन करेगा?

01:30 PM10 जुलाई 2025

EC ने कहा- सिर्फ आधार से नागरिकता साबित नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट- आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में मान्यता क्यों नहीं दे रहे हैं EC के वकील- सिर्फ आधार कार्ड से नागरिकता साबित नहीं होती

सुप्रीम कोर्ट- अगर आप वोटर लिस्ट में किसी शख्स का नाम सिर्फ देश की नागरिकता साबित होने के आधार पर शामिल करेंगे तो फिर ये बड़ी कसौटी होगी। यह गृह मंत्रालय का काम है। आप उसमे मत जाइए। उसकी अपनी एक न्यायिक प्रक्रिया है। EC के वकील-– आरपी एक्ट में भी नागरिकता का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट- आपको अगर यह करना है तो फिर इतनी देरी क्यों की। यह चुनाव से ठीक पहले नहीं होना चाहिए।

01:06 PM10 जुलाई 2025

याचिकाकर्ता के वकील ने ये 3 सवाल उठाए

1. चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए 11 दस्तावेज स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन आधार कार्ड और वोटर ID जैसे अहम पहचान पत्रों को मान्यता नहीं दी जा रही है।

2. आयोग की प्रक्रिया स्पष्ट और समान नहीं है। अगर कोई व्यक्ति 2003 की वोटर लिस्ट में शामिल है तो उसे अभिभावकों के दस्तावेज या नागरिकता से जुड़े प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति उस लिस्ट में नहीं है तो उसे नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे।

3. अगर चुनाव आयोग जिस प्रक्रिया को चला रहा है वो सघन पुनरीक्षण (Intensive Revision) है तो नियम के अनुसार अधिकारियों को हर घर जाकर वोटर की जानकारी जुटानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

12:49 PM10 जुलाई 2025

कोर्ट ने कहा- साबित कीजिए आयोग गलत कर रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा- ‘पहले ये साबित कीजिए कि चुनाव आयोग जो कर रहा है, वह सही नहीं है।’

12:47 PM10 जुलाई 2025

अभिषेक मनु सिंघवी बोले- लाखों लोगों के नाम लिस्ट से हटने की आशंका

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- ‘2003 में जब ऐसा व्यापक पुनरीक्षण हुआ था, तब चुनाव में काफी समय बचा था, लेकिन इस बार चुनाव नजदीक हैं, जिससे लाखों लोगों को सूची से हटाने की आशंका है।’

12:46 PM10 जुलाई 2025

कपिल सिब्बल बोले- नागरिकता साबित करने का बोझ डाला जा रहा

कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि- ‘आयोग मतदाताओं पर नागरिकता साबित करने का बोझ डाल रहा है। आयोग को यह बताना चाहिए कि वह किस आधार पर किसी को भारतीय नागरिक नहीं मानता। मतदाता पहचान पत्र, बर्थ सर्टिफिकेट और मनरेगा कार्ड तक को नहीं स्वीकार किया जा रहा है।’

11:49 AM10 जुलाई 2025

ग्राफिक्स से जानिए वोटर वेरिफिकेशन से जुड़ी जानकारियां

11:45 AM10 जुलाई 2025

चुनाव आयोग ने दिए 2 बड़े तर्क

1. डेढ़ लाख एजेंट जुटे हैं, किसी का नाम नहीं कटेगा

बिहार में फिलहाल करीब 7 करोड़ 89 लाख वोटर हैं। इसमें से करीब 4 करोड़ 96 लाख वोटर 2003 के वोटर लिस्ट में भी शामिल थे। उनका वेरिफिकेशन नहीं होगा। यानी बाकी बचे 2 करोड़ 93 करोड़ वोटरों का ही वेरिफिकेशन किया जाएगा।

इसके लिए राजनीतिक दलों के करीब डेढ़ लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) इस मुहिम में जुटे हैं। इसमें सभी दलों के लोग शामिल हैं। ऐसे में किसी वैध वोटर के नाम कटने की गुंजाइश कम है। अभी भी सभी राजनीतिक दल ज्यादा से ज्यादा BLA बनाकर लिस्ट को पारदर्शी बना सकते हैं।

2. पिछली बार भी 31 दिन में हुआ था वेरिफिकेशन

चुनाव आयोग का कहना है कि पिछली बार यानी 2003 में 31 दिन में ही SIR हुआ था। इस बार भी कमोबेश एक महीने का टाइम है। अभी करीब डेढ़ लाख BLA काम पर जुटे हैं।

एक BLA एक दिन में अधिक से अधिक 50 आवेदन बूथ लेवल आफिसर (BLO) के पास जमा कर सकता है। इस तरह एक दिन 75 लाख से अधिक आवेदन BLO के पास जमा हो सकता है।

11:44 AM10 जुलाई 2025

राहुल बोले- महाराष्ट्र की तरह बिहार चुनाव में चोरी की कोशिश

बुधवार को बिहार बंद में शामिल हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘चुनाव आयोग मैं आपको साफ बोल रहा हूं। मैं बिहार और हिन्दुस्तान की जनता को स्पष्ट कह रहा हूं कि महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था और वैसे ही बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही है। उन्हें पता है कि हमने महाराष्ट्र मॉडल समझ लिया इसलिए वे बिहार मॉडल लाए हैं। ये गरीबों के वोट छीनने का तरीका है।’

‘ये बिहार है और बिहार की जनता ये नहीं होने देगी। हमारे लोग चुनाव आयोग से जाकर मिले। मैं नहीं जा पाया था। इलेक्शन कमीशन बीजेपी और RSS नेताओं की तरह बात कर रहे हैं।’

‘वो भूल गए कि वो BJP नेता नहीं हैं। मैं कहता हूं आपको जो करना है करिए, लेकिन बाद में कानून आप पर हावी होगा।’

11:44 AM10 जुलाई 2025

चुनाव आयोग के क्या हैं निर्देश

24 जून को चुनाव आयोग ने निर्देश जारी कर कहा है, ‘हर वोटर को व्यक्तिगत गणना फॉर्म जमा करना जरूरी है। 1987 के बाद जन्मे और 1 जनवरी 2003 के बाद वोटर लिस्ट में जुड़े लोगों को बर्थ सर्टिफिकेट, पासपोर्ट या किसी एजुकेशनल सर्टिफिकेट के जरिए अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा।’

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करने के लिए जन्म तिथि और जन्म स्थान का प्रमाण देने के लिए जुलाई 1987 की कट ऑफ डेट तय की है। आयोग ने कहा है, ‘राज्य से बाहर रहने वाले मतदाताओं को भी गणना प्रपत्र भरना अनिवार्य होगा। फॉर्म ECI की वेबसाइट से डाउनलोड कर 26 जुलाई तक भरना होगा।

फॉर्म को भरने और साइन करने के बाद डॉक्यूमेंट अपलोड करना होगा। इसके बाद मतदाता सूची में नाम बना रहेगा। फॉर्म नहीं भरने पर मतदाता सूची से नाम हटेगा।

बिहार विधानसभा चुनाव से वोटर लिस्ट में विशेष संशोधन प्रक्रिया (SIR) को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस, RJD और वाम दलों समेत INDIA गठबंधन ने इसे पक्षपाती और संदिग्ध बताया है।

वहीं, चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि वेरिफिकेशन (सत्यापन) का काम आर्टिकल-326 और लोक प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में ही किया जा रहा है।

इससे किसी वैलिड (वैध) वोटर का नाम नहीं कटेगा, बल्कि विदेशी घुसपैठियों सहित वोटर लिस्ट में गलत तरीके से नाम जुड़वाने वाले बाहर होंगे।

11:43 AM10 जुलाई 2025

कांग्रेस-RJD सहित INDIA गठबंधन की पार्टियां क्यों कर रही विरोध

पिछले हफ्ते दिल्ली में कांग्रेस, RJD, लेफ्ट सहित INDIA गठबंधन की पार्टियों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के पदाधिकारियों से मिला था। 3 घंटे तक चली मुलाकात में सबने अपनी चिंता जाहिर की।

नेताओं ने इस बात पर आपत्ति जताई कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता की जानकारी मांगी जा रही है, जो गरीब और ग्रामीण लोगों के पास नहीं होती। कांग्रेस ने इसे मतदान अधिकारों की डकैती और एक गैर-सरकारी NRC करार दिया।

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