मोहन भागवत बोले-हमारे पूर्वज धर्म का सत्य जानते थे:मर्यादा, अनुशासन और संतुलन राष्ट्र प्रगति की नींव, दुनिया के देश स्वार्थ के साथ चल रहे
दुनिया के देश आजकल अपने स्वार्थ के साथ चल रहे हैं। हर कोई चाहता है कि मेरा स्वार्थ सिद्ध होना चाहिए, मेरा हित होना चाहिए, मैं बढ़ता रहूं, बाकि लोगों का क्या होगा वो बाद का सवाल है। सभी इसी सोच के साथ चल रहे हैं। लेकिन भारत देश और भारत के लोग कभी भी…
