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राजस्थान के 100 हॉस्पिटल को बम से उड़ाने की धमकी:मेल में लिखा- अस्पताल में सभी मारे जाएंगे, पहले की तरह इस बार भी झूठा निकला मामला

राजस्थान के 100 हॉस्पिटल को बम से उड़ाने की धमकी:मेल में लिखा- अस्पताल में सभी मारे जाएंगे, पहले की तरह इस बार भी झूठा निकला मामला

जयपुर16 मिनट पहले

जयपुर के मोनिलेक और सीके बिरला समेत राजस्थान के 100 से ज्यादा हॉस्पिटल को बम से उड़ाने की धमकी अफवाह निकली। सुबह साढ़े आठ से दोपहर डेढ़ बजे तक पुलिस की टीमों ने संबंधित हॉस्पिटल में सर्च ऑपरेशन चलाया। कोई भी संदिग्ध चीज नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। इससे पहले भी कई बार मेल करके बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है। हर बार पूरा मामला झूठा साबित होता है।

रविवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे आए मेल ने हॉस्पिटल प्रबंधन के होश उड़ा दिए थे। मेल में लिखा था- हॉस्पिटल के बेड के नीचे और बाथरूम के अंदर बम है। हॉस्पिटल में मौजूद सभी लोग मारे जाएंगे। हर तरफ खून ही खून होगा। तुम सभी लोग मौत के ही लायक हो। मेल करने वाले ने खुद की पहचान ‘लखा आतंकवादी चिंग और कल्टिस्ट’ के रूप में उजागर किया है।

जयपुर के दर्जनभर से ज्यादा हॉस्पिटल को इस तरह की धमकी मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस पहुंच गई और सर्च शुरू किया। मोनिलेक हॉस्पिटल जवाहर नगर (जयपुर) के सेक्टर 4 में स्थित है। सीके बिरला हॉस्पिटल गोपालपुरा मोड़ (जयपुर) पर त्रिवेणी फ्लाई ओवर के पास शांति नगर में है।

एटीएस और बम निरोधक दस्ता हॉस्पिटल पहुंचा
एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया- हॉस्पिटल्स से अभी जानकारी मिली है। इसके बाद में एटीएस और बम निरोधक दस्ता के अधिकारियों को भेजा गया है। दोनों ही अस्पतालों में सर्च चल रहा है। अभी तक किसी भी प्रकार की कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। मेल करने वाले का आईपी एड्रेस सर्च किया जा रहा है

मोनिलेक हॉस्पिटल से स्टाफ और मरीजों को बाहर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।।

सबसे पहले मोनिलेक से मिली मेल की जानकारी
सुबह सबसे पहले 8.30 बजे मोनिलेक हॉस्पिटल से पुलिस को मेल के बारे में सूचना मिली। करीब 8.45 बजे पुलिस की टीम मोनिलेक हॉस्पिटल पहुंच गई। एटीएस, इमरजेंसी रिस्पांस टीम (ईआरटी) और बम निरोधक दस्ता ने सर्च अभियान शुरू किया है। इसे दौरान 9 बजे सीके बिरला से भी सूचना मिली। इसके बाद मोनिलेक हॉस्पिटल से करीब 10.30 बजे ईआरटी टीम सीके बिरला हॉस्पिटल पहुंची। यहां भी सर्च चल रहा है।

सीके बिरला के आउटडोर से मरीजों को बाहर निकाल दिया गया है।

तीन महीने पहले स्कूलों को मेल कर दी गई थी धमकी
तीन महीने पहले जयपुर सहित तमाम शहरों के स्कूलों को मेल कर बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने तमाम स्कूलों की जांच की थी। कहीं से भी किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की सूचना नहीं मिली थी। इस घटना से ठीक एक दिन पहले जयपुर सहित देश के 12 एयरपोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। पिछले कुछ महीने में मेल कर धमकी देने की लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं।

एक्सपर्ट बोले- सीबीआई और इंटरपोल की मदद लेनी चाहिए
तीन महीने पहले स्कूलों को मिली धमकी के बाद दैनिक भास्कर ने साइबर एक्सपर्ट से बात की थी। साइबर क्राइम पुलिस थाना के पूर्व इंचार्ज राजेंद्र प्रसाद ने कहा था- किसी थाना स्तर की पुलिस ऐसे आरोपियों तक नहीं पहुंच सकती है। पुलिस के पास जांच के लिए पर्याप्त सॉफ्टवेयर और संसाधन मौजूद हैं। लेकिन इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। जांच अधिकारी इन टूल्स का प्रशिक्षण लेने के बावजूद उपयोग नहीं करते हैं।

वीपीएन का उपयोग करने पर पुलिस को सीबीआई और इंटरपोल की मदद लेनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि इनका पता नहीं लगाया जा सकता है। यह एक लंबी प्रक्रिया होती है, लेकिन जांच केवल थाना स्तर पर छोड़ दी जाती है। जबकि एजेंसी की मदद लेने के लिए पुलिस को हायर लेवल पर काम करने की जरूरत है।

रविवार सुबह जयपुर सहित प्रदेश के तमाम हॉस्पिटल को ई-मेल भेजकर धमकी दी गई।

डार्कनेट और प्रॉक्सी सर्वर का बढ़ रहा दुरुपयोग
साइबर क्राइम की दुनिया में डार्कनेट और प्रॉक्सी सर्वर का दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। साइबर सिक्योरिटी एंड लॉ एक्सपर्ट मोनाली कृष्णा गुहा कहती हैं- इस तरह के ई-मेल भेजने के दौरान शातिर अपराधी अमूमन डार्कनेट या प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करते रहे हैं। इसकी वजह से पुलिस जांच को किसी नतीजे तक पहुंचने में काफी समय लगता है।

वीपीएन से लोकेशन छिपाते हैं, इसलिए गिरफ्त से दूर
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट मुकेश चौधरी कहते हैं- वीपीएन से लोकेशन छिपाने के कारण ऐसे आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बच जाते हैं। वीपीएन के जरिए कोई भी अपनी लोकेशन चेंज कर सकता है। ऐसे में ई-मेल रिसीवर को लगता है कि ई-मेल भेजने वाला किसी दूसरे देश में हैं। अपराधी अपनी लोकेशन हाइड करने के लिए दूसरे देशों का वीपीएन यूज करते हैं। जैसे जयपुर और दिल्ली दोनों केस में रूसी सर्वर से ई-मेल भेजना बताया जा रहा है। हाे सकता है कि किसी और जगह से ई-मेल भेजे गए, लेकिन लोकेशन रूस शो हो रही है।

गंभीर है मामला
धमकी भरे ईमेल भेजने के पीछे क्या सोच हो सकती है और इसे कितना सीरियसली लिया जाए, दैनिक भास्कर ने इस पर साइबर एक्सपर्ट्स से बात की। इसमें एक बात साफ है कि भले ही ये धमकी भरा ईमेल फर्जी निकला हो, लेकिन ये मामला बहुत गंभीर है।

ईमेल भेजने वाला क्या चाहता है..

  1. एक ही ईमेल ID से 100 से ज्यादा हॉस्पिटल को एक साथ धमकी दी गई। अगर कोई वाकई टारगेट करता, तो एक या दो या कुछ गिने-चुने हॉस्पिटल को ईमेल भेजता।
  2. ईमेल भेजने वाले का मकसद कोई बड़ी घटना करना नहीं होता है। वो सिर्फ लोगों के मन में डर पैदा करना चाहता है।

रूस के सर्वर का इस्तेमाल
पिछली बार राजस्थान के स्कूलों और दिल्ली के स्कूलों सहित एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने के लिए जो मेल भेजे गए, उसमें रूस के सर्वर का इस्तेमाल किया गया था। दिल्ली के स्कूलों को awariim@mail.ru और जयपुर के स्कूलों को instrumenttt@inbox.ru आईडी से ई-मेल भेजा गया था।

ई-मेल में पीएम मोदी और काफिरों से बदला लेने की धमकी मिली थी
करीब तीन महीने पहले जयपुर के 56 स्कूलों को भेजे गए ई-मेल में धमकी और प्रतिशोध की बात कही गई थी। सभी स्कूलों को ई-मेल विस्फोट सब्जेक्ट से भेजे गए थे। इन्हें instrumenttt@inbox.ru से भेजा गया था। ई-मेल में पीएम नरेंद्र मोदी और काफिरों से प्रतिशोध लेने की बात कही गई थी। मेल में गुजरात का जिक्र करते हुए शहरों को खंडहरों में बदलने की धमकी दी गई थी। इसमें बदला लेने की बात कहते हुए लिखा था- ‘आपने प्रतिशोध से बचने की कितनी भी कोशिश की हो, लेकिन यह जरूर लिया जाएगा। हमारे शरीर को कुछ भी हो जाए।… हम कभी नहीं मरेंगे और हमें मरा हुआ नहीं समझा जाए। वे सभी रब के पास जीवित हैं।’

देश के कई राज्यों के स्कूलों को मिल चुकी हैं धमकियां, सब झूठी निकलीं
जयपुर से पहले भी कई राज्यों के स्कूलों को बड़ी संख्या में धमकी भरे ई-मेल भेजे जा चुके हैं। एक मई को दिल्ली के 222 स्कूलों में बम की फर्जी सूचना ई-मेल से मिली थी। बाद में इसी ई-मेल से अहमदाबाद के 6 स्कूलों को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई।

इसी साल फरवरी में चेन्नई के 13 स्कूलों और अप्रैल में कोलकाता के स्कूलों को भी इसी तरह धमकी भरे ई-मेल भेजे गए थे। पिछले साल 2023 में बेंगलुरु के करीब 50 स्कूलों में बम होने की फर्जी सूचना दी गई थी। हालांकि हर तरह की सूचना झूठी निकली थीं।

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