गुलाम नबी आजाद को फिर साथ लाना चाहती है कांग्रेस:जम्मू-कश्मीर चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस-PDP से गठबंधन की कोशिश, कहा- भाजपा को हराना मकसद
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही कांग्रेस राज्य में एक्टिव हो गई है। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गांधी परिवार चाहता है कि पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद की पार्टी में वापसी हो। इसके लिए सीनियर नेताओं को उनसे बात करने के लिए कहा गया
हालांकि, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के प्रवक्ता ने सलमान निजामी ने कहा- पिछले 2 हफ्ते से आजाद की कांग्रेस जॉइन करने की गलत खबरें चल रही है। न उन्होंने गांधी परिवार को और न ही गांधी परिवार ने उनको कॉनटेक्ट किया है। ये कोशिशें पार्टी को तोड़ने के लिए हो रही है।
इधर, पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और PDP से गठबंधन बनाने की कोशिश में है। पार्टी ने कहा- गठबंधन बनाने का उद्देश्य भाजपा को हराना है। इसके लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों को साथ आना होगा।
TOI की खबर के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव गुलाम अहमद मीर ने कहा कि NC और PDP के लिए राज्य का मुद्दा व्यक्तिगत मुद्दों से ऊपर होना चाहिए। I.N.D.I.A अलायंस नेशनल लेवल पर बना है। जम्मू-कश्मीर में भी तीनों पार्टियों को मिलकर चुनाव लड़ने की जरूरत है।
जम्मू-कश्मीर में गुपकार गठबंधन के तहत नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP एक साथ आई थीं, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए थे। PDP ने भाजपा के साथ गठबंधन करके जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाई थी।
सिफारिशों को नजर अंदाज करने से नाराज आजाद ने इस्तीफा दिया था
गुलाम नबी आजाद ने 26 अगस्त को कांग्रेस छोड़ दी थी। आजाद ने अपने इस्तीफे के तौर पर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पांच पन्ने की चिट्ठी भेजी थी और उनकी सिफारिशों को नजर अंदाज करने का आरोप लगाया था।
आजाद ने लिखा था- राहुल गांधी ने पार्टी में एंट्री के साथ ही सलाह के मैकेनिज्म को तबाह कर दिया। खासतौर पर जनवरी 2013 में उनके उपाध्यक्ष बनने के बाद तो पार्टी में यह सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया। पूरी चिट्ठी पढ़ने के लिए क्लिक करें…
जी-23 ग्रुप का हिस्सा थे गुलाम नबी आजाद
गुलाम नबी आजाद पार्टी से अलग उस जी 23 समूह का भी हिस्सा थे, जो पार्टी में कई बड़े बदलावों की पैरवी करता है। उन तमाम गतिविधियों के बीच इस इस्तीफे ने गुलाम नबी आजाद और उनके कांग्रेस के साथ रिश्तों पर सवाल खड़ा कर दिया है।
भाजपा और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी एक साथ लड़ चुनाव सकती है
चुनावों का ऐलान होने के बाद भाजपा भी जम्मू-कश्मीर की रीजनल पार्टी और निर्दलीय नेताओं को अपने साथ लाने की कोशिशें कर रही हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (17 अगस्त) को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के उपाध्यक्ष चौधरी जुल्फकार अली से मुलाकात की। अटकलें हैं कि जुल्फकार बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।
आजाद सहित कांग्रेस में 6 नेता शामिल हो सकते हैं
आजाद के अलावा कांग्रेस में 5 अन्य नेता भी शामिल हो सकते हैं। DPAP नेता और पूर्व वित्त मंत्री ताज मोहिउद्दीन, पूर्व विधायक गुलजार अहमद वानी, पूर्व विधायक पीर मंसूर, पूर्व विधायक मोहम्मद अमीन भट भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इनके अलावा महबूबा मुफ्ती के चचेरे भाई सज्जाद मुफ्ती और अपनी पार्टी के महासचिव हिलाल शाह भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
जुल्फकार अली पेशे से एक वकील हैं। उन्होंने 2008 और 2014 के विधानसभा चुनावों में PDP के टिकट पर राजौरी जिले की दरहाल विधानसभा से चुनाव लड़ा था। दोनों में जीत हासिल हुई थी। 2015 से 2018 तक वे महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली PDP-BJP गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे। लेकिन BJP के गठबंधन सरकार से बाहर होने के बाद जून 2018 में गठबंधन की ये सरकार गिर गई थी।
कांग्रेस ने तारिक हामिद कर्रा को नया चीफ बनाया
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तारीख के ऐलान के दिन (16 अगस्त) ही कांग्रेस ने विकार रसूल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया था। पार्टी ने तारिक हामिद कर्रा को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तारा चंद और रमन भल्ला को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया।
जम्मू-कश्मीर में तीन फेस में वोटिंग होगी
इलेक्शन कमीशन ने 16 अगस्त को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है। राज्य में तीन फेज में वोटिंग होगी। यहां विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं। बहुमत का आंकड़ा 46 है। चुनाव आयोग के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में चुनाव के पहले फेज के लिए गजट नोटीफिकेशन 20 अगस्त से शुरू हो जाएगा। पहले फेज के नॉमीनेशन के लिए आखिरी तारीख 27 अगस्त होगी।
जम्मू-कश्मीर: नई सरकार का कार्यकाल 6 साल की जगह 5 साल का होगा
सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2024 तक जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने का आदेश दिया था। राज्य से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव होगा। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटाया था। इसके बाद से यहां LG मनोज सिन्हा प्रशासक हैं। चुनाव के बाद नई सरकार का कार्यकाल 6 साल की जगह 5 साल का होगा।
