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पंजाब में अब नहीं होंगे विधानसभा उपचुनाव:EC ने नहीं की कोई घोषणा, 4 सीटों के विधायक सांसद बनने के बाद दे चुके इस्तीफा

चुनाव आयोग ने आज यानी शुक्रवार को पंजाब में विधानसभा उपचुनावों की घोषणा नहीं की है। उम्मीद थी कि चुनाव आयोग आज पंजाब की 4 विधानसभा सीटों पर भी उपचुनावों की घोषणा करेगा। वहीं, चुनाव आयोग ने पंजाब के पड़ोसी राज्यों जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजा दिया है।

पंजाब में डेरा बाबा नानक, बरनाला, चब्बेवाल और गुरदासपुर की गिद्दड़बाहा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। डेरा बाबा नानक, गिद्दड़बाहा और चब्बेवाल सीटें कांग्रेस के पास थीं। लेकिन पूर्व विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के सांसद बनने के बाद ये सीटें खाली हो गई थीं।

चब्बेवाल सीट से पूर्व सांसद डॉ. राज कुमार आप में शामिल होने के बाद सांसद का चुनाव जीते थे। वहीं, बरनाला सीट आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर के पास थी। उन्होंने सांसद का चुनाव जीतने के बाद सीट से इस्तीफा दे दिया था।

पंजाब की राजनीति में हलचल शुरू

उप-चुनावों की घोषणा चाहे नहीं हुई, लेकिन पंजाब की राजनीति में हलचल शुरू हो चुकी है। कांग्रेस डेरा बाबा नानक, गिद्दड़बाहा और चब्बेवाल सीट को हाथ से खोना नहीं चाहती। लेकिन डॉ. राज कुमार के सांसद बनने के बाद AAP और कांग्रेस की कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। वहीं, बरनाला को मुख्यमंत्री अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते।

जालंधर उप-चुनाव में जीत दर्ज की

पंजाब में लोकसभा 2022 चुनाव के बाद ये दूसरा उप-चुनाव है। इससे पहले जालंधर वेस्ट में उप-चुनाव हो चुके हैं, जो लोकसभा 2024 के चुनावों के साथ ही हुए थे। दरअसल, जालंधर वेस्ट से विधायक शीतल अंगुराल ने लोकसभा चुनावों से पहले AAP को छोड़ भाजपा जॉइन कर ली थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया था।

AAP ने इस सीट पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत हासिल की। कैंडिडेट मोहिंदर भगत ने इन उप-चुनावों में 37,325 वोटों से जीत प्राप्त की।

कुनबा बढ़ा रही AAP
AAP ने लोकसभा 2022 के चुनावों में 92 सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसके बाद भी AAP लगातार अपना कुनबा बढ़ा रही है। बीते दिन ही शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बंगा से दो बार विधायक रहे डॉ. सुखविंदर सिंह सुखी आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए हैं।

फिलहाल उन्होंने अभी तक अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा नहीं दिया है। अकाली दल की तीन सीटें हैं और उन्हें पार्टी बदलने के बाद इस्तीफा देना होगा या नहीं, इसके लिए वे अभी कानूनी राय ले रहे हैं।

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