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पहाड़ काटकर बनाई रेलवे सुरंग, 14 साल लग गए:कभी फंड की किल्लत, कभी बारिश बनी परेशानी, आधा ट्रैक जमीन से 75 फीट नीचे

पहाड़ काटकर बनाई रेलवे सुरंग, 14 साल लग गए:कभी फंड की किल्लत, कभी बारिश बनी परेशानी, आधा ट्रैक जमीन से 75 फीट नीचे

जयपुर6 घंटे पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

साल 2012: सुरंग की खुदाई का काम चल रहा था। कर्मचारी लंच कर रहे थे। अचानक तेज आवाज आई। कर्मचारी खाना छोड़कर दौड़कर वहां पहुंचे। हर तरफ मिट्‌टी ही मिट्टी। जेसीबी और एलएनटी मशीन गायब थी। पांच दिन तक लगकर मजदूरों ने मिट्‌टी हटाई तो जेसीबी और एलएनटी

साल 2014: इतनी बारिश हुई कि सुरंग का काम दो साल तक रोकना पड़ा। 2016 में दोबारा काम शुरू हुआ तो सिर्फ पानी निकालने में 2 महीने लग गए। ट्रैक ऐसा है कि ट्रेन कुछ वक्त जमीन से 75 फीट नीचे और कुछ वक्त 75 फीट ऊपर चलती है।

ऐसी ही कई चुनौतियों का सामना करके तैयार हुई है दौसा से गंगापुर सिटी रेलवे लाइन के बीच सवा 2 किमी लंबी (डिडवाना से इंदावा) सुरंग। पहाड़ काटकर सुरंग बनाने में 14 और रेलवे ट्रैक तैयार करने में 28 साल लग गए।

राजस्थान की सबसे लंबी सुरंग की पूरी रिपोर्ट पढ़िए…

रेलवे टनल सवा दो किमी लंबी है। 2010 में टनल का काम शुरू हुआ था।

दौसा के पूर्व सांसद राजेश पायलट ने लोगों को लालसोट से जयपुर और गंगापुर सिटी रेलवे लाइन का सपना दिखाया था। दौसा से गंगापुर सिटी तक रेलवे लाइन की 95 किलोमीटर की दूरी है।

रेलवे लाइन का सर्वे 1996 में हुआ था। ट्रैक चालू करने में सबसे बड़ी समस्या थी- दौसा से आगे डीडवाना में अरावली की पहाड़ियां।

इन पहाड़ियों से 8 किलोमीटर रास्ते को काट कर रेलवे ट्रैक बनाना बड़ी चुनौती थी। सर्वे के बाद रेलवे लाइन बनाकर चालू करने में पूरे 28 साल लग गए। जल्द ही अब इस रूट को इलेक्ट्रिफाइड (विद्युतीकरण) किया जाएगा।

टनल बनाने के दौरान कई अड़चनें आईं
डीडवाना और लालसोट (दौसा) के बीच टनल का शिलान्यास 9 फरवरी 2010 में हुआ। टेंडर प्रक्रिया जारी कर काम शुरू किया गया। वालेचा कंस्ट्रक्शन को टेंडर दिया गया था। कंपनी ने काम शुरू करवा दिया। वालेचा ने काम शुरू करने के बाद एसके कंस्ट्रक्शन कंपनी को आगे काम करने का सबटेंडर दे दिया था। वालेचा कंपनी ने 2014 तक टनल का काम किया। कंपनी के पास फंड की काफी दिक्कतें होने लगी। तब रेलवे ने कंपनी को टर्मिनेट कर दिया।

टनल का काम रोक दिया गया था। रेलवे अधिकारियों का कहना था कि वालेचा कंपनी से काम नहीं हो पा रहा था। ऐसे में नए सिरे से टेंडर जारी किया गया था।

इतनी मिट्‌टी ढही कि जेसीबी दब गई
टनल में काम करना काफी मुश्किल था। 2012 में कर्मचारियों का लंच टाइम था। नीचे जेसीबी और एलएनटी मशीनें खड़ी थीं। अचानक मिट्‌टी भरभरा कर गिर गई। मजदूर आवाज सुनकर दौड़कर आए।

जेसीबी और एलएनटी मशीन कहीं दिखाई नहीं दी। 5 दिन लगे मिट्‌टी हटाने में, तब मशीनें निकाली जा सकीं।

2014 की बारिश पड़ी भारी, दो साल तक भरा रहा पानी
वालेचा कंपनी के पास 2014 में टेंडर था। उस दौरान मानसून में भारी बारिश से टनल में पानी भर गया था। काम रोकना पड़ा। पानी निकालने के सारे इंतजाम फेल हो गए। दो साल तक टनल के अंदर पानी भरा रहा। 2016 में टनल का टेंडर फिर से जारी हुआ। अब TCLऔर UTM के जॉइंट वेंचर के साथ नया टेंडर जारी हुआ।

कंपनी ने जैसे-तैसे करके पानी को मोटर पंप के जरिए बाहर निकाला। इसके बाद अंदर भरा कीचड़ किसी मुसीबत से कम नहीं था। दो महीने लगे पानी और कीचड़ साफ करने में।

2014 में टनल में इतना बारिश का इतना पानी भर गया था कि 2 साल तक काम बंद करना पड़ा।

कंपनी बैंक करप्ट हो गई, जीएसटी के नोटिस मिले
TCLऔर UTM दोनों को NCLT के नोटिस मिले। कंपनी बैंक करप्ट हो गई। जीएसटी बकाए के नोटिस रेलवे के पास आने लगे। कई बार रेलवे ने बकाया चुकाया। जीएसटी के बिल रेलवे ने ही जमा कराए थे।

फंड की वजह से कई बार काम बंद हुआ
रेलवे के पास फंड की कमी की वजह से कई बार दौसा से गंगापुर सिटी प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा था। रेलवे पर स्थानीय नेताओं का भी प्रोजेक्ट को पूरा कराने का दबाव था। 2017 में भी काम को फंड की वजह से बंद कराना पड़ा था। कई स्टेशन बनने के बाद खंडहर के रूप में बदल गए थे। फंड आने के बाद फिर से काम शुरू कराया गया। कोरोनाकाल में भी काम बंद करना पड़ा। बाद में दोबारा से रिपेयर कराया गया था।

डीडवाना से टनल तक जमीन से 75 फीट नीचे, टनल के बाद जमीन से 75 फीट ऊपर
22 मील पर अरावली की पहाड़ियां काफी ऊंचाई पर थी। दूसरी ओर सामान्य स्तर पर काफी गहराई थी। ऐसे में पहाड़ी के दोनों ओर से मिलान करना बड़ी चुनौती थी। तब रेलवे ने डीडवाना स्टेशन से टनल तक ढलान बनाना शुरू कर दिया था। टनल तक जमीन से करीब 75 फीट तक की गहराई है। टनल के अंदर बैलेंस बनाकर रखा गया। टनल के बाद लालसोट की ओर ऊंचाई को बढ़ाना शुरू किया गया। टनल से लेकर लालसोट तक जमीन से 75 फीट की ऊंचाई है। ऐसे में 150 फीट का अंतर आ गया था, जो बहुत ही बड़ा चैलेंज था। डीडवाना की ओर ट्रेन टनल से निकल कर आगे बढ़ती है। इसके बाद यह अंडरग्राउंड (जमीन के अंदर) चलती है। आग ट्रेन टनल में प्रवेश कर जाती है। यहां से बाहर निकले के बाद ट्रेन अचानक बहुत ऊंचाई पर चलती है।

डीडवाना से टनल तक ट्रैक जमीन से 75 फीट नीचे है। वहीं टनल से लालसोट तक ट्रैक जमीन से 75 फीट ऊपर है।

टनल में नहीं भरेगा पानी
रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ ने पूरे प्रोेजेक्ट पर नजर रखते हुए पूरा कराया। फंड आने पर पिछले कुछ सालाें में तेजी से काम हुआ। टनल के अंदर जलभराव नहीं हो, इसके लिए भी इंतजाम किए गए हैं। सीमेंटेड ब्लॉक बनाए गए हैं। टनल के अंदर दोनों ओर नालियां बनाई गई हैं। बरसात होने अगर रिसाव से पानी टनल में आता है तो नालियों के सहारे बाहर निकल जाएगा।

दौसा से गंगापुरसिटी तक 13 स्टेशन, 8 किलोमीटर का एरिया बड़ी चुनौती
उत्तर पश्चिम रेलवे के CPRO शशि किरण बताते हैं- दौसा से लेकर गंगापुरसिटी तक 13 स्टेशन हैं। रेलवे के इंजीनियरों ने एक मिसाल पेश करते हुए टनल का काम पूरा कराया। टनल को बनाना भी एक बड़ा चैलेंज था।

टनल से पहले करीब 3 किलोमीटर और टनल के बाहर करीब 3 किलोमीटर का एरिया भी बेहद खास था। टनल के अंदर 2.171 किलोमीटर का काम हुआ था। ऐसे में 8 किलोमीटर का एरिया काफी मुश्किलों से भरा था। अगर टनल नहीं होती तो इस रूट को काफी पहले ही पूरा कर लिया जाता।

उत्तर पश्चिम रेलवे के CPRO शशि किरण का कहना है कि टनल की चुनौतियां नहीं होतीं तो ट्रैक का काम काफी पहले पूरा हो जाता।

160 की स्पीड से दौड़ सकेंगी ट्रेनें
पूरे रूट को इस तरीके से बनाया गया है कि 160 की स्पीड से भी गाड़ियों को चलाया जा सकेगा। हालांकि अभी नॉर्मल स्पीड 100 रखी गई है। रेलवे की ओर से किसानों से अनाजों को बड़े शहरों तक ले जाने के लिए व्यवस्था की जा रही है। एक अलग से स्टोरेज के लिए शेड बनाए जा रहे हैं। इसी शेड से अनाजों को अलग-अलग शहरों को भेजा जाएगा। इसके लिए बाकायदा बुकिंग की जाएगी। इस रूट पर मालगाड़ी चलाई जाएंगी, जो दिल्ली, मुंबई अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों को आपस में कनेक्ट करेंगी।

अब भास्कर के साथ कीजिए इस खूबसूरत टनल का सफर
जयपुर से भास्कर टीम पहले दौसा पहुंची। यहां से डीडवाना होते हुए लालसोट पहुंचे। रिमझिम बारिश का दौर चल रहा था। स्टेशन तक पहुंचने का रास्ता कच्चा था। जगह-जगह पानी भरा था। हम कच्चे रास्ते से लालसोट स्टेशन पर पहुंचे। बारिश के कारण आम दिनों की तुलना में कम भीड़ थी। ट्रेन थोड़ी लेट थी। स्टेशन पर लोग ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। करीब 5 बजे ट्रेन आने का अनाउंसमेंट हुआ। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों से बात की। बोले- ट्रैक चालू होने से फायदा हुआ है। अभी एक ट्रेन है। अगर सुबह-शाम के समय में दो ट्रेन चल जाए तो दौसा से जयपुर आने-जाने में काफी सहूलियत मिलेगी। भास्कर टीम ने भी लालसोट से दौसा तक ट्रेन में सफर किया। ट्रेन धीरे-धीरे टनल से होकर निकली तो यात्री रोमांचित हो गए।। युवा ट्रेन से टनल का वीडियो बना रहे थे, सेल्फी ले रहे थे।

अभी डीएमयू चल रही, जल्द चलेंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां
रूट पर अभी डीएमयू इंजन चल रहा है। डीएमयू ट्रेन में दोनों ओर इंजन लगा होता है। ऐसे में इंजन बदलने की दिक्कत नहीं होती है। नॉर्मल इंजन वाली ट्रेन चलाने पर इंजन को बदल कर आगे लगाना होता है। इसमें 30 से 45 मिनट का समय लग जाता है। इससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

दौसा से गंगापुर सिटी तक पूरे रूट को रेलवे जल्द ही इलेक्ट्रिफाइड (विद्युतीकरण) करेगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत काम शुरू कर दिया गया है। इलेक्ट्रिफाइड होने पर काफी समय भी बचेगा। जयपुर से सीधे गंगापुर सिटी होते हुए दिल्ली व मुंबई तक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।

सहयोग – जयपुर से शिवम ठाकुर और लालसोट से महेश बोहरा

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