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सेक्स स्कैंडल, SC की कर्नाटक सरकार को फटकार:कहा- मामले के राजनीतिकरण की बजाय सबूतों पर जोर दें, भवानी रेवन्ना से भी जवाब मांगा

सेक्स स्कैंडल, SC की कर्नाटक सरकार को फटकार:कहा- मामले के राजनीतिकरण की बजाय सबूतों पर जोर दें, भवानी रेवन्ना से भी जवाब मांगा

नई दिल्ली3 घंटे पहले

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 जुलाई) को पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े सेक्स स्कैंडल मामले में कर्नाटक सरकार को चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार आपराधिक मामले की जांच का राजनीतिकरण न करे

सुप्रीम कोर्ट ने ये बात प्रज्वल की मां भवानी रेवन्ना को कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ विशेष जांच दल (SIT) की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। भवानी पर यौन उत्पीड़न की शिकार एक महिला की किडनैपिंग का मामला दर्ज किया गया है।

राजनीति और अपराध को अलग अलग रखने की जरूरत – सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान SIT के वकील कपिल सिब्बल ने भवानी को दी गई जमानत को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले और राजनीतिक उद्देश्यों को अलग-अलग रखने की जरूरत है। बेंच ने हाईकोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें भवानी की उम्र और उनके खिलाफ सबूतों की कमी का हवाला दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से कहा, राजनीतिक कारणों को छोड़ दें। हाईकोर्ट के बताए कारणों को देखें। आरोपी एक महिला है, जिसकी उम्र 55 साल है। उसके बेटे पर गंभीर आरोप हैं। वह विदेश भाग गया था और बाद में पकड़ा गया। इसमें मां की क्या भूमिका होगी? कोर्ट ने कहा कि मामले में भवानी का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं था। ऐसे में उनकी अपराध में भूमिका पर भी सवाल उठता है।

इस पर जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने उन बयानों का हवाला दिया जिनसे पता चलता है कि पीड़ित महिला का अपहरण भवानी और उसके परिवार के निर्देश पर किया गया था। इस पर दो जजों की बेंच ने सबूतों के अभाव की बात को दोहराया। साथ ही कहा कि कोर्ट के सामने बयान को पुख्ता करने वाले सबूत पेश करे।

‘धारणाओं की बजाय ठोस सबूतों पर जोर दिया जाना चाहिए’
सिब्बल ने भवानी रेवन्ना के अपराध में शामिल होने की बात पर जोर देते हुए कहा कि एक मां को अपने बेटे के कार्यों के बारे में पता होता है। यह मानवीय आचरण है। जिस पर बेंच ने कहा कि धारणाओं की बजाय ठोस सबूतों पर जोर दिया जाना चाहिए। हम एक गंभीर आपराधिक मामले को सुन रहे हैं। ऐसे में परिवार और मानवीय आचरण जैसी चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।

कोर्ट ने SIT की अपील पर नोटिस जारी कर भवानी से जवाब मांगा है। साथ ही मामले को राजनीतिक कारणों की बजाय कानूनों तर्कों पर सुलझाने की सलाह भी दी।

इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने 18 जून को भवानी को अपहरण मामले में अग्रिम जमानत दे दी थी। इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने भवानी को मास्टरमाइंड बताया था।

क्या है कर्नाटक सेक्स स्कैंडल

  • प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ उनके घर में काम करने वाली महिला ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी। 26 अप्रैल को बेंगलुरु में पब्लिक प्लेसेस में कई पेन ड्राइव मिलीं।
  • दावा किया गया कि पेन ड्राइव में 3 हजार से 5 हजार वीडियो हैं, जिनमें प्रज्वल को कई महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न करते देखा गया। महिलाओं के चेहरे भी ब्लर नहीं किए गए।
  • मामला बढ़ने पर राज्य सरकार ने SIT बनाई। प्रज्वल के खिलाफ रेप, छेड़छाड़, ब्लैकमेलिंग और धमकी देने के आरोपों समेत तीन FIR दर्ज की गईं।
  • SIT ने जांच में खुलासा किया कि प्रज्वल ने 50 से ज्यादा महिलाओं का सेक्शुअल हैरेसमेंट किया था। इनमें 22 साल से 61 साल तक की महिलाएं हैं।
  • 50 में से करीब 12 महिलाओं से जबर्दस्ती संबंध बनाए गए, यानी उनका रेप हुआ। बाकी महिलाओं को अलग-अलग तरह का लालच देकर सेक्शुअल फेवर लिया।
  • प्रज्वल ने किसी को सब-इंस्पेक्टर, किसी को तहसीलदार तो किसी को फूड डिपार्टमेंट में नौकरी दिलवा दी।

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