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तीसरा फेज, 11 राज्यों की 93 सीटों पर वोटिंग कल:MP में मामा, महाराजा और राजा की किस्मत दांव पर; महाराष्ट्र में ननद-भौजाई मैदान में

तीसरा फेज, 11 राज्यों की 93 सीटों पर वोटिंग कल:MP में मामा, महाराजा और राजा की किस्मत दांव पर; महाराष्ट्र में ननद-भौजाई मैदान में

नई दिल्ली7 घंटे पहले
तीसरे चरण में गुजरात की गांधीनगर सीट से गृह मंत्री अमित शाह, यूपी के मैनपुरी से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की सीट पर वोटिंग होगी।

लोकसभा चुनाव के तीसरे फेज में मंगलवार (7 मई) को 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 93 सीटों पर वोटिंग होगी।

पहले इस फेज में 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 95 सीटें थीं, लेकिन 21 अप्रैल को सूरत से कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा रद्द होने और 8 कैंडिडेट के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा के मुकेश दलाल निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।

वहीं जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम की वजह से अनंतनाग-राजौरी सीट का चुनाव टाल दिया गया है। अब यहां छठे फेज में 25 मई को वोट डाले जाएंगे।

इसके अलावा मध्य प्रदेश की बैतूल सीट से बसपा प्रत्याशी के निधन के बाद सेकेंड फेज (26 अप्रैल) को होने वाली वोटिंग 7 मई को शिफ्ट कर दी गई।

मध्य प्रदेश की तीन सीटों- विदिशा से शिवराज सिंह चौहान (मामा), गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया (महाराजा) और राजगढ़ से दिग्विजय सिंह (राजा) की किस्मत दांव पर है।

इसके अलावा महाराष्ट्र की अमरावती सीट पर शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और डिप्टी CM अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार यानी ननद-भौजाई के बीच सीधा मुकाबला है।

चुनाव आयोग के अनुसार, तीसरे फेज में कुल 1352 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। इनमें 1229 पुरुष और 123 (9%) महिला हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, 244 कैंडिडेट्स आपराधिक छवि के हैं। 392 कैंडिडेट्स के पास एक करोड़ या उससे ज्यादा की संपत्ति हैं।

तीसरे चरण में 7 केंद्रीय मंत्रियों और 4 पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर…

244 प्रत्याशियों पर आपराधिक केस, 172 पर हत्या, बलात्कार जैसे केस
ADR की रिपोर्ट बताती है, 244 (18%) उम्मीदवारों पर आपराधिक केस हैं। इनमें से 172 (13%) पर हत्या, अपहरण, बलात्कार जैसे गंभीर मामले भी शामिल हैं। 5 उम्मीदवारों पर हत्या और 24 पर हत्या की कोशिश के मामले दर्ज हैं।

38 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं। इनमें से दो पर बलात्कार के मामले चल रहे हैं। वहीं, 17 कैंडिडेट्स पर हेट स्पीच से जुड़े मामले दर्ज हैं।

तीसरे चरण में 392 उम्मीदवार करोड़पति
ADR के मुताबिक, तीसरे फेज के 1352 उम्मीदवारों में से 392 यानी 29% उम्मीदवार करोड़पति हैं। इनके पास औसतन 5.66 करोड़ रुपए की संपत्ति है। वहीं, पांच उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति शून्य बताई है।

महाराष्ट्र की कोल्हापुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी इरफान अबूतालिब चांद की संपत्ति सबसे कम केवल 100 रुपए है। वहीं, गुजरात की बारडोली सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रत्याशी रेखाबेन हरसिंहभाई चौधरी ने अपनी संपत्ति 2000 रुपए घोषित की है।

647 उम्मीदवारों पर कर्जदारी
तीसरे चरण के 647 (48%) प्रत्याशियों पर उधारी चल रही है। मध्य प्रदेश की मुरैना सीट से बसपा प्रत्याशी रमेश गर्ग के ऊपर सबसे ज्यादा देनदारी है। हैरान करने वाली बात यह है कि उनके ऊपर 351.61 करोड़ रुपए की देनदारी है, जबकि उनकी कुल संपत्ति करीब 16.47 करोड़ रुपए की है।

सबसे ज्यादा सालाना आय के मामले में महाराष्ट्र की माढा सीट से भाजपा के रंजीतसिंह हिंदूराव नाइक निंबालकर टॉप पर हैं। उनकी कुल वार्षिक आय करीब 44.57 करोड़ रुपए है। इन्होंने व्यापार और कृषि को अपनी आय का स्रोत बताया है।

कुल 1352 उम्मीदवारों में से 591 (44%) उम्मीदवार ग्रेजुएट हैं, जबकि 19 उम्मीदवारों ने खुद को निरक्षर बताया है। वहीं, 411 (30%) उम्मीदवारों की आयु 25 से 40 साल और 228 (17%) की आयु 61 से 80 साल के बीच है, जबकि एक प्रत्याशी की आयु 84 साल है।

तीसरे चरण की 14 हॉट सीटों पर एक नजर…

1. गांधीनगर, गुजरात

भाजपा की ओर से देश के गृह मंत्री अमित शाह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर 30 सालों से भाजपा का कब्जा है। भाजपा के कई दिग्गज नेता 1989 से यहां से जीत रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार अमित शाह ने यहां से चुनाव लड़ा और करीब साढ़े पांच लाख वोटों से जीत हासिल की।

वहीं, कांग्रेस ने इस सीट से पार्टी की सचिव सोनल रमणभाई पटेल को मैदान में उतारा है। वे मुंबई और पश्चिमी महाराष्ट्र में पार्टी की सह प्रभारी हैं। साथ ही गुजरात महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वे कह चुकी हैं कि उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता के खिलाफ चुनाव लड़ने में बिल्कुल भी हिचक नहीं है।

2. पोरबंदर, गुजरात

महात्मा गांधी की जन्मस्थली से भाजपा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को उम्मीदवार बनाया है। पेशे से वेटरनरी डॉक्टर मंडाविया गुजरात से दो बार के राज्यसभा सांसद हैं। चुनाव प्रचार के लिए केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र में करीब 150 किमी. की पदयात्रा की है। भीड़भाड़ भरे रोड शो से दूरी बनाए रखते हुए उन्होंने प्रचार का यह पुराना तरीका अपनाया है।

इस सीट पर पाटीदार समुदाय का खासा प्रभाव है। यही कारण है कि कांग्रेस ने पूर्व विधायक और पाटीदार नेता ललित वसोया को अपना उम्मीदवार बनाया है। पाटीदार आरक्षण आंदोलन में सक्रीय रहे वसोया 2019 में भी कांग्रेस के प्रत्याशी थे, लेकिन भाजपा के रमेशभाई धाडुक से हार गए थे।

3. गुना, मध्य प्रदेश

ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर अपनी पारंपरिक सीट से चुनाव मैदान में हैं। वे 2019 में अपने पूर्व सहयोगी केपी सिंह से चुनाव हार गए थे। हालांकि, तब वे कांग्रेस में थे। हार से सबक लेते हुए सिंधिया ने इस बार मैदान में खूब मेहनत की। उनका बेटा और पत्नी भी उनके साथ चुनाव प्रचार में लगे थे।

वहीं, कांग्रेस ने सिंधिया परिवार के राजनीतिक विरोधी राव यादवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। राव 2023 तक भाजपा में थे। उनके पिता मुंगावली सीट से तीन बार भाजपा के विधायक रहे हैं। उन्होंने माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था। यादवेंद्र 2023 में कांग्रेस के टिकट पर सिंधिया के करीबी बृजेंद्र सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

4. विदिशा, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में मामा के नाम से मशहूर शिवराज सिंह चौहान करीब 20 साल बाद दोबारा विदिशा से चुनाव लड़ रहे हैं। 2005 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले वे यहां से पांच बार सांसद चुने जा चुके थे। वे अभी यहां की बुधनी विधानसभा सीट से विधायक हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं।

मामा के सामने कांग्रेस ने ‘दादा’ को उतारा है। दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु सिंह स्थानीय नेता हैं और दादा के उपनाम से जाने जाते हैं। भानु 1980 और 1984 में दो बार यहां से सांसद रह चुके हैं। वे मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष तथा 1980-84 तक रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं।

5. राजगढ़, मध्य प्रदेश

दिग्विजय सिंह करीब 32 साल बाद दोबारा राजगढ़ सीट पर वापसी की है। 1991 में दिग्विजय यहां से सांसद बने थे, लेकिन 1993 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इस्तीफा दे दिया था। तब से 2004 तक उनके भाई लक्ष्मण सिंह इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों से सांसद रहे। 2019 में दिग्विजय सिंह ने भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा से हार गए।

वहीं, दूसरी तरफ भाजपा ने दो बार से सांसद रोडमल नागर को तीसरी बार भी मैदान में उतारा है। पिछले दो चुनावों में आसानी से जीत हासिल करने वाले नागर के लिए इस बार चुनौती कड़ी हैं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कांग्रेस इतने कद्दावर नेता को उतारेगी। इसी वजह से नागर प्रधानमंत्री मोदी की छवि के सहारे चुनाव लड़ रहे हैं।

6. बारामती, महाराष्ट्र

बारामती सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प है। पिछले साल एनसीपी में दो फाड़ होने के बाद यहां इमोशनल मुद्दे पर चुनाव लड़ा जा रहा है। चुनाव में शरद पवार की बेटी और बहू के आमने-सामने होने और परिवार टूटने का मुद्दा बड़ा है। मोदी की गारंटी और राम मंदिर जैसे मुद्दे यहां गायब हैं। एक तरफ सुप्रिया सुले एनसीपी (शरद पवार गुट) से मैदान में हैं तो उनकी भाभी और महाराष्ट्र के डिप्टी CM की पत्नी सुनेत्रा पवार एनसीपी से उन्हें टक्कर दे रही हैं।

1960 में भी ऐसा ही मुकाबला देखने को मिला था, जब शरद पवार अपने बड़े भाई वसंतराव के खिलाफ उतरे थे। तब उनके भाई चुनाव हार गए थे। यह सीट एनसीपी का गढ़ मानी जाती है। शरद पवार यहां से छह बार सांसद रह चुके हैं। अजीत पवार भी यहां से एक बार सांसद रह चुके हैं, जबकि पिछले तीन बार से सुप्रिया यहां से सांसद चुनी जा रही हैं।

7. सातारा, महाराष्ट्र

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