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बार सजा-ए-मौत, 11 साल बाद बरी:रेप-हत्या के केस में एमपी की कोर्ट का फैसला; जिस डीएनए रिपोर्ट पर फांसी, उसी से दोषमुक्त

11 साल पहले रेप और हत्या के मामले में अनोखीलाल को फांसी की सजा सुनाई गई थी। 21 मार्च 2024 को वो जेल से बाहर आ चुका है।

साल 2013। खंडवा में 9 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या। कोर्ट चालान पेश होने के एक महीने में आरोपी को फांसी की सजा सुना देती है। फैसला पुष्टि के लिए जबलपुर हाई कोर्ट जाता है। हाई कोर्ट ने भी फैसला यथावत रखा। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर उसी सेशन अदालत में सुनवाई होती जिसने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर फांसी की सजा सुनाई थी। कोर्ट इस बार भी फांसी की सजा सुनाती है। मामला दोबारा हाई कोर्ट पहुंचता है। यहां से आदेश मिलते हैं तो उसी सेशन कोर्ट में तीसरी बार सुनवाई होती है। इस बार वही अदालत उसी पुरानी डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी कर देती है।

मध्यप्रदेश में पॉक्सो एक्ट के पहले मामले में 11 साल चली कानूनी लड़ाई का यही सार है।

आरोपी आनोखीलाल को बरी करने का फैसला इसी महीने 19 मार्च को आया है। वो 21 मार्च को जेल से रिहा भी हो चुका है।

मासूम के परिवार वाले पूछ रहे हैं कि उनकी बेटी का कातिल कौन है? वे इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

साल 2012 में दिल्ली के निर्भया हत्याकांड के बाद उसी साल देश में पॉक्सो एक्ट (बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम) लागू हुआ था।

सवाल उठता है कि दो बार फांसी की सजा मिलने के बाद अनोखीलाल तीसरी बार कैसे बरी हो गया? क्या पुलिस की जांच में कोई कमी थी? तीसरी बार कोर्ट के सामने ऐसे कौन से नए सबूत पेश किए गए, जिसकी वजह से कोर्ट ने माना कि अनोखीलाल दोषी नहीं है। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले की पड़ताल की…।

कोर्ट में आरोपी के बरी होने की कहानी जानने से पहले इस जघन्य वारदात की कहानी जानना जरूरी है। इसी से शुरुआत करते हैं…

30 जनवरी 2013 को गांव से गायब हो गई थी मासूम

30 जनवरी 2013 को खंडवा जिले के छैगांव माखन थाने में 45 साल का एक आदिवासी अपनी 9 साल की बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा। उसने बताया कि पड़ोस में रहने वाले 21 साल के युवक अनोखीलाल ने बेटी को 20 रुपए देकर दुकान पर बीड़ी लाने के लिए भेजा था। इसके बाद से वह घर नहीं लौटी।

पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तफ्तीश के लिए पुलिस पीड़ित के गांव, सुरगांव जोशी पहुंची। यहां पूछताछ पर पता चला कि बच्ची को आखिरी बार अनोखीलाल के साथ ही देखा गया था। इसी आधार पर पुलिस ने 31 जनवरी 2013 को अनोखीलाल के खिलाफ बच्ची के अपहरण का मामला दर्ज किया। उसकी तलाश की तो वो गायब था। परिवार और गांववालों के साथ पुलिस मासूम की तलाश करती रही। 1 फरवरी 2013 को मासूम की लाश उसी गांव के रहने वाले रघुनाथ गुर्जर के खेत में मिली।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई रेप और हत्या की पुष्टि

पुलिस ने मासूम की लाश बरामद की तो उसके पिता ने उसकी पहचान की। लाश का मुआयना करने पर पुलिस को समझ आया कि उसके साथ रेप हुआ और फिर गला दबाकर हत्या की गई थी। क्योंकि..

  • बच्ची के अंडरवियर पर खून के धब्बे पाए गए थे।
  • वजाइना पर खून जमा था। हाइमन और वजाइना का हिस्सा फटा हुआ था।
  • पीठ और छाती पर खरोंच के निशान थे। गर्दन का हिस्सा नीला पड़ गया था।
  • उसके साथ अप्राकृतिक संबंध की भी पुष्टि हुई थी।
  • पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई कि उसकी गला दबाकर हत्या की गई है।

3 बाद गिरफ्तार हुआ आरोपी, रेप और हत्या करना कबूल किया था

जन मानस के भारी दबाव के बीच छैगांव माखन थाने की पुलिस ने संदेही अनोखीलाल को 4 फरवरी 2013 को भेरुखेड़ा गांव के रहने वाले छज्जू पटेल के खेत से गिरफ्तार किया था। पुलिस आरोपी को लेकर घटनास्थल पर पहुंची। उसी की निशानदेही पर भीकनगांव के रहने वाले अखिलेश की दुकान से उसका मोबाइल जब्त किया।

इस केस के इन्वेस्टिगेशन अधिकारी ने अपने चालान में जिक्र किया है कि रिमांड के दौरान अनोखीलाल ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा था कि उसी ने बनवारी लाल के खेत में बच्ची से रेप किया और रघुनाथ के खेत में गला दबाकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने उसका मेडिकल कराया तो डॉक्टर ने रिपोर्ट में लिखा कि गिरफ्तारी के वक्त अनोखीलाल के गले के दाहिने व बाईं ओर स्क्रैच मार्क थे। गले के अलावा कहीं चोट के निशान नहीं थे।

तत्कालीन थाना प्रभारी के मिश्रा ने घटनास्थल से माचिस, बिस्किट का फटा पैकेट और 5 रुपए भी जब्त किए थे। पुलिस ने लाश के पास मिले सबूत और संदेही अनोखीलाल के ब्लड सैंपल जांच के लिए एफएसएल भेज दिए थे।

अब यहां से शुरू होती है कोर्ट की कहानी…

14 दिन में चालान पेश किया, पुराने आपराधिक मामले भी साक्ष्य के तौर पर पेश किए

खंडवा पुलिस ने 14 दिन में विशेष कोर्ट के सामने चालान पेश कर दिया था। साथ ही अभियोजन पक्ष की तरफ से आरोपी के आपराधिक प्रवृत्ति बताने वाले दो और मामले संज्ञान में लाए गए।

पहला मामला 2010 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का था। इस मामले में धारा 377 के तहत खंडवा के सत्र न्यायाधीश ने अनोखीलाल को 6 महीने और 1 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। आधी सजा भुगतने के बाद सरकार के आदेश पर उसे रिहा कर दिया गया था। इसके अलावा 2008 में उसके खिलाफ हरदा के छिपाबड़ थाने में चोरी का केस दर्ज हुआ था।

डीएनए रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर मिली थी सजा

4 मार्च 2013 को पहली बार जब आरोपी को सजा सुनाई गई थी, तब डीएनए जांच रिपोर्ट को सबसे अहम साक्ष्य माना गया था।

  • गांव की रहने वाली कीर्तिबाई ने घटना वाले दिन आरोपी और बच्ची को उसी खेत की तरफ जाते देखा था, जहां से लाश बरामद हुई थी।
  • बच्ची के नाखून में आरोपी की चमड़ी और सिर के बालों के सैंपल की डीएनए जांच में पुष्टि हुई थी।
  • कपड़ों पर आरोपी के सीमन और पीड़िता के खून की मौजूदगी भी इसमें अहम साक्ष्य था।
  • बच्ची की मां का बयान कि आरोपी ने उसकी बेटी को दुकान पर बीड़ी व माचिस लेने भेजा था। पुलिस ने घटनास्थल पर माचिस, 5 रुपए और बिस्किट जब्त किया था।
  • इन सबूत के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए उसे 20 वर्ष कारावास, फांसी और 8 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया था।

2019 में केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 2022 में विशेष कोर्ट ने फिर सुनाई फांसी की सजा

खंडवा विशेष कोर्ट के फैसले की सूचना हाईकोर्ट को दी गई थी। हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा था। 2019 में बचाव पक्ष की तरफ से हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने खंडवा की विशेष कोर्ट को मामले में फिर से विचार करने के लिए कहा। खंडवा की विशेष कोर्ट ने 2022 में भी अनोखीलाल की फांसी की सजा बरकरार रखी थी।

अब जानिए 11 साल बाद कोर्ट से रिहा किस आधार पर हुआ…

जिस डीएनए रिपोर्ट से 2 बार अनोखी को हुई थी फांसी, उसी से दोषमुक्त हुआ

दूसरी बार फांसी की सजा मिलने के बाद बचाव पक्ष की तरफ से 2023 में हाईकोर्ट में फिर अपील की गई। हाईकोर्ट ने खंडवा कोर्ट को फिर से केस पर विचार करने के लिए कहा। इस बार केस दिल्ली की ‘प्रोजेक्ट 39A’ नाम की संस्था ने हाथ में लिया।

इस संस्था की साक्षी जैन ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनकी संस्था देश भर में ऐसे केस की मुफ्त पैरवी करती है, जिनमें फांसी की सजा सुनाई जाती है। वे कहती हैं कि इस केस से जुड़े तथ्यों और रिपोर्ट को पढ़ने के बाद पता चला कि जिस डीएनए रिपोर्ट के आधार पर अनोखी को 2 बार फांसी की सजा सुनाई गई, वो केस का समर्थन नहीं करती है।

पीड़िता के वजाइनल सैंपल में जो सीमन मिला था, वो किसी और का था। सीमन की डीएनए रिपोर्ट में ये तो लिखा था कि ये मेल सीमन है, मगर अनोखीलाल का है इसका जिक्र नहीं था। दूसरी सबसे जरूरी बात, जो डीएनए और सीरोलॉजी एक्सपर्ट हैं, उनकी गवाही पिछले दो ट्रायल में नहीं हुई थी।

इस बार हमारी संस्था की डायरेक्टर ऑफ लिटिगेशन एंड फॉरेंसिक, श्रेया रस्तोगी ने डीएनए एक्सपर्ट डॉ. पंकज श्रीवास्तव और आरएफएसएल अफसर डॉ. एसके वर्मा से क्रॉस एग्जामिनेशन किया। उनके साथ मैं, सलोनी अम्बस्ता और स्तुति राय भी थीं।

गवाही में डीएनए एक्सपर्ट ने बताया कि जो डीएनए मिला था, वो मेल डीएनए है, लेकिन वो अनोखीलाल से मेल नहीं खाता है। पुलिस ने रेफरेंस प्रोफाइल भी ठीक से तैयार नहीं की थी। जो सैंपल मिला वो किसका है इसका जिक्र ही नहीं था। इसी आधार पर अनोखीलाल को दोषमुक्त किया गया।

बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष की इन दलीलों को कोर्ट में चैलेंज किया

बालिका व आरोपी को आखिरी बार साथ देखने संबंधी साक्ष्य : दोनों को आखिरी बार देखने और शव मिलने में 36 घंटे का अंतर है। बालिका ने मृत्यु से 14 घंटे पहले भोजन किया था। ऐसे में किसी अन्य के शामिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

बालिका के हाथ में बाल मिलने संबंधी साक्ष्य : पुलिस ने बच्ची के हाथ में आरोपी के बाल मिलने के दस्तावेज पेश किए थे। आरएफएसएल अफसर डॉ. एसके वर्मा और डॉ. पंकज श्रीवास्तव के इस संबंध में अलग-अलग बयान आए। डॉ. वर्मा ने बयान दिया- बच्ची के हाथ में 8 बाल जड़ समेत पाए गए। वहीं, डॉ. पंकज ने बयान दिया- बच्ची के हाथ में 5 बाल थे, दो जड़ समेत मिले थे।

आरोपी के गले पर स्क्रैच और बच्ची के नाखून में आरोपी के त्वचा के रेशे संबंधी साक्ष्य : आरोपी मजदूरी करता है। ऐसे में खरोंच असामान्य नहीं है। बालिका के हाथ के नाखूनों में आरोपी के शारीरिक द्रव्य की मौजूदगी पाई गई है, पर प्रकरण में जब्ती पत्रक और नमूनों के सील बंद किए जाने में घोर लापरवाही बरती गई।

बच्ची की वजाइनल और एनल स्लाइड में मेल स्पर्म मिलने संबंधी साक्ष्य : बच्ची की वजाइनल और एनल स्लाइड में किसी अन्य पुरुष का सीमन पाया गया। कपड़ों पर सीमन और खून के धब्बे सबूत के तौर पर प्लांट करना बेहद आसान है।

आरोपी की अंडरवियर पर बालिका का रक्त पाए जाने संबंधी साक्ष्य : कपड़ों पर खून पाए जाने वाले सबूत को प्लांट करना आसान है, सुप्रीम कोर्ट के कई मामलों में ऐसा प्रूफ हो चुका है।

अनोखीलाल जेल से रिहा, पीड़ित के परिजन बोले, बेटी का कातिल कौन ?

पॉक्सो कोर्ट खंडवा की जज प्राची पटेल के आदेश के बाद अनोखीलाल को इंदौर सेंट्रल जेल से रिहा किया जा चुका है। कोर्ट ने इस मामले में बच्ची के परिजन को शासन से मुआवजा राशि देने का भी आदेश दिया है।

वहीं, बालिका के परिजन इस फैसले के बाद सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी बेटी का कातिल कौन है? पिता का कहना है कि मेरी बेटी के साथ रेप व हत्या हुई है, ये तो सच है। मैं इस केस को हाईकोर्ट में ले जाऊंगा।

केके मिश्रा वारदात के समय छैगांव माखन के टीआई थे। इसके बाद उनका ट्रांसफर बुरहानपुर हो गया था। 2015 में वे रिटायर हो चुके हैं।

मप्र में बच्चियों से रेप व हत्या में 28 साल पहले हुई थी फांसी

बच्चियों से रेप व हत्या मामले में अब तक प्रदेश में 42 आरोपियों को दोषी करार दिया जा चुका है। इसके बावजूद किसी को फांसी नहीं हुई। एमपी में आखिरी बार फांसी 1997 में कामता तिवारी को दी गई थी। वो भी बच्चियों से रेप व हत्या का दोषी था।

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