सुप्रीम कोर्ट ने ₹54000करोड़ की साइबर ठगी को डकैती-लूट बताया:ये रकम कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा; सरकार इस पर गाइडलाइन बनाए
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल फ्रॉड से हुई 54 हजार करोड़ की ठगी को डकैती और लूट बताया। कोर्ट ने कहा कि यह रकम कई छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इससे निपटने के लिए गाइडलाइन बनाने को कहा है।
सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि ये अपराध बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही से हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), दूरसंचार विभाग और अन्य बैंक को डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा। साथ ही गृह मंत्रालय से RBI और दूरसंचार विभाग के नियमों को देखकर चार हफ्ते में ड्राफ्ट तैयार करने को कहा है।
कोर्ट ने मामलों की जांच CBI को दी थी
कोर्ट पहले ही इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंप चुकी है। साथ ही गुजरात और दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि वे इन मामलों में CBI जांच की मंजूरी दें। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
16 दिसंबर 2025 : सुप्रीम कोर्ट बोला- पीड़ितों को मुआवजा मिले
सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन ठगी के मामलों पर पिछली सुनवाई में केंद्र से पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था। हरियाणा के बुजुर्ग दंपत्ति की शिकायत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि साइबर अपराधी इस तरीके से देश से बेहद बड़ी रकम बाहर भेज रहे हैं।
हरियाणा के बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लिया
हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपति ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने खुद को पुलिस और कोर्ट से जुड़ा दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया। ठगों ने उनका सारा पैसा ट्रांसफर करा लिया।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे अपराध सिर्फ आम साइबर फ्रॉड नहीं हैं, बल्कि न्यायपालिका के नाम, मुहर और फर्जी आदेशों का दुरुपयोग करके पूरे सिस्टम पर जनता के भरोसे पर सीधा हमला करते हैं।
इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट लगातार यह साफ कर रहा है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कोर्ट ऑर्डर और जजों के नाम का दुरुपयोग करने वाले गैंग के खिलाफ देश–व्यापी स्तर पर कड़ी कार्रवाई हो।
बैंकों, टेलिकॉम कंपनियों और IT प्लेटफॉर्म पर सख्ती
कोर्ट ने कहा कि IT इंटरमीडियरी यानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप और अन्य ऑनलाइन सर्विस देने वाली कंपनियां CBI को पूरी जानकारी और तकनीकी मदद दें। इसकी मदद से ऐसे गैंग पकड़े जा सकें जो इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर के लोगों को फंसा रहे हैं।
अदालत ने CBI को यह भी कहा है कि वह इंटरपोल की मदद ले, क्योंकि कई गैंग विदेशी लोकेशन या टैक्स हेवेन देशों से काम करते हैं और भारत के लोगों के अकाउंट से पैसे निकालते हैं।
