Headlines

सरकार बोली-वांगचुक को मेडिकल आधार पर रिहा नहीं कर सकते:सुप्रीम कोर्ट में कहा- उनकी जेल में 24 बार जांच हुई, वे पूरी तरह फिट

सोनम वांगचुक की हिरासत से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वांगचुक को फिलहाल रिहा नहीं किया जा सकता। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने सरकार से वांगचुक को मेडिकल आधार पर रिहा करने के बारे में पूछा था।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक की जेल नियमावली के तहत अब तक करीब 24 बार मेडिकल जांच हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वांगचुक पूरी तरह फिट हैं। उन्हें केवल डाइजेशन (पाचन) की समस्या और संक्रमण हुआ था, जिसका इलाज किया गया है।

मेहता ने कहा कि इस तरह की समस्या को अपवाद मानकर उन्हें रिहा किया गया तो आगे अन्य लोग भी इस तरह की मांग करेंग। उन्होंने कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, वे अभी भी कायम हैं। इसलिए स्वास्थ्य कारणों से रिहाई संभव नहीं है और ऐसा करना सही भी नहीं होगा।

24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए थे।

ये तस्वीर 26 सितंबर 2025 की है, जब सोनम को गिरफ्तार किया गया था।

मामले में हुई पिछली 3 सुनवाई:

9 फरवरी: सरकार बोली- वांगचुक को AIIMS में अच्छा इलाज मिल रहा

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया था कि सोनम वांगचुक बिल्कुल ठीक हालत में हैं। हिरासत में रहते हुए उन्हें AIIMS, जोधपुर में अच्छा इलाज मिल रहा है। वांगचुक के वकील ने कहा कि उनकी हिरासत पर फिर से विचार करने का यह सही समय है क्योंकि वह अभी भी अस्वस्थ हैं।

3 फरवरी: सरकार ने कहा- वांगचुक बॉर्डर एरिया में लोगों को भड़का रहे थे

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक को इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि वे पाकिस्तान और चीन से सटे संवेदनशील बॉर्डर इलाके में लोगों को भड़का रहे थे। तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत का आदेश देने से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया ग

2 फरवरी: सरकार बोली- वांगचुक लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश बनाना चाहते थे

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति को और जहर उगलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। तुषार मेहता ने कहा था कि वांगचुक के भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सीधा खतरा दिखता है। जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने हालात को देखते हुए गिरफ्तारी का सही फैसला लिया।

पत्नी गीतांजलि बोली थीं- अधिकारियों ने सही फैसला नहीं किया

इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया।

अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए।

इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया। वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Budget 2024