मणिपुर पुलिस कमांडोज के हथियार सरेंडर करने के बाद राज्य में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। CM के साथ बैठक में 6 हिंसाग्रस्त जिलों के कलेक्टरों ने शांति बनाने के लिए असम राइफल्स और सेना की मांग की है। इनमें पहाड़ी जिलों थाउबाल, कांग्पोकपी, चूराचांदपुर, बिष्णुपुर, टेंग्नोपोल शामिल हैं। प्रशासन की मांग है कि यहां 5 मार्च तक सेना को तैनात किया जाए।
दूसरी ओर, गुरुवार को मणिपुर विधानसभा ने कुकी उग्रवादियों के साथ जारी सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन (SoO) समझौता रद्द करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेज दिया है। इसके तहत सुरक्षा बल और उग्रवादी संगठन एक-दूसरे पर हमले नहीं करते थे, लेकिन अब सुरक्षा बल हमले का जवाब दे सकेंगे। हालांकि, केंद्र अभी भी कुकी संगठनों से बातचीत कर रहा है।
अभी मणिपुर के पहाड़ी जिलों में AFSPA लागू
इंफाल वैली और आसपास के इलाकों में बीते कुछ दिनों में हालात बिगड़े हैं। ये इलाके उन 19 थाना क्षेत्रों में आते हैं, जहां सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) लागू नहीं है। बाकी पहाड़ी जिलों में यह कानून लागू है। इससे सुरक्षा बलों को सीधे कार्रवाई का हक मिल जाता है।
जिन 19 थाना क्षेत्रों को AFSPA से अलग रखा गया है, उनमें इंफाल, लेंफेल, सिटी, सिंग्जमेई, सेकमई, लामसांग, पत्सोई, वांगोई, पोरोमपट, हेंगेंग, लामलाई, इरिलबुंग, लेमखोंग, थोबुल, बिष्णुपुर, नांबोल, मोइरोंग, काकचिंग और जिरिबम शामिल हैं।
क्या है AFSPA
सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को केवल अशांत क्षेत्रों में लागू किया जाता है। इन जगहों पर सुरक्षाबल बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं। कई मामलों में बल प्रयोग भी हो सकता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था।
1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने पर यहां भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।
1000 पुलिस कमांडोज ने नहीं उठाए हथियार
सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने 28 फरवरी को खत्म हुए SoO पर फैसला नहीं लिया है। मणिपुर में 32 कुकी विद्रोही समूह हैं। इनमें से 25 SoO के अधीन हैं। गुरुवार को IGP के कबीबी ने कहा कि यदि हमें फर्ज निभाने से रोका गया तो पूरे मणिपुर में AFSPA लागू करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होगा।
