चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपना पहला चुनाव बिहार की वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट से लड़ सकते हैं। इसकी अंदर-अंदर तैयारी चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो कांग्रेस और RJD उनको वॉकओवर दे सकती है। इसके बदले में प्रशांत किशोर की टीम महागठबंधन के लिए चुनावी रणनीति बना सकती है।
जनसुराज से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर बिहार की 5 से 6 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं। ज्यादा जोर वाल्मीकि नगर और पूर्णिया सीट पर है। प्रशांत के अलावा, MLC अफाक अहमद, प्रदीप सिंह के चुनाव लड़ने की संभावना ज्यादा है। एक नाम सीवान से भी सामने आया है, हिना शहाब का।
जनसुराज से जुड़े लोग इस बात को मान रहे हैं कि पीके लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारेंगे, लेकिन खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं। इस पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और RJD के नेता इस मुद्दे पर कुछ कहने से बच रहे हैं।
वाल्मीकि नगर से ही क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशांत किशोर बक्सर के रहने वाले हैं, लेकिन वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट उनके लिए ज्यादा मुफीद है। इसको ऐसे समझिए…
- डेढ़ साल पहले (2 अक्टूबर 2022) प्रशांत किशोर ने अपनी जनसुराज यात्रा की शुरुआत जिस भितिहरवा गांधी आश्रम से की थी, वह वाल्मीकि नगर लोकसभा में ही आता है। यहीं से 3,500 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले। बिहार में सबसे ज्यादा जनसुराज का संगठन यहीं पर मजबूत है।
- जातीय समीकरण काफी हद तक प्रशांत किशोर के पक्ष में है। यहां पर ब्राह्मण वोटर अच्छी खासी संख्या में हैं। मुस्लिमों के बाद सबसे ज्यादा ब्राह्मण पौने तीन लाख वोटर्स हैं। प्रशांत किशोर ने बेतिया के अफाक अहमद को सारण शिक्षक निर्वाचन के MLC पद का चुनाव जिताया था। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सारण, पश्चिम चंपारण, सीवान, मोतिहारी, गोपालगंज जिले आते हैं। अपनी पदयात्रा के शुरुआती 6 महीने प्रशांत किशोर इन्हीं जिलों में ज्यादा रहे हैं।
- 2008 में वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट अस्तित्व में आने के बाद चार लोकसभा चुनाव हुए हैं, लेकिन एक बार भी आरजेडी या कांग्रेस यहां से नहीं जीती। इस सीट पर बीजेपी और जेडीयू जीतती रही है। इस समय यहां से जेडीयू का सांसद है।
