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अंतिम यात्रा के लिए आए रिश्तेदार, जन्मदिन मनाकर लौटे:नागपुर में शव यात्रा से पहले 103 साल की दादी जिंदा हुई

महाराष्ट्र के नागपुर में एक चौकाने वाली घटना हुई। 103 साल की महिला को मृत समझकर परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली, लेकिन शव यात्रा से पहले उनकी सांस चलने लगी।

परिजनों ने 12 जनवरी की शाम महिला को मृत मान लिया गया था। 13 जनवरी की सुबह अंतिम यात्रा तय थी, लेकिन करीब दो घंटे बाद परिजनों को उनके शरीर में हलचल दिखी।

यह मामला नागपुर जिले के रामटेक शहर के आंबेडकर वार्ड का है। यहां रहने वाली 103 साल की गंगाबाई सावजी साखरे पिछले करीब दो महीनों से बिस्तर पर थीं।

परिजनों ने 12 जनवरी को महिला को मृत समझ लिया था।

अंतिम संस्कार की तैयारियां कर ली थी

घर वालों ने मृत समझकर परंपरा के अनुसार गंगाबाई को नए कपड़े पहनाए। उनके हाथ-पैरों के अंगूठे बांधे गए और नाक में रुई रखी गई। रिश्तेदारों और परिचितों को उनके निधन की सूचना दी गई।

परिजनों ने सोशल मीडिया पर भी उनके निधन की खबर साझा कर दी। घर के सामने मंडप लगाया गया, कुर्सियां मंगवाई गईं और शव वाहन बुक किया गया। 13 जनवरी सुबह 10 बजे अंतिम यात्रा का समय तय किया गया।

दो घंटे बाद सांस वापस लौटी

अंतिम तैयारियों के दौरान करीब दो घंटे बाद, शाम लगभग 7 बजे, गंगाबाई के पोते राकेश साखरे ने उनके पैरों की उंगलियों में हलचल देखी। इसके बाद हाथ-पैरों की बांध खोली गई और नाक से रुई हटाई गई।

परिजनों ने देखा कि गंगाबाई की सांस चल रही है। यह देखकर घर में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। कुछ देर पहले जिन्हें मरा हुआ मान लिया था, वे जिंदा पाई गईं।

सबसे पहले पोते ने देखा कि महिला की सांसे चल रही हैं।

जम्मू-कश्मीर और बालाघाट से आए रिश्तेदार लौटे

निधन की सूचना मिलने पर जम्मू-कश्मीर, बालाघाट समेत कई इलाकों से रिश्तेदार रामटेक के लिए निकल चुके थे। कई लोगों ने छुट्टी भी ली थी। मंगलवार को कुछ रिश्तेदार फूलों की माला लेकर पहुंचे, लेकिन महिला को जिंदा देखकर सभी चकित रह गए।

घटना के बाद घर के सामने लगाया गया मंडप हटाया गया और कुर्सियां वापस कर दी गईं।

जिस दिन अंतिम संस्कार होना था, उसी दिन परिजनों ने जन्मदिन मनाया।

जिस दिन अंतिम यात्रा तय थी, उसी दिन जन्मदिन मनाया

13 जनवरी को गंगाबाई की अंतिम यात्रा तय थी। इसी दिन उनका जन्मदिन भी होता है। सभी रिश्तेदारों ने उनका जन्मदिन मनाया। परिजनों ने कहा कि उन्होंने इसे उनके नए जीवन का जन्मदिन मानकर मनाने का फैसला किया।

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