यूपी में मंत्री-विधायक के रिश्तेदारों को बांटी नौकरियां:इनमें 55% ठाकुर, जांच करने आए अफसर के भतीजे की भी नौकरी लगी
पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी और पूर्व सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा… आप सोच रहे होंगे कि आखिर यूपी की सत्ता से जुड़े ये दो नाम क्यों लिए हैं? तो हम आपको बता दें कि यह सिर्फ दो नाम नहीं हैं, बल्कि इन जैसे सत्ता से जुड़े 10 ताकतवर लोगों के नाम निकलकर सामने आए हैं, जिनके बेटे-बेटियों को लखीमपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में नियुक्तियां दीं। इतना ही नहीं बैंक में 27 नियुक्तियां की। इनमें 55% यानी 15 ठाकुर बिरादरी के हैं। केवल 2 एससी-एसटी को नौकरी दी, जबकि 6 को देना था।
इस गड़बड़ी पर पर्दा इसलिए पड़ा, क्योंकि यहां सिर्फ टेनी की बेटी को ही नहीं बल्कि मंत्री, सांसद, विधायक और अफसरों के रिश्तेदारों को भी कैशियर और बाबू बना दिया। इतना ही नहीं, इस गड़बड़ी की जांच करने आए अफसर के भतीजे को भी नौकरी दे दी। यह सब कैसे हुआ? यह जानने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ ने 10 दिन तक लखीमपुर में इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरी रिपोर्ट…
भर्ती के विज्ञापन से शुरू हुआ ये खेल यह सब कुछ 2019 से लेकर 2024 के बीच हुआ। 12 जून 2018 को पुष्पा सिंह ने लखीमपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक चेयरमैन का पद संभाला। इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमें उस अखबार की कटिंग मिली, जिसमें 2019 खत्म होते–होते लिपिक/कैशियर और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिए भर्ती का विज्ञापन निकाला।
लिपिक/कैशियर के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक, जबकि चतुर्थ श्रेणी के लिए आठवीं पास थी। इन पदों पर आवेदन करने वालों को 31 दिसंबर, 2019 तक अध्यक्ष/मुख्य कार्यकारी अधिकारी को संबोधित प्रार्थना पत्र, आवश्यक प्रमाण पत्रों को स्वप्रमाणित फोटो कॉपी कार्यालय में सीधे या रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से भेजना था। विज्ञापन में पदों की संख्या नहीं दी थी, लेकिन इस विज्ञापन के माध्यम से नियुक्तियां हो गईं। हालांकि, किसी को पता नहीं चला कि किसकी भर्ती हुई और कैसे हुई?
अब जानिए… किसको, कैसे मैनेज किया
इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमें एक लिस्ट मिली, जिसमें 27 नियुक्तियों के बारे में पता चला। जब इस लिस्ट को चेक किया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। लिस्ट में तत्कालीन सहकारिता मंत्री के रिश्तेदार से लेकर सांसद–विधायक और शिकायत के बाद जांच करने आए अधिकारियों के रिश्तेदारों के भी नाम हैं। आरोप है कि यह सब कुछ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की तत्कालीन चेयरमैन पुष्पा सिंह के इशारे पर हुआ। बिना उनकी सहमति के यह संभव नहीं था।
अब जानिए कौन-किसका रिश्तेदार?
सबसे पहले बात तत्कालीन सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा की
अब बात पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी की
अब बात पूर्व विधायक बाला प्रसाद अवस्थी की
भाजपा नेता की पत्नी को भी मिली नौकरी
अफसर भी नहीं रहे पीछे, जांच अधिकारी ने भी रिश्तेदार को कराया सेट
अब जब इतने नामी-गिरामी लोगों के रिश्तेदारों की नौकरियां लगीं तो पुष्पा सिंह के करीबी कैसे पीछे रहते। ऐसे में हमारी इन्वेस्टिगेशन में ऐसे कुछ नाम निकलकर आए जो पुष्पा सिंह के साथ-साथ बैंक से भी जुड़े हुए थे।
पुष्पा सिंह ने बहनों के बच्चों को भी दे दी नौकरी
हमारे हाथ उन 27 लोगों की लिस्ट भी लगी। इस लिस्ट को जब चेक किया तो पता चला कि पुष्पा सिंह ने 27 में से 15 ठाकुरों को नौकरी बांटी। इनमें 4 ब्राह्मण भी हैं। हालांकि, कौन-किस पद पर भर्ती हुआ है, उसकी जानकारी इस लिस्ट में देखिए…
अब इन्वेस्टिगेशन का पार्ट था कि हम यह पता लगाएं कि नियुक्तियों में कौन से नियम तोड़े? जिसकी वजह से यह भर्तियां सुर्खियां बनी हुई हैं। इसमें आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया। नियमानुसार 27 में से 7 ओबीसी (27%) को नौकरी देना थी, लेकिन केवल 6 पदों पर भर्ती किया। इसी प्रकार 6 पदों पर एससी-एसटी (22.5%) को नौकरी देना थी, लेकिन केवल 2 को दी। 70% पदों पर सामान्य लोगों की भर्ती कर ली।
नियुक्तियों का प्रोसेस क्या होता है?
- अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में 13 लोग अलग-अलग इलाकों से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चुनकर आते हैं। जबकि एक डायरेक्टर नामित होता है।
- यह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स अपना एक सभापति यानी बैंक का चेयरमैन चुनते हैं और एक उपाध्यक्ष चुनते हैं।
- यदि बैंक में मैनपॉवर की कमी है तो अध्यक्ष पदों की संख्या के हिसाब से एक प्रपोजल बनाता है और बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में रखता है।
- 13 डायरेक्टर में से यदि 8 ने उस प्रपोजल पर सहमति दे दी तो उस प्रपोजल को फिर असिस्टेंट रजिस्ट्रार और वहां से अप्रूव होने के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार के पास भेजा जाता है।
- डिप्टी रजिस्ट्रार अगर अप्रूव करता है तो नियुक्तियां की जा सकती हैं।
बैंक के सचिव ने कहा- नियुक्तियां नियम से ही हुईं नियुक्तियों से संबंध में हमने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के सचिव सवल गुप्ता से बात की। सवल से जब हमने नियुक्तियों को लेकर बातचीत में सवाल-जवाब किए तो उन्होंने किसी भी सवाल काे गलत नहीं ठहराया। उन सवालों के जवाब में वह मुस्कुराते ही रहे। बहरहाल, जब ऑन कैमरा बात की तो उन्होंने बैंक में प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों की नियुक्तियों की बात मानते हुए नियुक्तियों को नियमों के तहत ही बताया।
सवल ने बताया, बैंक में जब भी नियुक्तियां की जाती हैं तो जो संख्या होती है, उसे रजिस्ट्रार से अनुमोदित करवाया जाता है। उसके बाद बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स यह नियुक्तियां करता है। इसके लिए जो प्रक्रिया है, उसे फॉलो किया जाता है। यह सभी के लिए आवेदन होता है। ऐसा नहीं है कि वह किसी का रिलेटिव है तो उसका नहीं हो सकता है। जो भी पात्रता पूरी करता है, ऐसे लोगों की नियुक्तियां की जाती हैं। शुरू में अभ्यर्थी को संविदा के आधार पर या फिर मिनिमम सैलरी के रूप में उससे काम लिया जाता है।
हमने सवल गुप्ता से उन सभी सवालों के जवाब मांगे, लेकिन उन्होंने नियुक्तियों में किसी भी अनियमितता से इनकार भी नहीं किया। आगे उन्होंने कहा, हमें कस्टमर्स जोड़ने होते हैं तो ऐसा प्रभावशाली लोगों से जुड़ा स्टाफ बैंक के लिए बेहतर होता है। इससे ज्यादा से ज्यादा कस्टमर बैंक से जुड़ते हैं।
भाजपा विधायक को पड़ा थप्पड़, बैंक का चुनाव हुआ स्थगित अब हम आपको थोड़ा पीछे ले चलते हैं। अक्टूबर 2024 को खबर आती है कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के चुनाव के दौरान भाजपा विधायक योगेश वर्मा को थप्पड़ मारा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बैंक के चुनाव रोक दिया।
दरअसल, 12 जून 2024 को पुष्पा सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद अक्टूबर में बैंक का चुनाव रखा। इस चुनाव में लखीमपुर के सदर विधायक योगेश वर्मा के करीबी राजू अग्रवाल ने भी पर्चा खरीदा। राजू अग्रवाल के मुताबिक जब वह पर्चा जमा करने जा रहे थे तो पीछे से पुष्पा सिंह ने उनका कॉलर खींचा और उनके समर्थकों ने उन्हें पीटा।
इसके बाद जब उन्होंने अपने करीबी विधायक योगेश वर्मा को जानकारी दी तो वह भी मौके पर पहुंचे और वहांं पुष्पा सिंह के पति अवधेश सिंह ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। योगेश वर्मा कहते हैं, यह सब इसलिए किया क्योंकि पिछले कार्यकाल में जो भी अनियमितता पुष्पा सिंह ने की थीं अगर कोई और चुनाव जीत जाता तो वह खुल कर सामने आ जातीं। यही वजह है कि बेवजह का विवाद कर चुनाव को स्थगित करवा दिया।
पुष्पा सिंह ने आरोपों से किया इनकार, सवालों के जवाब नहीं दिए
इस मामले को लेकर हमने पूर्व चेयरमैन अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लखीमपुर से भी बात की। उन्होंने हॉस्पिटल में होने की बात कहकर ज्यादा बात करने से इनकार कर दिया।
