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मालेगांव बम ब्लास्ट केस की फिर होगी सुनवाई:NIA स्पेशल कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में दी चुनौती; सातों आरोपियों को कोर्ट का नोटिस

साल 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में NIA की स्पेशल कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। NIA कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया था। इसको लेकर धमाके में मारे गए लोगों के परिजन की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी सातों आरोपियों को नोटिस जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकलद की बेंच ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और महाराष्ट्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 6 सप्ताह बाद तय की है।

पिछले हफ्ते दायर की गई थी याचिका बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट में पिछले हफ्ते एक अपील दायर की गई थी। अपील में दावा किया गया कि दोषपूर्ण जांच या जांच में कुछ खामियां आरोपियों को बरी करने का आधार नहीं हो सकतीं। इसके साथ ही दलील दी गई कि विस्फोट की साजिश गुप्त रूप से रची गई थी, इसलिए इसका प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हो सकता है।

बता दें 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास धमाका हुआ था। इसमें 6 लोग मारे गए थे और करीब 100 लोग घायल हुए थे। केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र ATS ने की थी। 2011 में केस NIA को सौंप दिया गया था। NIA ने 2016 में चार्जशीट दाखिल की थी। जानिए वो 5 पॉइंट्स जिसकी वजह से आरोपी बरी हुए…

याचिका में आरोपियों को बरी करने पर उठाए सवाल याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि एनआईए की स्पेशल कोर्ट का 31 जुलाई को सात आरोपियों को बरी करने का आदेश गलत और कानूनी रूप से अनुचित था और इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

31 जुलाई को फैसला आया, प्रज्ञा समेत सातों आरोपी बरी 31 जुलाई को महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी शामिल थे। तब पीड़ितों के वकील शाहिद नवीन अंसारी ने कहा था- हम एनआईए कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

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