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राजनाथ ने ऐसा क्या कहा, तमतमाकर खड़े हुए राहुल:पेंसिल टूटने वाली बात पर गोगोई बोले- हमारे पास सिर्फ 35 राफेल; पहले दिन की बहस में कौन भारी

राजनाथ ने ऐसा क्या कहा, तमतमाकर खड़े हुए राहुल:पेंसिल टूटने वाली बात पर गोगोई बोले- हमारे पास सिर्फ 35 राफेल; पहले दिन की बहस में कौन भारी

16 घंटे पहले

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- भारतीय सेना के हमलों से पड़ोसी देश पूरी तरह हार मान चुका था, पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर की गुहार लगाई गई। राजनाथ की ये बात सुनते ही राहुल गांधी खड़े हो गए और पूछा- फिर आपने ऑपरेशन रोका क्यों? इसके बाद राजनाथ सिंह विपक्ष के नेता को शांत कराते दिखे।

जब राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ने सीजफायर की गुहार लगाई, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी सीट से खड़े हो गए।

ऑपरेशन सिंदूर पर सोमवार को बहस शुरू हुई। पहले दिन लोकसभा में सरकार ने क्या बताया, विपक्ष ने कौन-से सवाल पूछे, अब तक की बहस में किसका पलड़ा भारी, आइए जानते हैं…

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर बहस का टोन सेट किया

सोमवार को तीन बार स्थगन के बाद 2 बजे कार्यवाही शुरू हो सकी। सत्ता पक्ष की तरफ से बहस की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोपहर 2 बजकर 3 मिनट पर की। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में 100 से ज्यादा आतंकवादी, ट्रेनर्स, प्रशिक्षक और हैंडलर मारे गए। भारत की एस-400, आकाश, एयर डिफेंस गन्स बहुत प्रभावी शामिल हुईं।

भारतीय वायुसेना के जबरदस्त हमलों, बॉर्डर पर थल सेना की मजबूत जवाबी कार्रवाई और इंडियन नेवी की तरफ से हमले के डर ने पाकिस्तान को झुकने पर मजबूर कर दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारा मकसद युद्ध करना या पाकिस्तान की जमीन पर कब्जा करना नहीं था।

विपक्ष को नसीहत दी- विमान गिरने जैसे सवाल नहीं पूछने चाहिए

अपने भाषण में राजनाथ सिंह कुछ पुरानी बातों का जिक्र कर विपक्ष को नसीहत भी दे गए…

  • 1962 में चीन युद्ध के समय विपक्ष ने पूछा था कि हमारे देश की धरती पर दूसरे देश का कब्जा कैसे हुआ। हमारे सैनिक कैसे हताहत हुए। उस वक्त मशीनों और तोपों की चिंता न करके हमने देश की टेरिटरी की चिंता की।
  • 1971 के युद्ध में विपक्ष ने राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की प्रशंसा की। हमने ये नहीं पूछा कि कितने प्लेन गिरे। अटल जी ने संसद में सरकार की प्रशंसा की थी।

दरअसल, राजनाथ सिंह विपक्ष को ये बताने की कोशिश कर रहे थे कि ऑपरेशन में कितने राफेल गिरे, ऐसे सवाल नहीं पूछने चाहिए। रक्षा मंत्री ने एक एग्जाम्पल भी दिया- लक्ष्य बड़े हो तो अपेक्षाकृत छोटे मुद्दों पर ध्यान नहीं जाना चाहिए क्योंकि जब बच्चा अच्छे मार्क्स लाता है तो यह नहीं पूछते कि उसने पेंसिल कितनी तोड़ी। इस दौरान वो मुस्कुरा रहे थे।

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चर्चा शुरू की।

चौपाइयों और कोट्स के बीच अंग्रेजी में विपक्ष का धन्यवाद दिया

ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ बोले- यह सिंदूर की लाली, शौर्य की कहानी, भारत के मस्तक पर वीरता की निशानी है। उन्होंने ‘जिन मोहि मारा, ते मैं मारे’ जैसी चौपाई भी कोट की।

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए कहा- बैर और प्रीति बराबरी वालों से करनी चाहिए। शेर यदि मेंढकों को मारे, तो उसका बहुत अच्छा संदेश नहीं जाता है।

वी. एस. नायपाल को कोट करते हुए कहा- पाक में अल्टरनेट और विरोधाभाषी रियलटी है- यहां युद्ध ही शांति, गुलामी ही स्वतंत्रता है और अज्ञानता ही ताकत है।

राजनाथ सिंह ने एक जगह ऑपरेशन सिंदूर के समय सरकार और सेना का साथ देने के लिए सभी विपक्षी दलों का शुक्रिया भी अदा किया, लेकिन ये बात वो अंग्रेजी में बोले और उसका हिंदी अनुवाद भी नहीं बताया। राजनाथ सिंह का पूरा भाषण 56 मिनट चला।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर तीखे सवालों की झड़ी लगा दी

राजनाथ सिंह के बाद ठीक 3 बजे कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई भाषण के लिए खड़े हुए। गोगोई के हाथ में स्पीच का कोई पेपर नहीं था। उन्होंने सरकार और रक्षा मंत्री पर सवाल दागने शुरू किए…

  • पहलगाम की बायसरन में हजारों लोग खुशियां मनाने जाते हैं। वहां पांच दहशतगर्द कैसे आ गए?
  • आतंकियों का मकसद जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था तबाह करना और साम्प्रदायिक तनाव फैलाना था। राजनाथ सिंह ने नागरिकों की एकजुटता पर कुछ क्यों नहीं बोला?
  • हमले को 100 दिन गुजर गए, उन 5 दहशतगर्दों को अब तक पकड़ क्यों नहीं पाए?
  • लगातार जम्मू-कश्मीर में हो रहे हमलों की जिम्मेदारी गृहमंत्री अमित शाह को लेनी पड़ेगी। आप लेफ्टिनेंट गवर्नर के पीछे नहीं छिप सकते।
  • इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी पर जो फैसले लेते हैं, उन पर एक अहंकार आ गया है कि उन पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। हम उनसे सवाल कर रहे हैं।
  • हमलों के वक्त प्रधानमंत्री सऊदी अरब में थे। वहां से आकर वो सीधा बिहार की चुनावी सभा में गए, पहलगाम क्यों नहीं गए?
  • पाकिस्तान के पीछे चीन का हाथ था। जो सरकार चीन को लाल आंख दिखाने की बात करती है। अपने भाषण में एक बार भी चीन का जिक्र क्यों नहीं किया?
  • पाकिस्तान को दुनियाभर से लाखों डॉलर्स की मदद मिल रही है। सरकार उसे क्यों नहीं रोक पाई और न ही पाकिस्तान को किसी ने आतंकी देश घोषित किया।
  • ट्रम्प 26 बार कह चुके हैं कि व्यापार को लेकर भारत-पाकिस्तान को मजबूर किया कि जंग को छोड़ें। आपने किसके सामने सरेंडर किया?

गोगोई ने राजनाथ की दो बड़ी बातों का काउंटर किया

विपक्ष की ओर से गौरव गोगई ने चर्चा की शुरुआत की।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने राजनाथ सिंह की बातों को कोट करते हुए कहा- अब भी कह रहे कि ऑपरेशन सिंदूर कम्प्लीट नहीं हुआ, क्योंकि पाकिस्तान आगे कुछ कर सकता है। फिर सफल क्या हुआ।

गोगोई बोले- आप कह रहे कि हमारा मकसद युद्ध नहीं था। मैं पूछता हूं क्यों नहीं था, होना चाहिए था। आप कहते हैं कि हमारा मकसद जमीन कब्जाना नहीं था। मैं पूछता हूं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर क्यों नहीं लिया गया?

गोगोई बोले- राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर कुछ राफेल गिरे, तो वो सवाल जरूरी नहीं हैं। देश में सिर्फ 35 राफेल हैं। ट्रम्प कह रहे 5 फाइटर जेट गिरे। एक-एक जेट करोड़ों रुपए के हैं। ये जरूरी सवाल हैं। गोगोई ने कहा- देश पर विश्वास करें। देश में सच्चाई सुनने का साहस है। आप बताएं कि कितने राफेल गिरे? गोगोई ने 3.25 बजे अपना भाषण खत्म किया।

इसके बाद सपा, टीएमसी और अन्य पार्टियों के भाषण शुरू हुए। इस दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि आपने टेलिफोन करके जो बताया कि हम सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला कर रहे हैं यह सबसे बड़ी चूक है। उन्होंने कहा- या तो बातचीत करके डोनाल्ड को चुप कराओ या भारत में मैकडोनल्ड बंद करवाओ।

जयशंकर ने सीजफायर में अमेरिका का रोल साफ किया

दोपहर में शुरू हुई चर्चा का शाम होते-होते समय रात 12 बजे तक बढ़ा दिया गया। करीब 06.35 बजे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपना भाषण शुरू किया और वे करीब 39 मिनट बोले। जयशंकर ने भारत-पाक संघर्ष पर अमेरिका का रोल साफ करते हुए बताया…

  • 22 अप्रैल के बाद 17 जून तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। 22 अप्रैल को ट्रम्प ने पहलगाम हमले की निंदा के लिए कॉल किया था। इसके बाद 17 जून को कनाडा में पीएम मोदी से न मिल पाने की वजह बताने के लिए कॉल किया था।
  • 9 मई की रात अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वांस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर जानकारी दी कि पाकिस्तान बड़े हमले की तैयारी में है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान जो भी करेगा, भारत उसका जवाब देगा। 9-10 मई की रात भारत ने पाकिस्तान के हमले विफल किए।
  • अगले दिन उन्हें दूसरे देशों से फोन आए कि पाकिस्तान सीजफायर चाहता है। हालांकि जयशंकर ने यह नहीं बताया कि कॉल किस देश से आया था।
  • भारत ने यह साफ किया कि अगर पाकिस्तान सीजफायर चाहता है तो वह डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन यानी DGMO के जरिए रिक्वेस्ट करे।
  • सीजफायर के लिए कहीं भी ट्रेड की कोई बात नहीं हुई है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चर्चा के दौरान डोनॉल्ड ट्रम्प के कहने पर सीजफायर की बात से इनकार किया।

अमित शाह बोले- विपक्ष 20 सालों तक वहीं बैठेगा

जब जयशंकर भारत-पाक संघर्ष में अमेरिका की भूमिका के बारे में बोल रहे थे, तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर गृहमंत्री अमित शाह नाराज हो गए। उन्होंने अपनी सीट से खड़े होकर कहा, ‘आपको भारत के शपथ लिए विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं है। इसलिए आप वहां बैठे हैं और आने वाले 20 सालों तक वहीं बैठने वाले हैं।’ उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए यह भी कहा, ‘मैं समझ सकता हूं उनकी पार्टी में विदेश का क्या महत्व है।’

थोड़ी देर बाद विपक्ष फिर हंगामा करने लगा तो अमित शाह ने अपनी सीट से खड़े होकर स्पीकर को कहा, ‘जब उनके नेता बोल रहे थे, तब हम सब शांति से सुन रहे थे। आपको उन्हें समझाना चाहिए, वरना हम भी बाद में अपने सदस्यों को कुछ नहीं समझा पाएंगे।’

जयशंकर के भाषण के दौरान जब विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे तो गृहमंत्री अमित शाह अपनी सीट से खड़े होकर उन्हें रोकने लगे।

भारत में क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का विरोध यानी पाक का विरोध

एस जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विदेशों से मिले सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने BRICS की स्टेटमेंट पढ़ी जिसमें लिखा था, ‘BRICS देश सभी तरह की आतंकी गतिविधियों का विरोध करते हैं। इसमें क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म यानी सीमा के उस पार से होने वाला आतंकवाद भी शामिल है।’

जयशंकर ने कहा, ‘अगर भारत पर अटैक होता है और कोई देश कहता है कि हम क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म का विरोध करते हैं, तो यह स्वाभाविक सी बात है कि किसकी बात कर रहे हैं।’

जयशंकर ने यह भी बताया कि 25 अप्रैल से ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने तक उन्होंने 27 देशों को और पीएम मोदी ने 20 देशों को कॉल किया। इस दौरान 40 से ज्यादा देशों ने सहयोग का पत्र भेजा।

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