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घर की छत पर गिरा सैटेलाइट पेलोड बैलून:कर्नाटक पुलिस बोली- कोई घायल नहीं, यह टाटा रिसर्च इंस्टीट्यूट का रूटीन एक्सपेरिमेंट था

घर की छत पर गिरा सैटेलाइट पेलोड बैलून:कर्नाटक पुलिस बोली- कोई घायल नहीं, यह टाटा रिसर्च इंस्टीट्यूट का रूटीन एक्सपेरिमेंट था

बेंगलुरु1 घंटे
जलसांगी गांव में सैटेलाइट पेलोड बैलून गिरने से गांववाले डर गए।
कर्नाटक के बीदर जिले के जलसांगी गांव में शनिवार सुबह सैटेलाइट पेलोड बैलून एक घर की छत पर गिरा। गांववालों ने बताया कि एयरबैग जैसे दिखने वाले इस बैलून में एक बड़ी मशीन लगी हुई थी। ​जिसमें लाल लाइट जल रही थी।

ग्रामीणों ने कहा- राउंड स्पेसशिप की तरह दिखने वाले इस ऑब्जेक्ट के साथ एक लेटर भी मिला। इसमें कन्नड़ भाषा में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) बैलून सर्विस लिखा हुआ था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना होम्नाबाद पुलिस को दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने पेलोड के इस गांव में लैंड होने की जानकारी TIFR को दी। TIFR की टीम पेलोड को कलेक्ट करने के लिए गांव पहुंच रही है। पुलिस ने बताया कि सैटेलाइट पेलोड बैलून TIFR ने एक्सपेरिमेंट के लिए उड़ाया था। यह कोई नई बात नहीं है, TIFR अक्सर ऐसे एक्सपेरीमेंट करता रहता है।

TIFR के मुताबिक, सैटेलाइट पेलोड बैलून एक बड़ा बैलून होता है, जो साइंटिफिक मशीनों के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को धरती से ऊपर वायुमंडल में ले जाता है। इसके बाद पेलोड को बैलून से फ्री कर दिया जाता है और पैराशूट से वापस धरती पर उतार लिया जाता है। संभावना है कि वापस उतारते समय ही यह पेलोड गांव में गिरा होगा।

पेलोड बैलून गिरने के बाद की 3
सैटेलाइट पेलोड बैलून को देखने के लिए गांववाले इकट्ठा
बैलून में लगी रस्सियां गांव के छत और पेड़ में
गांववालों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने गांववालों को समझाया कि डरने की जरूरत नहीं है।
पुलिस ने डरे हुए गांव के लोगों को शांत कराया

पुलिस ने बताया कि इस बेलून के गांव के घर की छत पर गिरने से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। ये रेगुलर एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है। हालांकि, बैलून के गिरने से गांववाले डर गए थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें शांत कराया।

पेलोड बैलून में हीलियम गैस होती है

TIFR के बैलून डिपार्टमेंट के चेयरमैन देवेंद्र कुमार ओझा के मुताबिक, यह बैलून एक तरह का स्पेस कैप्सूल है। इसमें 2.8 लाख क्यूबिक मीटर हीलियम गैस भरी जाती है। इसमें बैठाकर लोगों को धरती से 40 किलोमीटर दूर स्पेस में ले जाया जा सकता है। स्पेन की कंपनी हेलो स्पेस (HALO SPACE) के लिए ये एक्सपेरिमेंट किया गया था। ऐसे गुब्बारों से जल्द ही लोग स्पेस तक जा सकेंगे।

इस ‘स्पेस कैप्सूल’ में बैठाकर यात्रियों को धरती से 40 किलोमीटर ऊंचाई तक ऐसे एटमॉस्फियर में ले जाते हैं, जहां जीरो प्रेशर है। इसे हम स्ट्रेटोस्फियर कहते हैं। वहां पहुंचकर यात्री को धरती का किनारा (EARTH EDGE) नजर आता है।

देवेंद्र ओझा ने बताया कि स्पेस में किसी इंसान को भेजने से पहले हम यह सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि वह आसानी से वहां पहुंच सके और उसकी लैंडिंग और रिकवरी बिल्कुल सेफ हो। HALO के साथ मिलकर यही एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है।

प्लेन या रॉकेट में स्ट्रेटोस्फियर तक जाने से यात्रियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन हमने कंपनी के बनाए स्पेस कैप्सूल के साथ यह चेक किया कि क्या वह धरती से 40 किलोमीटर की ऊंचाई पर वहां का तापमान और प्रेशर झेल सकता है या नहीं? क्या कैप्सूल में जाकर हम सेफ लौट सकते हैं?

सैटेलाइट पेलोड बलून 2 साल पहले भी कर्नाटक के एक गांव में लैंड हुआ था

दिसंबर 2022 में हैदराबाद से 100 किलोमीटर दूर विकराबाद के मोगलीगुंडला गांव में लैंड किया था। इसके UFO (Unidentified flying object) या अनजान एलियन शिप जैसे दिखने की वजह से ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी।

रामोजी फिल्म सिटी में मौजूद टॉलीवुड के डायरेक्टर जगरलामुदी कृष ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा था। पूरी खबर पढ़ें…

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