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सद्गुरु के फाउंडेशन के खिलाफ बंधक बनाने का केस बंद:सुप्रीम कोर्ट बोला- लड़कियां बालिग, मर्जी से आश्रम में रह रहीं, वहां पुलिस जांच गलत

सद्गुरु के फाउंडेशन के खिलाफ बंधक बनाने का केस बंद:सुप्रीम कोर्ट बोला- लड़कियां बालिग, मर्जी से आश्रम में रह रहीं, वहां पुलिस जांच गलत

नई दिल्ली1 घंटे पहले
रिटायर्ड प्रोफेसर एस कामराज ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि आश्रम में उनकी बेटियों को बंधक बनाकर रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दो लड़कियों को बंधक बनाने के मामले में सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन के खिलाफ केस बंद कर दिया है।

CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने शुक्रवार को कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का ऐसी याचिका पर जांच के आदेश देना सही नहीं था। आश्रम में पुलिस का छापा भी गलत था।

कोर्ट ने कहा कि लड़कियों के पिता की याचिका गलत है, क्योंकि दोनों लड़कियां बालिग हैं, जब वे आश्रम में गई तो उनकी उम्र 27 और 24 साल थी। वो अपनी मर्जी से आश्रम में रह रही हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस फैसले का असर सिर्फ इसी केस तक सीमित रहेगा।

ईशा फाउंडेशन के खिलाफ रिटायर्ड प्रोफेसर एस कामराज ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उनका आरोप था कि आश्रम में उनकी बेटियों लता और गीता को बंधक बनाकर रखा गया है।

हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को मामले के खिलाफ जांच करने और ईशा फाउंडेशन से जुड़े सभी क्रिमिनल केसों की डिटेल पेश करने का आदेश दिया था। अगले दिन 1 अक्टूबर को करीब 150 पुलिसकर्मी फाउंडेशन के हेडक्वार्टर पहुंचे थे।

सद्गुरु ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर को मद्रास हाईकोर्ट के फाउंडेशन के खिलाफ पुलिस जांच के आदेश पर रोक लगाई थी।

कोर्ट रूम LIVE

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस से पुलिस जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। आज तमिलनाडु पुलिस ने रिपोर्ट पेश की। सुप्रीम कोर्ट में ईशा फाउंडेशन की तरफ से मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश की। वहीं, तमिलनाडु सरकार का पक्ष सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने रखीं। केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं।

  • मुकुल रोहतगी: तमिलनाडु पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट में लिखा है कि दोनों महिलाओं ने खुद की इच्छा से वहां रहने का फैसला किया है। दोनों महिलाओं ने भी कोर्ट को यही बताया है। ऐसे में केस को बंद कर देना चाहिए।
  • सिद्धार्थ लूथरा: केस बंद करने के फैसले से पुलिस के जांच करने के अधिकार पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए।
  • मुकुल रोहतगी: जैसा सिद्धार्थ लथूरा कह रहे हैं, अगर कोर्ट ने वैसा कमेंट किया तो ईषा फाउंडेशन जैसी संस्था को निशाना बनाने वाले लोग इस कमेंट का दुरुपयोग करेंगे।
  • SG तुषार मेहता: रोहतगी की दलील का समर्थन करता हूं। FIR में जो दर्शाया गया है, वह वास्तविकता से अलग है। सिद्धार्थ लथूरा जैसा कह रहे हैं, अगर कोर्ट वैसी कोई टिप्पणी करेगा, तो क्लिकबेट चलाने वाले मीडिया हाउस में गलत हेडलाइन छपेगी।
  • सिद्धार्थ लूथरा: पुलिस छापे में पता चला है कि फाउंडेशन में कई नियमों का पालन नहीं किया गया। इंटरनल कमप्लेंट कमेटी का भी गठन नहीं किया गया है। एक्स-रे मशीन का लाइसेंस भी खत्म हो चुका है।
  • CJI चंद्रचूड़: यह स्पष्ट हो कि इस केस के बंद होने से फाउंडेशन के किसी अन्य मामले पर कोई असर नहीं हो।
  • कामराज: हमने याचिका तब लगाई थी, जब बेटियों ने कहा था कि वो आमरण अनशन करने जा रही हैं।
  • CJI चंद्रचूड़: माता-पिता को ऐसी याचिकाएं फाइल करने की बजाय अपने एडल्ट बच्चों का दिल जीतना चाहिए। गुस्सा कितना ही ज्यादा क्यों न हो, बेटियां एडल्ट हैं। हम उन पर अपने फैसले नहीं थोप सकते।
  • कामराज: आश्रम में रहने वालों की कंडिशन को लेकर जांच होनी चाहिए।
  • CJI चंद्रचूड़: अब मुझे संदेह हैं। कहीं आप किसी पॉलिटिकल पार्टी की तरफ से तो नहीं बोल रहे हैं।
  • SG तुषार मेहता: पिता का प्यार तो सिर्फ दिखावा है।
  • कामराज: हम बूढ़े हैं। मैं 70 साल का हूं। मेरी पत्नी 65 साल की है। हम रोज अखबार में मॉलेस्टेशन की खबरें देखते हैं। हमें अपनी बच्चियों के बारे में बुरे सपने आते हैं।
  • CJI चंद्रचूड़: आप वहां जाकर उनसे मिलिए, हम पुलिस नहीं भेजेंगे, पुलिस भेजने का सवाल ही नहीं उठता।

सिलसिलेवार ढंग से पूरा केस…

याचिकाकर्ता का आरोप- बेटियों को बंधक बनाया, ब्रेनवॉश किया तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर एस कामराज ने कहा था कि आश्रम ने उनकी बेटियों को बंधक बना लिया है। उन्हें तुरंत मुक्त कराया जाए। कामराज ने अपनी याचिका में कहा था-

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ईशा फाउंडेशन ने बेटियों का ब्रेनवॉश किया, जिसके कारण वे संन्यासी बन गईं। बेटियों को कुछ खाना और दवा दी जा रही है। इससे उनकी सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो गई है। जब से बेटियों ने हमें छोड़ा है, हमारा जीवन नर्क बन गया है।

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मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद 1 अक्टूबर को करीब 150 पुलिसकर्मी फाउंडेशन के हेडक्वार्टर पहुंचे थे।

कामराज की बड़ी बेटी गीता ने इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी से M.Tech किया है। उसे 2004 में उसी यूनिवर्सिटी में करीब 1 लाख रुपए के वेतन पर नौकरी मिली थी। उसने 2008 में अपने तलाक के बाद ईशा फाउंडेशन में योग क्लासेज में भाग लेना शुरू किया था।

इसके बाद गीता की छोटी बहन लता भी उसके साथ ईशा फाउंडेशन में रहने लगी। दोनों बहनों ने अपना नाम बदल लिया और अब माता-पिता से मिलने से भी इनकार कर रही हैं।

बेटियां बोलीं- हम अपनी मर्जी से फाउंडेशन में रह रहे मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कामराज की दोनों बेटियां भी मद्रास हाईकोर्ट में पेश हुई थीं। दोनों ने कहा कि वे अपनी मर्जी से ईशा फाउंडेशन में रह रही हैं। उन्हें कैद में नहीं रखा गया है। ईशा फाउंडेशन ने भी दावा किया कि दोनों स्वेच्छा से उनके साथ रही हैं।

फाउंडेशन ने कहा था कि वयस्क लोगों को अपना रास्ता चुनने की आजादी है। हम शादी या संन्यासी ​​​ बनने पर जोर नहीं देते हैं, क्योंकि ये लोगों का निजी मामला है। ईशा योग सेंटर में ऐसे हजारों लोग आते हैं, जो संन्यासी नहीं हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने ब्रह्मचर्य या संन्यासी बनना स्वीकार कर लिया है।

फाउंडेशन ने तर्क दिया था कि अदालत मामले का दायरा नहीं बढ़ा सकती। हालांकि, अदालत ने मामले की जांच करने का फैसला किया क्योंकि बेंच ने मामले में कुछ संदेह जताए।

हाईकोर्ट ने कहा था- अपनी बेटियों की शादी करने वाला दूसरों को संन्यासी बना रहा मद्रास हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर को सद्गुरु से पूछा था, “जब आपने अपनी बेटी की शादी कर दी है, तो दूसरों की बेटियों को सिर मुंडवाने और सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यासियों की तरह रहने के लिए क्यों प्रोत्साहित कर रहे हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस वी शिवगणनम की बेंच ने की थी।

जस्टिस सुब्रमण्यम ने ईशा फाउंडेशन से कहा था कि आप नहीं समझेंगे क्योंकि आप एक खास पार्टी के लिए पेश हो रहे हैं। यह अदालत न तो किसी के पक्ष में है और न ही किसी के खिलाफ है। हम केवल याचिकाकर्ता के साथ न्याय करना चाहते हैं।

इसके बाद 1 अक्टूबर को करीब 150 पुलिसकर्मी फाउंडेशन के हेडक्वार्टर पहुंचे थे। वहीं, सद्गुरु ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई के लिए 18 अक्टूबर की तारीख दे दी।

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