हिमाचल प्रदेश में भी रेस्टोरेंट, फास्टफूड सेंटर और रेहड़ी-फड़ी वालों को दुकानों के सामने नेम प्लेट लगाना जरूरी होगा। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार, 25 सितंबर को शिमला में मीडिया से बातचीत में कहा कि उतर प्रदेश की तर्ज पर प्रदेश में भी रेहड़ी-फड़ी वालों को उनकी फोटो लगे लाइसेंस दिए जाएंगे। इन्हें दुकानों के बाहर लगाना अनिवार्य होगा।
यूपी की योगी सरकार ने मंगलवार को ही इस बारे में आदेश जारी किया है।
विक्रमादित्य ने कहा कि नेम प्लेट लगाने के लिए शहरी विकास विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘खासकर खाने-पीने का सामान बेचने वालों को साफ-सफाई के लिहाज से भी ध्यान रखने की जरूरत है। सफाई को लेकर लोगों ने चिंताएं व्यक्त की हैं। स्ट्रीट वेंडर कमेटी बन चुकी है। इसी कमेटी से फोटो वाला लाइसेंस लिया जाएगा।’
हिमाचल में स्ट्रीट वेंडर को लेकर हमेशा रहा विवाद हिमाचल में स्ट्रीट वेंडर का विवाद कई सालों से चल रहा है। मामले ने तूल संजौली मस्जिद विवाद के बाद पकड़ा। आरोप लगा कि राज्य में विशेष समुदाय के लोगों को ही रेहड़ी-फड़ी लगाने दिया जा रहा है। इसके बाद विधानसभा में पंचायती राज मंत्री ने तो यहां तक कह दिया था कि स्ट्रीट वेंडर केवल हिमाचली होने चाहिए।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि तहबाजारी (रेहड़ी-फड़ी लगाने वाले) केवल हिमाचली रखे जाए, कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए, हम ऐसा कोई निर्णय नहीं लेंगे जो कोर्ट से स्टे हो जाए। उन्होंने कहा कि पॉलिसी बना रहे हैं। इसमें निर्धन, SC, ST, विधवाओं को भी रेहड़ी-फड़ी लगाने का प्रावधान किया जा रहा है।
उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में स्ट्रीट वेंडर कमेटी बनी शिमला के संजौली मस्जिद विवाद के बीच विधानसभा के मानसून सत्र में भी इसे लेकर चर्चा हुई। इसमें स्ट्रीट वेंडर के लिए पॉलिसी बनाने का निर्णय हुआ। इसके बाद राज्य सरकार की सिफारिश पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्ट्रीट वेंडर कमेटी का गठन कर दिया।
कमेटी की अध्यक्षता उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान कर रहे हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह, शिमला से कांग्रेस विधायक हरीश जनारथा के अलावा विपक्षी विधायक अनिल शर्मा, विधायक सतपाल सिंह सत्ती और विधायक रणधीर शर्मा को भी कमेटी का सदस्य बनाया गया है। हिमाचल में मस्जिद विवाद
बीते 31 अगस्त को शिमला के मैहली में 2 गुटों के बीच लड़ाई हुई। इसमें रेहड़ीवाले भी शामिल थे। आरोपी संजौली मस्जिद में छिप गए। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 1 सितंबर को हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में संजौली मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। 5 सितंबर को संजौली और चौड़ा मैदान में फिर प्रदर्शन कर अवैध मस्जिद गिराने की मांग उठी।
इसी दिन कसुम्पटी में भी अवैध मस्जिद को तोड़ने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। 11 सितंबर को संजौली-ढली में उग्र प्रदर्शन हुआ। पुलिस को हल्का बल प्रयोग और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बाद प्रदेशभर में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर और हिंदू संगठनों ने अलग अलग शहरों में रोष रैली निकाल कर अवैध मस्जिद को तोड़ने और बाहर से आने वाले लोगों की वैरिफिकेशन की मांग की।
