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सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के खिलाफ अवमानना केस बंद किया:रामदेव-बालकृष्ण की माफी मंजूर की; कहा- आदेश नहीं माना तो सख्त सजा देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के खिलाफ अवमानना केस बंद किया:रामदेव-बालकृष्ण की माफी मंजूर की; कहा- आदेश नहीं माना तो सख्त सजा देंगे

नई दिल्ली3 घंटे पहले
14 मई को सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण कोर्ट में मौजूद थे।

पतंजलि आयुर्वेद और योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ अदालत की अवमानना ​​का केस बंद कर दिया है।

कोर्ट ने दोनों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए कुछ भी करते हैं, जैसा कि पहले हुआ था, तो कोर्ट कड़ी सजा देगा।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने मंगलवार (13 अगस्त) को फैसला सुनाया। 14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना ​​नोटिस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी की बदनामी का आरोप लगाया गया था।

रामदेव का माफीनामा…

5 पॉइंट में पूरा मामला

  • अवमानना ​​का मामला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की याचिका पर 17 अगस्त 2022 को शुरू हुआ था। यह पतंजलि के विज्ञापनों के खिलाफ थी। पतंजलि ने एलोपैथी को बेअसर बताते हुए कुछ बीमारियों के इलाज का दावा किया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाइयों और फटकार के बाद पतंजलि ने नवंबर 2023 में आश्वासन दिया था कि वह ऐसे विज्ञापनों से दूर रहेगा।
  • फरवरी 2024 में पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन जारी रहने के बाद कोर्ट ने कंपनी और उसके एमडी को अवमानना ​​नोटिस जारी किया।
  • मार्च 2024 में अवमानना ​​नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने पतंजलि के एमडी बालकृष्ण और बाबा रामदेव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
  • अप्रैल 2024 में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण कोर्ट में पेश हुए और एलोपैथिक दवाओं पर टिप्पणी करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी।

कोर्ट ने पूछा था- क्यों न अवमानना का केस चलाया जाए
सुप्रीम कोर्ट ने 21 नवंबर 2023 को कहा था- पतंजलि आयुर्वेद ने आश्वासन दिया था कि अब से किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं होगा, विशेष रूप से उसके प्रोडक्ट्स के विज्ञापन या ब्रांडिंग के दौरान। साथ ही दवाओं के असर का दावा करने या किसी भी चिकित्सा पद्धति के खिलाफ कोई बयान मीडिया को जारी नहीं किया जाएगा।

लेकिन, इसके बावजूद स्वामी रामदेव ने नवंबर 2023 में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कोर्ट की पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ कड़ी टिप्पणी पर बात की थी। पतंजलि के आश्वासन के बाद मीडिया में बयान देने से सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया था। बाद में शोकॉज नोटिस देकर पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। कोर्ट ने पतंजलि से न्यूज पेपर में माफी भी छपवाई।

पिछली 2 सुनवाइयों की बड़ी बातें…

14 मई 2024 : IMA चीफ ने भी कोर्ट से माफी मांगी, बेंच ने कहा- सोफे पर बैठकर कुछ भी नहीं बोल सकते
कोर्ट ने IMA के प्रेसिडेंट डॉ. आरवी अशोकन से कहा- अभिव्यक्ति की आजादी ठीक है, लेकिन कभी-कभी इंसान को संयमित भी होना पड़ता है। आप सोफे पर बैठकर अदालत के बारे में कुछ भी नहीं कह सकते। अगर दूसरा पक्ष इस तरह की टिप्पणी करता तो आप क्या करते? आप दौड़कर कोर्ट पहुंच जाते। अशोकन ने बिना शर्त माफी मांगी। पढ़ें पूरी खबर…

7 मई 2024 :सेलिब्रिटी भी भ्रामक विज्ञापन के लिए जिम्मेदार; पतंजलि केस में विवादित बयान पर IMA प्रेसिडेंट को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर लोगों को प्रभावित करने वाले किसी प्रोडक्ट या सर्विस का विज्ञापन भ्रामक पाया जाता है तो सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। IMA की आलोचना में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि आप (IMA) कहते हैं कि पतंजलि आयुर्वेद गुमराह कर रहा है, आपकी दवा बंद कर रहा है- लेकिन आप क्या कर रहे थे? पढ़ें पूरी खबर…

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