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राजभर की पार्टी का बदल गया चुनाव निशान:लोकसभा चुनाव में छड़ी और हॉकी में हुआ था कंफ्यूजन; OP फिर SBSP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने

राजभर की पार्टी का बदल गया चुनाव निशान:लोकसभा चुनाव में छड़ी और हॉकी में हुआ था कंफ्यूजन; OP फिर SBSP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने

लखनऊ37 मिनट पहले

यूपी में NDA की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सोमवार को लखनऊ के रविंद्रालय में बैठक हुई। इसमें पार्टी का चुनाव निशान बदलने को लेकर फैसला किया गया। पार्टी ने अपना चुनाव निशान छड़ी से बदलकर चाबी कर लिया है। पार्टी अब चुनाव आयोग से चाबी चुनाव निशान की मांग करेगी।

सुभासपा का चुनाव निशान अभी तक छड़ी था। बीते लोकसभा चुनाव में घोसी सीट से एक ऐसा प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में था, जिसका चुनाव निशान हॉकी था। इस वजह से मतदाताओं में कंफ्यूजन हो गया। मतदाताओं ने छड़ी की जगह हॉकी पर अपना वोट दे दिया। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इसी वजह से आज की बैठक में चुनाव निशान बदलने को लेकर पार्टी के पदाधिकारी ने सहमति दी।

वहीं, बैठक में नई कार्यकारिणी के गठन पर चर्चा हुई। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया।

दीप जलाकर बैठक की शुरुआत करते अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर।

राजभर बोले- विपक्ष को सत्ता से बाहर होते ही सब याद आता है
सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा- यह गरीब, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और पीड़ितों की पार्टी है। इसलिए सुभासपा के समर्थक तन-मन-धन से सहयोग कर पार्टी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएं।सुभासपा यूपी में ही नहीं, बिहार की राजनीति में भी दखल रखती है। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी मजबूती से उतरेगी।

राजभर ने पहले की सरकारों पर हमला बोला। कहा- इनको सरकार में रहते हुए जातिगत जनगणना, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू करने की याद क्यों नहीं आई? सत्ता से बाहर जाते ही इन्हें ये सब याद आने लगा। यश इनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है। सुभासपा पिछले 20 साल से जातिगत जनगणना, रोहिणी आयोग की रिपोर्ट, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग करती रही है। एक समान अनिवार्य फ्री शिक्षा, फ्री स्वास्थ्य सुविधा, पुलिस सुधार, भर/राजभर को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने और यूपी में शराब बंदी भी हमारी मांग है।

बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते ओपी राजभर।

कहा- मदरसे चलाने के लिए यूनिवर्सिटी खुलवाऊंगा
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर ने प्रदेश के मदरसों की मान्यता की नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा- हमारा प्रयास है, हम दो यूनिवर्सिटी खोलें। हम राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड को यूनिवर्सिटी से संबद्ध करना चाहते हैं। वहीं (यूनिवर्सिटी से) सभी मदरसों को मान्यता दी जाएगी, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।

राजभर ने उदाहरण देते हुए कहा- लखनऊ यूनिवर्सिटी, पूर्वांचल यूनिवर्सिटी, शकुंतला यूनिवर्सिटी आपके सामने हैं, जहां से तमाम विद्यालय चल रहे हैं। इस तरह यूनिवर्सिटी से अगर मदरसे संचालित होते, तो आज यह दुर्गति न होती। इस काम को न तो सपा कर पाई, न कांग्रेस कर पाई और न ही बसपा।

लखनऊ के रविंद्रालय में हुई बैठक में हिस्सा लेते सुभासपा कार्यकर्ता।

उपचुनाव में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगी सुभासपा
पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर ने भी बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा- उपचुनाव में NDA के घटक के तौर पर सुभासपा को जो भी दायित्व मिलेगा, उसे हमारे सभी कार्यकर्ता जिम्मेदारी से पूरा करेंगे। NDA उम्मीदवारों को जिताने के लिए हमारे कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करेंगे।

सुभासपा से 20 साल बाद बदला अपना सिंबल
सुभासपा ने 20 साल बाद अपने सिंबल को बदलकर छड़ी की जगह चाबी किया है। दरअसल, NDA की सहयोगी सुभासपा को घोसी लोकसभा सीट मिली थी। इस सीट से ओम प्रकाश राजभर ने अपने बेटे अरविंद राजभर को चुनाव लड़ाया था। उनका चुनाव निशान छड़ी था, जो EVM में ऊपर से तीसरे नंबर पर था।

घोसी से ही मूलनिवासी समाज पार्टी की प्रत्याशी लीलावती राजभर भी मैदान में थीं। उन्हें चुनाव आयोग ने हॉकी चिह्न आवंटित कर दिया। यह EVM में नीचे से तीसरे नंबर पर था। लीलावती को इस चुनाव में 47,527 वोट मिले, जबकि अरविंद राजभर को 3,40,188 वोट मिले थे। इसके बाद सुभासपा ने कहा था कि छड़ी और हॉकी में गलतफहमी के कारण वोट में इतना बड़ा अंतर हुआ।

लखनऊ के रविंद्रालय में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की बैठक में मौजूद कार्यकर्ता।

नई कार्यकारिणी बनी, उपचुनाव की रणनीति बनी
सुभासपा की आज की बैठक में पार्टी की नई कार्यकारिणी का गठन करने की भी घोषणा की गई। साथ ही 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भी चर्चा की गई। हालांकि, भाजपा ने अभी तक सीटों के बंटवारे को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसे में सुभासपा की इस बैठक में किन-किन सीटों पर पार्टी मजबूत है, उसका खाका तैयार किया।

बैठक में सुभासपा की भंग प्रदेश की फिर से गठन की घोषणा की गई। पार्टी के नेताओं को चार भागों में बांटा गया है। चार क्षेत्रीय अध्यक्ष और एक प्रदेश अध्यक्ष के साथ अलग-अलग मोर्चों के संगठन बनाए जाएंगे। सबको जिम्मेदारी दी जाएगी। जो लोग सक्रिय सदस्य बन चुके हैं, उन्हें पदाधिकारी की सूची में शामिल किया गया है।

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