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ढाका में मंदिरों के रास्ते बंद किए, आर्मी तैनात:हिंदू बोले- डर से नींद नहीं आती, हमेशा लगता है भीड़ मार डालेगी

भास्कर एक्सक्लूसिव

ढाका में मंदिरों के रास्ते बंद किए, आर्मी तैनात:हिंदू बोले- डर से नींद नहीं आती, हमेशा लगता है भीड़ मार डालेगी

ढाका34 मिनट पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

‘5 अगस्त को हम टीवी पर देख रहे थे कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। वे देश छोड़कर भाग गई हैं। ये अच्छी खबर थी, इसलिए हम खुश थे। ये खुशी थोड़ी देर की ही थी। कुछ देर बाद मेरे घर के बाहर भीड़ जुटने लगी। शाम करीब 6:30 बजे भीड़ ने घर पर हमला कर दिया। मेरे पापा घर में थे। वे जान बचाकर भागे। मैं बता नहीं सकती कि हम लोग कितने डरे हुए हैं।’

कोना चक्रबर्ती बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 200 किमी दूर जसोर में रहती हैं। शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ते ही वहां अल्पसंख्यकों पर हमले शुरू हो गए। कोना के शहर जसोर में ही उपद्रवियों ने एक 5 स्टार होटल में आग लगा दी थी, जिसमें 25 लोग जिंदा जल गए।

ये हिंसा कोना ने खुद देखी है। हमले अभी थमे नहीं हैं। खबरें हैं कि बांग्लादेश के 64 जिलों में से 52 में हिंदुओं को निशाना बनाया गया है।

हमले के विरोध में अलग-अलग शहरों से आए हिंदुओं ने शनिवार को ढाका के शाहबाग इलाके में प्रोटेस्ट किया। उनका कहना है कि ढाका में तो हम सेफ हैं, लेकिन ढाका से बाहर निकलते ही जान खतरे में पड़ जाती है। हमले के डर से सो नहीं पा रहे हैं। हालांकि, ढाका में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। यहां के मंदिरों के बाहर आर्मी तैनात की गई है।

कवरेज के लिए बांग्लादेश में मौजूद दैनिक भास्कर के रिपोर्टर वैभव पलनीटकर बता रहे हैं बांग्लादेश में अल्पसंख्यक क्यों सुरक्षा मांग रहे हैं।

‘हर वक्त लगता है, भीड़ घर में घुसकर मार न दे’
बांग्लादेश में फिलहाल हिंदू आबादी किस डर में जी रही है, ये कोना चक्रबर्ती बताती हैं। वे कहती हैं, ‘मेरे पापा ने जब से भीड़ का उपद्रव देखा है, वे बहुत डरे हुए हैं। उनकी जान को खतरा है।’

‘बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने से हम भी तो खुश हैं, लेकिन देश में हो रहे बदलाव का फायदा कुछ कट्टरपंथी उठा रहे हैं। वे अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। 5 अगस्त के बाद से मुझे नींद नहीं आ रही है। हर वक्त लगता है कि उपद्रवियों की भीड़ मेरे घर में न घुस आए, हमें मार न दे।’

‘हम दुनिया में, खासतौर पर भारत तक आवाज पहुंचाना चाहते हैं कि यहां हालात ठीक नहीं हैं।’

हिंदुओं पर हो रहे हमले के खिलाफ आवाज उठाने वाली कोना चक्रबर्ती अकेली नहीं हैं। उनके साथ हजारों लोग हैं। ये सभी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के दमन और अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल लोगों के हाथ में तख्तियां हैं, जिन पर लिखा है सेव हिंदू इन बांग्लादेश, स्टॉप किलिंग हिंदूज’। जुबान पर नारा है- हिंदुओं की हत्या बंद करो।

ढाका में काली मंदिर के बाहर आर्मी के जवान तैनात
बांग्लादेश के कई शहरों में मंदिरों पर हमले की खबरों आ रही हैं। ढाका में मंदिरों की स्थिति जानने हम शाहबाद थाना एरिया के रमना काली मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर के बाहर बैरिकेडिंग की गई है। गेट के बाहर सेना के हथियारबंद जवान पहरा दे रहे हैं।

ये ढाका का रमना काली मंदिर है। मंदिर के बाहर बांस और टीन से बाड़ेबंदी करके रास्ता रोक दिया गया है।

रमना काली मंदिर सेंट्रल ढाका में है। इस इलाके में हिंसा का सबसे ज्यादा असर रहा था। यहां अब भी हालात नाजुक हैं। आम दिनों में मंदिर भक्तों से भरा रहता है, लेकिन फिलहाल ये सूना पड़ा है।

मंदिर के बाहर चाय की दुकान लगाने वाले पारितोष कुमार साहा कहते हैं, ‘अब तक इस मंदिर पर हमला नहीं हुआ है, लेकिन यहां आर्मी तैनात है। इसी से पता चल रहा है कि हालात ठीक नहीं है। बीते 5 दिन से हम लोग इसी खौफ में हैं कि कुछ अनहोनी न हो जाए।’

बैरिकेडिंग के बीच से हम मंदिर के अंदर पहुंचे। यहां ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कुछ स्टूडेंट मौजूद थे। ये सभी हाथ में ब्रश, कलर और कागज लेकर पहुंचे थे। आंदोलन के दौरान मंदिर की दीवारों पर नारों के अलावा आपत्तिजनक शब्द लिख दिए गए थे। स्टूडेंट इन्हें मिटाकर उस पर आर्ट वर्क कर रहे हैं।

हमने इन स्टूडेंट्स से बात करना चाहा, लेकिन वे कैमरे पर नहीं आए। बोले कि इन हालात में हमारा कैमरे पर बात करना ठीक नहीं होगा। हम हिंदू हैं और हमें नहीं पता कि कौन किस वजह से हमें टारगेट बना ले।

रमना मंदिर एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। ये ढाका के सबसे मशहूर मंदिरों में शामिल है। हालांकि, अभी यहां बहुत भीड़ नहीं है।

हमने स्टूडेंट्स से देश में चले आंदोलन के बारे में पूछा। ग्रुप में शामिल एक स्टूडेंट जवाब में कहती है, ‘शेख हसीना तानाशाही पर उतर आई थीं। उनके इस्तीफे से हम खुश है, लेकिन उनके इस्तीफे के बाद प्रदर्शन की आड़ में जो हुआ, उससे हम बहुत डरे हुए हैं। हम ऐसा बांग्लादेश नहीं बनाना चाहते, जहां शरिया कानून चले। हम ऐसा देश बनाना चाहते हैं, जहां हर कोई बराबरी के भाव के साथ रह सके।’

एक और स्टूडेंट कहती है, ‘शेख हसीना को हटाने का पूरा आंदोलन छात्रों ने चलाया था। हम भी उसका हिस्सा थे। अब हम चाहते हैं कि उस आंदोलन ने जो हासिल किया है, कट्टरपंथी उससे सत्ता हथियाकर अल्पसंख्यकों को सताना न शुरू करें। हम चाहते हैं कि हम सेक्युलर मुल्क में रहें, जहां धर्म और समुदाय के आधार पर भेदभाव न हो।’

इसके बाद हमने रमना काली मंदिर के पुजारी सुजीत चक्रबर्ती से बात की। वे कहते हैं, ‘आमतौर पर इस मंदिर में बहुत भीड़ रहती है। अभी डर की वजह से लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। ढाका में तो हालात फिर भी ठीक हैं, लेकिन चट्टोग्राम और जसोर में मंदिरों, हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमले हो रहे हैं।’

बांग्लादेश के न्यूज पेपर द डेली स्टार के मुताबिक, 5 अगस्त को शरियतपुर में धानुका मनसा बाड़ी मंदिर में भीड़ ने तोड़फोड़ की थी। यहां मूर्तियां तोड़ दी गईं और 16 CCTV कैमरों को भी नुकसान पहुंचाया। मंदिर समिति के महासचिव गोविंदो चक्रवर्ती ने बताया कि मंदिर पर हमला करने के बाद भीड़ ने हमारे घरों को घेर लिया था। वे हम पर भी हमला करने वाले थे। सेना ने हमें बचा लिया।

वहीं, दिनाजपुर हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्या परिषद के अध्यक्ष सुनील चक्रवर्ती ने बताया कि दिनाजपुर के श्मशान घाट में तोड़फोड़ की गई है। इसके अलावा पार्वतीपुर में एक काली मंदिर सहित पांच मंदिरों पर हमला किया गया। पटुआखाली के कुआकाटा में एक मंदिर में आग लगा दी गई। हिंदू समुदाय के दो घरों में भी तोड़फोड़ की गई है।

हमने इन मंदिरों तक भी पहुंचने की कोशिश की, लेकिन ढाका से दूरी ज्यादा होने की वजह से नहीं पहुंच पाए। आगे की स्टोरीज में हम यहां का हाल भी बताएंगे।

प्रोटेस्ट में मुस्लिम भी शामिल, बोले- अल्पसंख्यकों की हिफाजत करनी होगी
40 साल के यासिर अराफात ढाका के रहने वाले हैं। पेशे से कारोबारी हैं। अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। हाथ में एक तख्ती थामे हुए हैं, जिस पर लिखा है ‘हमें सेक्युलर बांग्लादेश चाहिए।’

यासिर कहते हैं, ‘मैं अपने हिंदू भाइयो-बहनों के समर्थन में यहां आया हूं। मैं उनके दिलों में बसे खौफ को महसूस कर पा रहा हूं। बांग्लादेश बदलाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन बदलाव के साथ काफी कुछ गलत हो रहा है। अगर हमें एक अच्छा मुल्क बनना है, तो अल्पसंख्यकों की हिफाजत करनी ही होगी। इसके बिना हम अच्छा देश बन ही नहीं सकते।

30 साल की अर्पिता भट्टाचार्य ढाका में आंत्रप्रेन्योर हैं। वे बांग्लादेश का झंडा लेकर सड़क पर हैं। अर्पिता कहती हैं, ‘हम यहां चैन से रहना चाहते हैं। हम जन्म से बंगाली हैं और बांग्लादेश हमारा देश है। अब हमें यहां रहने में डर लग रहा है। हमारे मंदिरों पर हमला हो रहा है, हमें मंदिरों की सुरक्षा का वादा चाहिए। हम यही मांग लेकर आए हैं।’

अर्पिता भारत के लोगों के लिए एक मैसेज देती हैं, ‘आप हमारे साथ रहिए और हमें समर्थन देते रहिए। अगर आपका साथ रहेगा, तो हम यहां चैन से रह सकते हैं। हमारा डर सिर्फ अभी की बात है, ऐसा नहीं है। दुर्गा पूजा आती है, तब हमेशा हमें डर लगा रहता है कि वे हमला करेंगे और मंदिरों की मूर्ति तोड़ देंगे।’

कौन हमला कर रहा है? इस सवाल के जवाब में अर्पिता कहती हैं, ‘सीधे तौर पर नहीं कह सकते, लेकिन कुछ लोग हैं जो हमारे धर्म और पूजा के तरीके पसंद नहीं करते। हमारी सिक्योरिटी के लिए पुलिस है, लेकिन कभी-कभी वो भी काम नहीं करती। यही फैक्ट है। इस देश में हमारी सारी सुविधाएं बनी रहें, हमारी यही मांग है।’

ढाका में चल रहे प्रदर्शन को अल्पसंख्यक अधिकार आंदोलन नाम दिया गया है। प्रदर्शन में शामिल लोगों की 8 मांगे हैं।

1. अल्पसंख्यकों पर हुए हमले का स्पीड ट्रायल किया जाए, इसके लिए ट्रिब्यूनल बनाकर दोषियों को जल्द सजा दी जाए। पीड़ितों को राहत और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

2. बिना देर किए अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून बनाया जाए।

3. अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय बनाया जाए।

4. हिंदू वेलफेयर ट्रस्ट को फाउंडेशन का दर्जा दिया जाए, साथ ही क्रिश्चियन और बुद्धिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट को भी यही दर्जा मिले।

5. प्रॉपर्टी और इनहेरिटेंस से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए।

6. सभी शैक्षणिक संस्थाओं और हॉस्टल में अल्पसंख्यकों के लिए प्रार्थना कक्ष बनाया जाए।

7. संस्कृत और पाली एजुकेशन बोर्ड को मॉडर्न बनाया जाए।

8. दुर्गा पूजा पर 5 दिन की छुट्टी दी जाए।

61 जिलों में हिंदू आबादी, 52 जिलों में हमले हुए
बांग्लादेश की आबादी करीब 17 करोड़ है। इसमें करीब 1.35 करोड़ हिंदू हैं। ये कुल आबादी का 7.95% हैं। बांग्लादेश में हिंदू दूसरा सबसे बड़ा धर्म है। देश के 64 में से 61 जिलों में हिंदू आबादी रहती है। इन्हें शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक माना जाता है। यही वजह है कि अब वे निशाने पर हैं।

बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई ओइक्या परिषद के मुताबिक, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद देश के 64 में से 52 जिलों में अल्पसंख्यकों को टारगेट किए जाने की 205 घटनाएं हुई हैं। परिषद ने अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस से अल्पसंख्यकों को सिक्योरिटी देने की मांग की है।

भारत में शरण लेने के लिए बॉर्डर पर आए, BSF ने रोका
बांग्लादेश में हिंसा के बाद से बांग्लादेशी हिंदू भारत आने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कूचबिहार और जलपाईगुड़ी बॉर्डर पर करीब एक हजार लोग शरण लेने के लिए पहुंचे हैं। फिलहाल BSF ने उन्हें रोक दिया है।

उधर, हिंदुओं को टारगेट किए जाने पर शेख हसीना की अवामी लीग ने भी चिंता जताई है। वहीं यूनाइडेट नेशंस के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के स्पोक्सपर्सन की तरफ से भी कहा गया है कि हम नस्लीय आधार पर किसी भी हमले या हिंसा के खिलाफ हैं।

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