तीसरी बार के भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा का निधन:देर रात बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत; राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार
सलूंबर से लगातार तीन बार के भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा (65) का बुधवार देर रात उदयपुर में निधन हो गया। अमृतलाल को तबीयत बिगड़ने पर रात करीब 1:15 बजे एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। रात 2 बजे डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गुरुवार शाम 5:30 बजे सलूंबर में उनके पैतृक गांव लालपुरिया में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने लालपुरिया स्थित अमृतलाल मीणा के घर पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई।
अमृतलाल की आदिवासी नेता के तौर पर भी पहचान थी। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ होगी।
गांव में लोगों ने दी अंतिम विदाई
गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे उनकी पार्थिव देह उदयपुर से उनके पैतृक गांव लालपुरिया (सलूंबर) लाई गई। यहां पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।
इससे पहले दोपहर करीब डेढ़ बजे उनकी पार्थिव देह को सलूंबर के डाक बंगला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। जहां लोगों ने उन्हें पुष्पांजलि दी।
हॉस्पिटल लाए तब धड़कन नहीं थी
एमबी अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. आर.एल. सुमन ने बताया- बुधवार रात को करीब 1:15 बजे उन्हें हॉस्पिटल की इमरजेंसी में लेकर आए थे। तब कोई धड़कन नहीं थी। सांस भी नहीं चल रही थी। इसके बाद भी काफी कोशिश की थी।
20 साल राजनीति में सक्रिय रहे
सलंबूर जिले के लालपुरिया गांव में साल 1959 में जन्मे अमृतलाल मीणा करीब 20 साल राजनीति में सक्रिय रहे। अमृतलाल ने साल 2004 में पंचायत समिति सराड़ा के सदस्य के तौर पर राजनीति की शुरुआत की थी। उसके बाद साल 2007-10 तक जिला परिषद उदयपुर के सदस्य और 2010 में पंचायत समिति सराड़ा में प्रतिपक्ष नेता बने।
वे पहली बार साल 2013 में विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस की बसंती देवी मीणा को हराया था। उसके बाद 2018 और 2023 में कांग्रेस दिग्गज नेता रघुवीर सिंह मीणा को हराकर विधानसभा पहुंचे। अमृतलाल राजस्थान विधानसभा में प्राक्कलन समिति, प्रश्न एवं संदर्भ समिति, विशेषाधिकार समिति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे।
पत्नी के कारण जाना पड़ा था जेल
साल 2021 में अमृतलाल मीणा को 10 दिन से ज्यादा समय जेल में रहना पड़ा था। दरअसल, 2015 में अमृतलाल की पत्नी शांता देवी सेमारी से सरपंच का चुनाव जीती थीं। शांता देवी की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुगना देवी ने उनके खिलाफ फर्जी मार्कशीट को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
सीबी-सीआईडी की जांच में मार्कशीट फर्जी पाई गई। अमृतलाल ने बतौर अभिभावक पत्नी की पांचवीं की मार्कशीट पर साइन किए थे। इसलिए उन्हें आरोपी बनाया गया था। सुगना देवी की शिकायत के बाद मामला स्थानीय कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने विधायक अमृतलाल को मामले में 3 सप्ताह में स्थानीय कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए। न्यायालय ने अमृतलाल की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया था।
CM बोले- ये अपूरणीय क्षति
200 विधायक एक साथ नहीं रहने का संयोग
राजस्थान विधानसभा में 200 विधायक एक साथ नहीं रहने का संयोग लंबे समय से चल रहा है। किसी न किसी वजह से ऐसा हुआ है जब यह संख्या पूरी नहीं रही। कभी विधायकों के निधन, कभी इस्तीफे या कभी जेल जाने के कारण 200 विधायक एक साथ नहीं रहे।
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