बांग्लादेश में हिंदुओं के घर-मंदिरों पर हमले:भीड़ से बचाने के लिए मुस्लिम दे रहे पहरा, कैसे बीते 48 घंटे
‘5 अगस्त की शाम हम कभी नहीं भूलेंगे। उस दिन ऐसा लगा कि बांग्लादेश में कत्लेआम हो जाएगा। मुझे देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदुओं पर हमले की खबरें मिल रही थीं। हम बस चाहते थे कि किसी भी तरह से हिंसा रुक जाए। देर शाम चट्टोग्राम में एक मंदिर पर हमले की खबर आई, ये सुनकर हम खौफजदा हो गए।’
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रह रहे गोविंदो चंद्रप्रामाणिक की दैनिक भास्कर से बातचीत में चिंता साफ नजर आती है। प्रधानमंत्री शेख हसीना पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ चुकी थीं और सड़क पर लोगों का हुजूम था। इस दौरान क्या घटा, उन्होंने पिछले 48 घंटों का अनुभव हमसे साझा किया।
5 अगस्त को प्रदर्शनकारी ढाका की सड़कों पर उतर आए और हालात बिगड़ने लगे, तब बांग्लादेश के बाकी हिस्सों और हिंदू इलाकों में क्या हो रहा था, क्या मुस्लिम कट्टरपंथियों ने प्रदर्शन की आड़ में हिंदू घरों और मंदिरों पर हमला किया, अब वहां अल्पसंख्यक किस हाल में हैं, इन सवालों के जवाब जानने हमने बांग्लादेशी हिंदू महाजोत के प्रेसिडेंट गोविंदो चंद्रप्रामाणिक से बात की।
गोविंदो बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट भी हैं। पढ़िए गोविंदो के साथ पूरी बातचीत:
सवाल: अल्पसंख्यक के तौर पर ढाका में बीते दो दिन कैसे रहे हैं?
जवाब: 5 अगस्त की शाम कुछ हिंदू नेताओं पर हमला हुआ। फिर कुछ मंदिरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन सुबह से हालात काबू में हैं। BNP और जमात के नेताओं ने मुझे भरोसा दिलाया है कि हिंदू परिवारों और मंदिरों को सुरक्षा दी जाएगी। अब हालात पहले से काफी बेहतर हैं।
सवाल: सड़कों पर लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे थे, शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा, तब कैसे हालात थे?
जवाब: 24 जिलों में हिंदू नेताओं, खासतौर पर अवामी पार्टी के नेताओं के घरों पर हमला हुआ। इसमें वो नेता शामिल थे, जो हसीना सरकार में तानाशाही रवैया अपना रहे थे या उसका समर्थन कर रहे थे।
सवाल: बांग्लादेश में हुए सियासी घटनाक्रम को लेकर यहां के हिंदू और बाकी अल्पसंख्यक क्या सोच रहे हैं?
जवाब: शेख हसीना सबसे सांप्रदायिक नेता थीं। उन्होंने कई मदरसे बनवाए, कई इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनवाईं। उन्होंने कई मस्जिदें भी बनवाईं, लेकिन कभी कोई हिंदू मंदिर नहीं बनवाया। बांग्लादेशी हिंदू अब उनका साथ नहीं देंगे।
सवाल: आपकी जिंदगी पिछले दो दिनों में किस तरह बदली है, कोई घटना बताना चाहें?
जवाब: अब हमारी जिंदगी बेहतर हुई है। जब से शांति हुई है, हमें कोई दिक्कत नहीं हो रही है। आर्मी टेकओवर कर चुकी है, कानून व्यवस्था वही संभाल रही है। सारी राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने हमसे वादा किया है कि हम सब सुरक्षित हैं। कोई हमला नहीं होगा, न ही किसी को करने दिया जाएगा।
5 अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश के हालात अल्पसंख्यकों के लिए भी बदल गए हैं। हिंदुओं में डर का माहौल है। हालांकि, बांग्लादेश में ही ऐसी तस्वीरें भी देखने को मिलीं, जहां प्रोटेस्ट का हिस्सा रहे स्टूडेंट्स हिंदू परिवारों और मंदिरों को सुरक्षा दे रहे हैं। ये स्टूडेंट्स मुस्लिम कम्युनिटी से आते हैं।
मंदिर के बाहर पहरा दे रहे मुस्लिम स्टूडेंट्स
ढाका यूनिवर्सिटी में जेंडर स्टडीज डिपार्टमेंट में पढ़ाई कर रहीं माइशा शेख हसीना के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का हिस्सा रही हैं। शेख हसीना ने देश छोड़ा है, तब से वे ढाका में बतौर वॉलंटियर सड़कों पर डटी हुई हैं, ताकि लॉ एंड ऑर्डर न बिगड़े। उनके साथ छात्रों की पूरी फौज है। स्टूडेंट्स का ये ग्रुप अब तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था।
हिंदू परिवारों पर हमले को लेकर माइशा ने हमें बताया, ‘अब तक सरकार का गठन नहीं हो सका है। प्रदर्शन और हिंसा की वजह से हालात बेकाबू न हो, इसलिए हम वॉलंटियर की तरह ही काम कर रहे हैं। हालांकि, हालात काबू में करने के लिए ये काफी नहीं होगा। लोग प्रदर्शन की आड़ में अपनी निजी दुश्मनी निकाल रहे हैं, जिसे बेवजह धार्मिक हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है।’
माइशा आगे बताती हैं, ‘जमात पार्टी के कार्यकर्ताओं से न सिर्फ हिंदू, बल्कि मुस्लिम कम्युनिटी के लोग भी खौफजदा रहते हैं। अगर ये सत्ता में आ गए तो घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। हम चाहते हैं कि हम छात्रों ने जो प्रदर्शन खड़ा किया और चलाया, वो बेकार न जाए। इसीलिए हम चाहते हैं कि जमात पार्टी कभी सत्ता में ना आए।’
ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र मंदिरों के बाहर तैनात हैं। वे बताते हैं कि 5 अगस्त को हालात थोड़े बिगड़े थे, लेकिन जैसे ही हमें लगा कि हिंदुओं को निशाना बनाया जा सकता है, हमने टोलियां बनाकर मंदिरों और हिंदू इलाकों के आसपास तैनात कर दीं। हम नहीं चाहते कि प्रदर्शन की आड़ में किसी अल्पसंख्यक को निशाना बनाया जाए।
प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स के कोऑर्डिनेटर हसनत अब्दुल्लाह ने मीडिया के सामने आकर कहा, ‘सभी प्रदर्शनकारियों से अपील है कि छोटी-छोटी कमेटी बनाएं। ये कमेटी मंदिर और चर्च पर पहरा देंगी। उनकी सुरक्षा करना हमारा फर्ज है।’
उनके साथ में खड़े स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर साजिस आलम ने भी अपील करते हुए कहा, ‘हमारा आंदोलन अवामी लीग के नेता प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। सभी अलर्ट रहें। किसी भी अल्पसंख्यक का नुकसान नहीं होना चाहिए।’
आखिर में बात ढाका के मौजूदा हालात की…
ढाका की सड़कें खाली और हर तरफ शांति, बेहतर हो रहे हालात
बांग्लादेश का मौजूदा हाल जानने हमने वहां के लोकल जर्नलिस्ट एएसएम अतीक से भी बात की। वे बताते हैं, ‘शेख हसीना के देश छोड़ते ही उनकी पार्टी अवामी लीग के कई नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया गया। सभी नेता अब अंडरग्राउंड हैं।
वहीं, 6 अगस्त की सुबह हसीना सरकार में मंत्री रहे जुनैद अहमद पलक को ढाका के हजरत शाह जलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया।
अतीक बताते हैं, ‘ढाका में कई हिंदू मंदिरों को भी निशाना बनाया गया। हिंदुओं के घर और कारोबार को नुकसान पहुंचाया गया। महिलाओं पर भी हमले हुए। हमले करने वाले अवामी लीग के समर्थक बताए जा रहे हैं। हालांकि, 6 अगस्त की सुबह सड़कें खाली थीं। किसी भी तरह की हिंसा की खबरें सामने नहीं आई हैं।’
नोबल विजेता मुहम्मद यूनुस को कमान सौंपने की मांग
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंगलवार को अंतरिम प्रशासन के गठन के लिए संसद भंग कर दी। राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के तीन प्रमुखों, कई सियासी दलों के नेताओं, सिविल सोसायटी के डेलिगेशन और स्टूडेंट मूवमेंट के लीडर्स के साथ चर्चा के बाद लिया। इसी के साथ नए चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।
विरोध प्रदर्शन से जुड़े स्टूडेंट लीडर चाहते हैं कि नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार का नेतृत्व करें। छात्र आंदोलन के कोऑर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने एक वीडियो जारी कर मोहम्मद यूनुस का नाम अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में प्रस्तावित किया है।
शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की आर्मी ने वादा किया था कि बांग्लादेश में मिलिट्री शासन नहीं होगा, बल्कि अंतरिम सरकार बनेगी। प्रदर्शनकारी छात्रों और अवाम को भी ऐसी सरकार बनने की उम्मीद है, जिसमें सभी पक्ष, पार्टी और कम्युनिटी के लोग हों।
जयशंकर बोले- बांग्लादेश से भारतीयों को निकालने जैसे हालात नहीं
बांग्लादेश में बिगड़ते हालात के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार, 6 अगस्त को संसद भवन में ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई।। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात के बारे में बताया।
भारतीयों को बांग्लादेश से निकालने पर विदेश मंत्री ने कहा कि अभी ऐसे हालात नहीं हैं। लगभग 8 हजार छात्र वहां से लौट चुके हैं और 12 हजार भारतीय बाकी हैं।
भारतीय हाई कमीशन में जिन कर्मचारियों की जरूरत नहीं, वे वापस लौट रहे
ढाका में इंडियन हाई कमीशन में तैनात स्टाफ और उनके परिवार भारत लौट रहे हैं। बुधवार को ऑफिशियल सोर्स ने ये जानकारी दी। हालांकि, भारतीय राजनयिक ढाका से काम कर रहे हैं।
पहले भी कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं हिंदू और मंदिर
7 जनवरी 2024 को बांग्लादेश में हुए आम चुनाव हुए थे। अल्पसंख्यकों ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को वोट दिए थे। हालांकि, चुनाव के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले शुरू हो गए और शेख हसीना सरकार उन्हें नहीं रोक पाई। अल्पसंख्यक संगठनों ने दावा किया कि हर महीने कम से कम 3 हमले हो रहे हैं।
शेख हसीना के 5वीं बार बांग्लादेश के PM की शपथ लेने के बाद बांग्लादेश के 6 जिलों कुश्तिया, बागेरहाट, जेनैदाह, गैबांधा, चटगांव और सिलहट में हिंदुओं पर हमले हुए थे।
बांग्लादेश में घट रही हिंदुओं की आबादी
- 2011 की जनगणना के मुताबिक, 16.5 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 8.5% है, जबकि 90% से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। बांग्लादेश में मुस्लिम और हिंदू दोनों मुख्यत: बंगाली हैं, यानी भाषा और सांस्कृतिक रूप से उनमें समानता है। धर्म की वजह से उनके बीच दूरियां हैं, जिसका फायदा कट्टरपंथी उठाते हैं।
- बांग्लादेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 1980 के दशक में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 13.5% थी। वहीं, 1947 में भारत, पाकिस्तान की आजादी के साथ बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान बना था, तो उस समय वहां हिंदुओं की आबादी करीब 30% थी।
- करीब चार दशकों में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी 13.5% से घटकर 8.5% रह गई। बांग्लादेशी सरकार के 2011 के जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, एक दशक में हिंदुओं की संख्या में कम से कम 10 लाख की कमी आई।
- एक रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री और प्रोफेसर अब्दुल बरकत ने अपनी स्टडी में पाया कि पिछले कुछ साल में सुरक्षा और आर्थिक वजहों से हर दिन करीब 750 हिंदू बांग्लादेश से पलायन कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर हिंदू भारत आने की कोशिश करते हैं।
