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हाईकोर्ट का ED से सवाल- केजरीवाल को फिर गिरफ्तार करेंगे:जांच एजेंसी ने केजरीवाल के जमानत को चुनौती दी, ट्रायल कोर्ट ने जमानत दी थी

दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री अरिवंद केजरीवाल की जमानत के खिलाफ बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने ED से पूछा कि क्या जांच एजेंसी दिल्ली के मुख्यमंत्री को दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है।

बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने ED से कहा कि मैं असमंजस में हूं। आप करना क्या चाहते हैं? क्या आप केजरीवाल को दोबारा गिरफ्तार करने जा रहे हैं?

ED की ओर से पेश हुए वकील विवेक गुरनानी ने कोर्ट को बताया कि ASG एसवी राजू दूसरे केस में व्यस्त हैं, इसलिए कोर्ट इस केस को कल या किसी और दिन सुनवाई कर ले। केजरीवाल की ओर से पेश हुए वकील विक्रम चौधरी ने कहा कि यह सरासर उत्पीड़न का मामला है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल चुकी है। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी नहीं आई है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दे दी थी
दरअसल, 20 जून को राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दे दी थी। 21 जून को ED ने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी। 25 जून को इस पर सुनवाई हुई। ED ने तब हाईकोर्ट से कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने हमारा पक्ष ठीक से नहीं सुना। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा- सही ढंग से बहस नहीं हुई थी, इसलिए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को रद्द करते हैं।

कोर्ट ने कहा- फैसले को देखकर ऐसा लगता है कि केजरीवाल को जमानत देते समय विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। अदालत को ED को बहस करने के लिए पर्याप्त अवसर देना चाहिए था।

दिल्ली CM केजरीवाल पर ED के अलावा CBI का केस भी चल रहा है। शराब नीति में भ्रष्टाचार को लेकर CBI ने उन्हें 26 जून को गिरफ्तार किया था।

12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को ED के केस में अंतरिम जमानत दे दी थी, लेकिन मामला बड़ी बेंच को ट्रांसफर कर दिया था। इस पर सुनवाई की तारीख सामने नहीं आई है।

यह दलील पिछली सुनवाई में केजरीवाल के वकील ने दी थी।

हाईकोर्ट की 5 टिप्पणियां

  1. ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी पर विचार नहीं किया जा सकता, पूरी तरह से अनुचित है। यह दर्शाता है कि ट्रायल कोर्ट ने सामग्री पर अपना दिमाग नहीं लगाया है।
  2. इस बात पर मजबूत तर्क दिया गया कि जज ने धारा 45 PMLA की दोहरी शर्त पर विचार-विमर्श नहीं किया।
  3. ट्रायल कोर्ट को ऐसा कोई निर्णय नहीं देना चाहिए जो हाईकोर्ट के फैसले से उलट हो।
  4. ट्रायल कोर्ट ने धारा 70 PMLA के तर्क पर भी विचार नहीं किया है।
  5. कोर्ट का यह भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को लोकसभा चुनाव के लिए जमानत दी थी। एक बार जब उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट से खारिज कर दी गई है, तो यह नहीं कहा जा सकता है कि कानून का उल्लंघन करके उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया था।

केजरीवाल के हाईकोर्ट को दिए जवाब की बड़ी बातें…

  • ED कस्टडी के दौरान जांच अधिकारी ने कोई खास इंट्रोगेशन (पूछताछ) नहीं किया। एक राजनीतिक विरोधी को परेशान और अपमानित करने के लिए अवैध रूप से गिरफ्तारी की गई है।
  • केजरीवाल ने कहा कि ED की दलीलें कानून के हिसाब से ठीक नहीं थीं। ED की दलीलें असंवेदनशीलता के रवैये को दर्शाती हैं। PMLA की धारा 3 के तहत मेरे खिलाफ कोई केस नहीं बनता है। और मेरे जीवन और स्वतंत्रता को झूठे और दुर्भावनापूर्ण मामले से बचाया जाना चाहिए।
  • ED ने अन्य सह आरोपियों पर दबाव बनाया और उनसे ऐसे बयान दिलवाए, जिससे केस में ED को फायदा हुआ। ट्रायल कोर्ट का जमानत ऑर्डर न केवल तर्कपूर्ण था, बल्कि यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों की दलीलों पर विवेक के आधार पर फैसला सुनाया गया था।
  • ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि AAP को साउथ ग्रुप से रिश्वत मिली है। इस रिश्वत का गोवा चुनाव में इस्तेमाल तो दूर की बात है। AAP के पास एक भी रुपया नहीं मिला। इस संबंध में लगाए गए आरोप को साबित करने के कोई भी ठोस सबूत नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…

ED ने 208 पेज की सातवीं सप्लिमेंट्री चार्जशीट सबमिट की, कहा- केजरीवाल शराब नीति केस के सरगना
ED ने 9 जून को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सातवीं सप्लिमेंट्री चार्जशीट जमा की थी। 208 पेज की इस चार्जशीट में दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को केस का सरगना और साजिशकर्ता बताया गया। चार्जशीट में कहा गया कि स्कैम से मिला पैसा आम आदमी पार्टी पर खर्च हुआ है।

यह भी दावा किया गया कि केजरीवाल ने शराब बेचने के कॉन्ट्रेक्ट के लिए साउथ ग्रुप के सदस्यों से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 45 करोड़ रुपए गोवा चुनाव पर खर्च किए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…

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