केरल हाईकोर्ट का कहना है कि कार्टूनिस्ट, प्रेस और मीडिया का ही जरूरी हिस्सा हैं। इस नाते नाते भारतीय संविधान का आर्टिकल 19 (1) (A) उन्हें भी अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है।
यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय ध्वज के अपमान करने के लिए राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के अंतर्गतदर्ज केस खारिज कर दिया।
दरअसल, मलयाला मनोरमा ने 70वें स्वतंत्रता दिवस पर महात्मा गांधी और भारतीय ध्वज का कार्टून पब्लिश किया था, जिसमें केसरिया भाग के ऊपरी हिस्से को काली लाइन से दिखाया गया था।
शिकायत BJP रीजनल कमेटी के महासचिव ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने FIR और क्लोजर रिपोर्ट रद्द करने की मांग की थी।
कार्टूनिस्ट को अपनी राय जाहिर करने का मौलिक अधिकार
जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने सुनवाई के दौरान कहा कि कार्टूनिस्ट का छोटा सा चित्र पावरफुल विजुअल कमेंट होता है जो देखने वालों को आकर्षित और प्रेरित करता है। कार्टूनिस्ट भी प्रेस और मीडिया का ही हिस्सा हैं। उन्हें भी संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली है।
मौलिक अधिकार उन्हें कार्टून, कैरिकेचर और दृश्य कला के बाकी फॉर्मेट्स के जरिए अपनी राय, विचार और रचनात्मकता व्यक्त करने की परमिशन देता है। हालांकि, यह आजादी भी संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत कुछ प्रतिबंध के अधीन है, ताकि देश की एकता, अखंडता पर असर न हो।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के कमेंट्स…
- जस्टिस कुन्हिकृष्ण ने कहा कि कैरिकेचर में हास्य, व्यंग्य या आलोचनात्मक प्रभाव के लिए किसी व्यक्ति की बनावट, व्यक्तित्व या खासियत को बढ़ा-चढ़ाकर या बिगाड़ना शामिल है। कोर्ट ने कहा कि एक कार्टूनिस्ट के पास एक छोटे से कैरिकेचर के माध्यम से बहुत कुछ कहने की शक्ति होती है।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि अपमान शब्द राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम की धारा 2 के तहत दंडनीय अपराध को बताने के लिए जरूरी तत्व है। इसके तहत राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का अपमान करने के लिए 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
- अधिनियम में अपमान शब्द की परिभाषा नहीं है।इसलिए कोर्ट को इसके सामान्य अर्थ को बतायाजाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अपमान को आमतौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने, किसी के आत्मसम्मान या गरिमा को कम करने, क्रोध या शत्रुता को भड़काने या अवमानना या अनादर करने के इरादे से की गई कार्रवाई के रूप में समझा जाता है।
- अधिनियम 1971 राष्ट्रीय सम्मान के अपमान को रोकने के लिए है। जब तक राष्ट्रीय सम्मान का अपमान करने के इरादे से जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तब तक अधिनियम 1971 के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई रद्द की जाती है।
