यूपी में लव जिहाद के दोषी को अब उम्रकैद की सजा होगी। साथ ही एक लाख रुपए जुर्माना भी भरना होगा। राज्य विधानसभा में मंगलवार को लव जिहाद विरोधी बिल पास हो गया।
योगी सरकार ने ‘यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक’ सोमवार को सदन में रखा था। इसमें धर्म परिवर्तन से जुड़े अपराधों में सजा की अवधि और जुर्माना भी बढ़ा दिया गया है। धर्म परिवर्तन के लिए विदेशों से होने वाली फंडिंग रोकने के लिए सजा को सख्त किया गया है।
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 14 साल की सजा होगी
- पारित बिल के अनुसार धोखे से या बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन और शादी कराने पर पहले एक से पांच साल की जेल और 15 हजार रुपए जुर्माना था। अब 3 से दस साल की जेल और 25 हजार रुपए जुर्माना होगा।
- नाबालिग SC/ST महिला के साथ लव जिहाद पर 2 से 10 साल तक की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माना लगता था। अब 5 से 14 साल तक जेल और एक लाख रुपए जुर्माना होगा।
- अवैध ढंग से सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने पर अभी 3 से 10 साल की जेल और 50 हजार रुपए जुर्माना लगता है। अब 7 से 14 साल की जेल और 1 लाख रुपए जुर्माना लगेगा।
- अब कोई भी व्यक्ति धर्मांतरण के मामलों में FIR दर्ज करा सकता है। पहले पीड़ित, माता-पिता या भाई-बहन की मौजूदगी जरूरी थी।
- लव जिहाद के मामलों की सुनवाई सेशन कोर्ट से नीचे का कोर्ट नहीं करेगा।
- लव जिहाद के मामले में सरकारी वकील को मौका दिए बिना जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा।
- सभी अपराध गैर-जमानती होंगे।
विधेयक में क्यों करना पड़ा संशोधन?
सरकार का कहना है कि अपराध की गंभीरता, महिलाओं की सामाजिक स्थिति व गरिमा के हित में ऐसा फैसला लिया गया। साथ ही एससी-एसटी के लोगों का अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सजा और जुर्माना बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई। बिल में पीड़ित के इलाज का खर्च और पुनर्वास का पैसा भी कोर्ट तय कर सकेगा।
अपराध का दायरा बढ़ाया
अवैध धर्म परितर्वन के लिए फंडिंग भी को भी क्राइम माना जाएगा। किसी विदेशी संस्था या किसी भी अवैध संस्था से यदि धर्म परितर्वन के लिए फंडिंग हुई तो संस्था के संचालकों पर भी एक्शन होगा।
धर्म परिवर्तन के लिए किसी को डराया, संपत्ति का डर दिखाया, मारपीट की, या शादी का दबाव बनाया तो भी उम्रकैद और जुर्माना भुगतना होगा।
यह बिल 2021 में विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित हुआ था। उस समय इसमें अधिकतम 10 वर्ष की सजा और 50 हजार रुपए का जुर्माना का प्रावधान था। सरकार ने प्रस्तावित संशोधित विधेयक में सजा और जुर्माना दोनों को बढ़ाया है।
