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महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 सीटों पर काउंटिंग शुरू:बीजेपी के प्रणय, योगेश,पंकजा मुंडे विजयीं; उद्धव के निजी सचिव नार्वेकर 17 वोट पर अटके

महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 सीटों पर काउंटिंग शुरू:बीजेपी के प्रणय, योगेश,पंकजा मुंडे विजयीं; उद्धव के निजी सचिव नार्वेकर 17 वोट पर अटके

मुंबई20 मिनट पहले
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मतदान के लिए विधानसभा पहुंचे। वहीं अजित पवार समेत अन्य नेता होटल से बस में वोटिंग के लिए गए।

महाराष्ट्र में विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के लिए शुक्रवार (12 जुलाई) को वोटिंग हुई। इसके बाद काउंटिंग शुरू हुई। विधान भवन कॉम्प्लेक्स में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक 270 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

अब तक हुई काउंटिंग में BJP के प्रणय फुके, योगेश तिलकरे और पंकजा मुंडे जीत गई हैं। वहीं, उद्धव ठाकरे के निजी सचिव मिलिंद नार्वेकर 17 वोट पर अटके हुए हैं।

विधान परिषद के 11 सदस्य 27 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। इनकी जगह भरने के लिए 11 सीटों पर 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में अभी 274 विधायक हैं, जिन्होंने इनके लिए वोट किया। फायरिंग केस में जेल में बंद गणपत गायकवाड़ ने भी वोट डाला।

विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक कैंडिडेट को 23 विधायकों के वोट चाहिए। इनमें भाजपा के 103, शिवसेना (शिंदे गुट) के 38, NCP (अजित गुट) के 42, कांग्रेस के 37, शिवसेना (यूबीटी) के 15 और NCP (शरद पवार) के 10 विधायक हैं।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधान भवन कॉम्प्लेक्स में मतदान किया।

चुनाव में 6 पार्टियों ने उतारे 12 कैंडिडेट
महाराष्ट्र में सत्ता संभाल रही महायुति ने चुनाव में 9 कैंडिडेट उतारे हैं। इसमें BJP ने सबसे ज्यादा 5 कैंडिडेट खड़े किए हैं। वहीं, अजित पवार की NCP और शिवसेना शिंदे गुट ने दो-दो कैंडिडेट उतारे हैं। विपक्ष में बैठी महाविकास अघाड़ी के 3 उम्मीदवार मैदान में हैं।

इसमें कांग्रेस और शिवसेना- UBT ने 1-1 कैंडिडेट खड़ा किया है, जबकि शरद पवार की NCP यानी NCP-SP शेतकरी कामगार पक्ष के उम्मीदवार जयंत पाटिल का समर्थन कर रही है। जयंत पाटिल अभी MLC हैं।

कांग्रेस-शिवसेना ने जेल में बंद भाजपा विधायक की वोटिंग का विरोध किया
शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ पर पुलिस स्टेशन में फायरिंग करने वाले भाजपा विधायक गणपत गायकवाड़ भी मतदान करने विधान भवन पहुंचे। उन्हें मतदान के लिए कोर्ट से परमिशन मिली थी। वे कल्याण पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक है। उन्हें फरवरी में पुलिस स्टेशन के अंदर एक शिवसेना नेता पर गोली चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने इसका विरोध किया। कांग्रेस ने विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर गायकवाड़ को मतदान के लिए रोकने की मांग की। शिवसेना (यूबीटी) के विधायक संजय राउत ने गायकवाड़ को मतदान की अनुमति देने को सत्ता का दुरुपयोग बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में विधान परिषद ​​​​​​ के चुनाव में ​NCP विधायक नवाब मलिक और अनिल देशमुख को मतदान की अनुमति नहीं दी गई थी।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के नेता पर पुलिस स्टेशन में फायरिंग करने वाले भाजपा विधायक गणपत गायकवाड भी मतदान करने विधान भवन पहुंचे।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के नेता पर पुलिस स्टेशन में फायरिंग करने वाले भाजपा विधायक गणपत गायकवाड भी मतदान करने विधान भवन पहुंचे।

क्रॉस वोटिंग से महाविकास अघाड़ी को हो सकता है फायदा
लोकसभा नतीजों के बाद महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी का पलड़ा भारी है, लेकिन MLC चुनाव में BJP और उसके गठबंधन वाली महायुति मजबूत दिख रही है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और सीनियर जर्नलिस्ट्स के मुताबिक, महायुति 11 में से 9 सीटें जीत सकती है। वहीं, महाविकास अघाड़ी को फिलहाल सिर्फ 2 सीटें ही मिलती दिख रही हैं।

हालांकि लोकसभा चुनावों के बाद माहौल बदला है और शिंदे गुट वाली शिवसेना और अजित पवार वाली NCP के कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। ऐसे में चुनाव में अगर क्रॉस वोटिंग हुई, तो महाविकास अघाड़ी को इसका फायदा मिल सकता है। ये फायदा कितना होगा, ये देखना अभी बाकी है, लेकिन इस चुनाव के नतीजों का असर महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों पर भी देखने को मिलेगा।

क्रॉस वोटिंग के डर के बीच होटल शिफ्ट हुए विधायक
क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि सभी निर्दलीय उम्मीदवार उनके पक्ष में वोट करेंगे। उन्हें भरोसा है कि महायुति सभी 9 सीटों पर जीत हासिल करेगी।

क्रॉस वोटिंग के डर के बीच भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और NCP (अजित गुट) ने अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया था। सभी विधायक होटल से ही मतदान के लिए विधानसभा पहुंचे।

वहीं कांग्रेस ने महायुति के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की आशंका को अफवाह बताया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने कहा कि कांग्रेस का एक भी नेता क्रॉस वोटिंग में शामिल नहीं है।

4 सीटों पर हुए चुनावों में NDA-INDIA ब्लॉक बराबरी पर

महाराष्ट्र विधान परिषद की चार सीटों पर बीते 26 जून को चुनाव हुए थे। 1 जुलाई को आए नतीजों में महायुति और महाविकास अघाड़ी बराबरी पर रहीं। मुंबई ग्रेजुएट और मुंबई शिक्षक सीट पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना-UBT का दबदबा रहा।

मुंबई ग्रेजुएट सीट से अनिल परब और मुंबई शिक्षक सीट से जे. एम. अभ्यंकर ने जीत हासिल की। वहीं, कोंकण ग्रेजुएट सीट पर BJP के निरंजन डावखरे ने जीत हासिल की। जबकि नासिक शिक्षक सीट से शिवसेना के किशोर दराडे ने जीत दर्ज की है।

राज्यसभा की तरह विधान परिषद भी उच्च सदन, ये है चुनाव की प्रक्रिया
सीनियर जर्नलिस्ट जितेंद्र दीक्षित बताते हैं कि विधान परिषद, राज्यसभा की तरह ही उच्च सदन होता है। भारतीय संविधान की धारा 169 में ये प्रावधान है कि कई राज्य विधान परिषद को स्थापित या खत्म कर सकते हैं। अभी कुल 6 राज्यों में विधान परिषद है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

राज्यसभा की तरह ही विधान परिषद भी एक परमानेंट सदन है। इसे बीच में डिसॉल्व नहीं किया जा सकता है। इसके लिए भी हर दो साल में चुनाव होते हैं। इन चुनावों में आम नागरिक हिस्सा नहीं ले सकते हैं। विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर्ड हो जाते हैं।

एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं
महाराष्ट्र विधान परिषद के एक तिहाई सदस्य नगर निगम या महानगर पालिका के प्रतिनिधि चुनते हैं। जबकि एक तिहाई सदस्य विधानसभा में चुनकर आए विधायक चुनते हैं। 1/6 सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, जो कला, खेल, विज्ञान, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से आते हैं। इसके अलावा टीचर वर्ग और ग्रेजुएट वर्ग भी अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त करता है।

विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधानसभा की संख्या से एक तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकती। महाराष्ट्र में विधानसभा के 288 सदस्यों के साथ विधान परिषद में 77 सदस्य हो सकते हैं। विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिए योग्यताएं लगभग एक जैसी हैं।

हालांकि विधानसभा के लिए उम्र 25 साल और विधान परिषद के लिए 30 साल है। विधानसभा के सदस्य 5 साल के लिए चुने जाते हैं, जबकि विधान परिषद के सदस्य 6 साल के लिए निर्वाचित होते हैं।

विधानसभा ज्यादा पावरफुल है। मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना होता है, वरना सरकार गिर जाती है। मुख्यमंत्री को विधान परिषद या विधानसभा में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी है।

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