रामभद्राचार्य बोले- मथुरा में मंदिर से जुड़े साक्ष्य मेरे पास:मैंने अपनी आंखों से रामलला के दर्शन किए; मेरी भविष्यवाणी मोदी की 370 सीटें आएंगी
पवित्र मंदाकिनी नदी की गोद, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सीमा पर बसा शहर चित्रकूट। जहां प्रभु श्रीराम ने वनवास का सर्वाधिक समय बिताया। यह पवित्रधाम अब जगद्गुरु शंकराचार्य रामभद्राचार्य के आश्रम के रूप में भी जाना जाता है।
जन्म से बिना आंखों के संसार को देखने, समझने और सौ से अधिक पुस्तकें लिखने वाले इस संत में कुछ तो दिव्य शक्ति है कि ये जो धर्म के लिए कहते हैं, वही करते हैं। कहते हैं कि चित्रकूट को चंडीगढ़ की तरह केंद्रशासित प्रदेश बना देना चाहिए। युवाओं को सफलता के लिए टिप्स देते हुए कहते हैं कि कोई शॉर्टकट फॉर्मूला नहीं है, विनम्र होकर भगवान की शरण में जाएं, सभी सद्गुण आ जाएंगे।
ने शंकराचार्य रामभद्राचार्य से बात की तो उन्होंने सपाट सटीक और स्वभाव के मुताबिक मुंहफट जवाब दिए। पढ़िए एक्सक्लूसिव बातचीत-
सवाल- भगवान राम ने वनवास काल में साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट में बिताए। आप वहीं रहते हैं, क्या इस ऐतिहासिक धर्मस्थली के कायाकल्प की जरूरत नहीं महसूस होती?
जवाब- मैं लगातार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ केंद्र सरकार के संपर्क में हूं। मैंने खुद एक प्रस्ताव बनाकर दिया है, जिसमें एक विकल्प सुझाया है कि चित्रकूट को अलग से चंडीगढ़ की तरह केंद्रशासित प्रदेश बनाकर विकास किया जा सकता है। अभी दो सरकारों के बीच बंटे शहर में यह संभव नहीं है। जल्दी ही इसका फैसला होगा। चित्रकूट या तो उत्तर प्रदेश को सौंप देना चाहिए, नहीं तो पूरी तरह से मध्य प्रदेश को।
सवाल- आप कहते हैं कि राम मंदिर के बाद अब मथुरा की बारी है। क्या आपके पास मथुरा में श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रमाण भी हैं?
जवाब- मैं आपसे क्यों साझा करूं, जहां करने होंगे वहां करूंगा। हां यह लिख लो? हम अल्फाबेट सिस्टम से आगे बढ़ रहे हैं, अकाम (AKM) यानी पहले A से अयोध्या फिर K से काशी और फिर M से मथुरा। कोई नहीं रोक सकता सारे सबूत हैं हमारे पास।
सवाल- आप अपने दिव्य चक्षुओं से नहीं दिल और अपनी बुद्धि से मनुष्य को देखते हैं, पढ़ते हैं? अयोध्या में राम के दर्शन का आप कैसे बखान करेंगे?
जवाब- आप स्पष्ट तौर पर सुन लें, मैं दिल और बुद्धि से कुछ नहीं करता हूं, जो भी करता हूं, अपने चक्षुओं से ही करता हूं। किसने कहा, मैंने प्रभु श्रीराम के दर्शन नहीं किए। मोदी के बाद मैं पहला व्यक्ति हूं, जिसने भगवान रामलला के दर्शन किए। मैंने रामलला को झुनझुना दिया। इतना सुंदर बालक आज तक नहीं देखा। “मन मों न बस्यो बालक जो तुलसी जग में फल कौन जिए”।
सवाल- राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने और फिर अदालत में गवाह बनने का विचार आपको कैसे आया?
जवाब- वेदों पुराणों और उपनिषदों के अध्ययन से मुझे यह स्पष्ट हुआ कि प्रभु श्रीराम का जन्म सरयू नदी की किस दिशा में और कहां हुआ है। इतिहास के पन्नों में दर्ज और रामचरितमानस के श्लोकों से मैंने यह साबित किया यही और इस जगह श्रीराम का जन्मस्थान है और यही फैसला आया।
सवाल- आप धर्मशास्त्र, दर्शन शास्त्र सहित शिक्षाविद, बहुभाषावादी यथार्थ, सिद्धांत और सत्य की खोज जैसे विषयों पर एक साथ कैसे काम करते हैं?
जवाब- यह ईश्वरीय क्षमता है, अध्ययन की क्षमता है। सोच के साथ समझने की ऊर्जा है, इसके अलावा कुछ नहीं। मेरा मानना है कि क्षमता है तो असंभव कुछ नहीं है।
सवाल- आपने कहा 2024 में सत्ता तीसरी बार रिपीट होगी और 370 सीटें आएंगी, यह कोई गणित है? समीकरण है, भविष्यवाणी है या विश्लेषण?
जवाब- यह न गणित है, न विश्लेषण और न ही कोई समीकरण यह मेरी विशुद्ध भविष्यवाणी है, जो सोलह आने सच होगी।
सवाल- आप युवाओं को सफलता के लिए क्या फॉर्मूला देंगे?
जवाब- एक ही फॉर्मूला है, भगवान के सामने विनम्र हो जाओ, सारे सद्गुण आ जाएंगे।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के कुछ चर्चित बयान-
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