वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कहा, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा अपने पिता के लिए लखीमपुर में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। वहां पर ट्राई-साइकिल बांट रहे हैं। कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। यह सब जमानत की शर्तों का उल्लंघन है। मुझे नहीं पता उन्हें इस बात की इजाजत कैसे दी जा रही है? मैं इसके लिए हलफनामा दाखिल करूंगा और सबूत भी
प्रशांत भूषण के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई। जस्टिस सूर्यकांत और पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा-अगर आशीष मिश्रा लखीमपुर में कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से उनकी जमानत शर्तों का उल्लंघन होगा। वहीं, आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे ने इन आरोपों से इनकार किया।
प्रशांत भूषण लखीमपुर में हुए तिकुनिया कांड में पीड़ितों के परिवार की तरफ से केस लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल आशीष मिश्रा को अंतरिम जमानत पर रिहा किया था। तब कोर्ट ने शर्त रखी थी कि आशीष बस लखीमपुर मामले की सुनवाई के दौरान वहां जा सकते हैं। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
आशीष के वकील ने कहा- कागज पर कही गई बातों में अंतर
आशीष के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा- हमारे अनुसार ऐसा कुछ नहीं हुआ है। मैं इतना मूर्ख नहीं हूं कि इस तरह से कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करूं। मैं वीडियो पर भरोसा नहीं करता हूं। कोर्ट ने मौखिक रूप से प्रशांत भूषण से अपने आरोपों का एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा। हालांकि, आज पारित आदेश में इसके बारे में कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया।
15 फरवरी 2022 को आशीष जेल से बाहर आया था
लखीमपुर में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा के बाद पहली बार 9 अक्टूबर को आशीष मिश्रा ने सरेंडर किया था। 10 अक्टूबर को SIT ने उसको गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह अब तक 129 दिन तक जेल में रहा। 10 फरवरी, 2022 को हाईकोर्ट ने आशीष मिश्रा को जमानत दी थी। 15 फरवरी को आशीष जेल से बाहर आया था।
गवाहों पर हमले के बाद दिए थे सरेंडर के आदेश
आशीष की जमानत के बाद 10 मार्च, 2022 को तिकुनिया कांड के गवाह दिलजोत सिंह पर हमला हुआ। उसी दिन तिकुनिया थाने में दिलजोत सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई। फिर अप्रैल में रामपुर में हरदीप सिंह पर हमला हुआ। सुप्रीम कोर्ट में वकील ने गवाहों पर हमले के मामले को उठाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा के आदेश दिए। साथ ही आशीष मिश्रा को सरेंडर करने के आदेश दिए।
मां के इलाज के लिए दिल्ली जाने की मिली थी इजाजत
आशीष ने 24 अप्रैल, 2022 को सरेंडर कर दिया। इसके बाद 25 जनवरी, 2023 को कोर्ट ने आशीष मिश्रा को 8 हफ्ते यानी 2 महीने की सशर्त जमानत दी थी। शर्तों के मुताबिक, आशीष न तो दिल्ली में रह सकता था और न ही यूपी में। हालांकि, बाद में मां के इलाज के लिए उसको दिल्ली जाने की इजाजत दे दी गई थी।
लखीमपुर हिंसा में हत्या का आरोपी है आशीष
6 दिसंबर, 2022 को निचली अदालत ने लखीमपुर हिंसा में 13 आरोपियों पर चार्ज तय किए थे। आशीष मिश्रा पर IPC की धारा 147, 148 के तहत दंगा, धारा 302 के तहत हत्या, 307 यानी हत्या का प्रयास, 326 यानी जानबूझकर खतरनाक हथियारों से जानलेवा चोट देने का आरोप है।
आशीष के आलावा इस केस में 12 और आरोपी हैं। इनमें अंकित दास, लतीफ काले, नंदन सिंह बिष्ट, सत्य प्रकाश त्रिपाठी, आशीष पांडे, शेखर भारती, लवकुश राणा, सुमित जायसवाल, शिशु पाल, रिंकू राणा, उल्लास कुमार त्रिवेदी और धर्मेंद्र बंजारा शामिल हैं।
पढ़िए लखीमपुर में 3 अक्टूबर, 2021 को क्या हुआ था?
लखीमपुर जिले के तिकुनिया थाना क्षेत्र में 3 अक्टूबर 2021 को हिंसा हुई थी। आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू के इशारे पर थार जीप से प्रदर्शनकारी किसानों को कुचल दिया गया था। घटना में 4 किसानों की मौत हो गई थी। हिंसा भड़कने के बाद कुल 8 लोगों की जान गई थी। किसान यहां तीन कृषि कानूनों के विरोध में धरना देने और मंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जुटे थे।
